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‘जस्टिस’ बनकर अधिकारियों को ‘ठोकने’ वाला जालसाज ढेर, बस्ती पुलिस ने उतारा फर्जी रसूख का भूत!

सिस्टम को उंगलियों पर नचाने का मुगालता खत्म! मोबाइल में 'साहब' बनकर डराने वाला विनय चौधरी गिरफ्तार।

अजीत मिश्रा (खोजी)

सत्ता का नशा या शातिर दिमाग? ‘जस्टिस’ बनकर अधिकारियों को हड़काने वाला ‘फर्जी किंग’ सलाखों के पीछे!

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।

  • ​वर्दी का खौफ नहीं, फोन पर रौब: बस्ती पुलिस ने तोड़ा फर्जी ‘प्रभाव’ का तिलस्म, शातिर सलाखों के पीछे। फर्जी पहचान और छद्म नाम का खेल खत्म, अधिकारियों पर दबाव बनाने वाला शातिर दबोचा गया।
  • नेपाली मुद्रा और एटीएम का जखीरा: फोन पर ‘जस्टिस’ बनकर उगाही करने वाले का पर्दाफाश। सावधान! आपके पास भी आ सकता है किसी ‘प्रभावशाली’ का फर्जी कॉल, बस्ती पुलिस ने बेनकाब किया बड़ा जालसाज।
  • फर्जी ‘जस्टिस’ का असली चेहरा: पुलिस की घेराबंदी में धरा गया शातिर विनय। रसूख की आड़ में अधिकारियों को डराने वाला जालसाज गिरफ्तार।
  • फोन पर ‘पावर’ का खेल: ठगी और दबाव की राजनीति करने वाला विनय चौधरी गया जेल।

बस्ती। सिस्टम की आंखों में धूल झोंकना और अधिकारियों की कुर्सी को चुनौती देना कुछ लोगों का पेशा बन चुका है। लेकिन बस्ती पुलिस ने ‘प्रभाव’ और ‘छद्म पहचान’ के इस खेल का पर्दाफाश करते हुए एक ऐसे शातिर अपराधी को दबोचा है, जो खुद को ‘जस्टिस’ बताकर प्रशासन की नाक में दम कर रखा था।

वर्दी की सख्ती के आगे ‘जस्टिस’ का रौब ढेर

​कहते हैं कानून के हाथ लंबे होते हैं, और बस्ती पुलिस की सर्विलांस टीम ने इसे साबित कर दिया। कोतवाली थाना क्षेत्र के रैपुरा जंगल का रहने वाला विनय कुमार चौधरी (32), जो अब तक मोबाइल की स्क्रीन पर फर्जी पहचान बनाकर अधिकारियों पर दबाव बना रहा था, अब पुलिस की गिरफ्त में है। पकड़े जाने के वक्त यह शातिर नेशनल हाईवे पर गोरखपुर भागने की फिराक में था, लेकिन पटेल चौक के पास घेराबंदी कर पुलिस ने इसके रसूख का गुब्बारा फोड़ दिया।

मोबाइल में ‘जस्टिस’ का खेल: कैसे चलता था उगाही और दबाव का धंधा?

​जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले हैं। आरोपी विनय कुमार ने अपने मोबाइल में कुछ नंबर ‘जस्टिस’ जैसे प्रभावशाली नामों से सेव कर रखे थे। जब वह अधिकारियों को कॉल करता, तो कॉलर आईडी और बातचीत के लहजे से ऐसा भ्रम पैदा करता कि सामने वाला दबाव में आ जाए। अधिकारियों को डराना, अपना काम निकलवाना और खुद को सत्ता के गलियारों का रसूखदार बताना—यही इस ठग की कार्यशैली थी।

बरामदगी की लंबी फेहरिस्त: केवल ठगी या कोई गहरा जाल?

पुलिस ने जब आरोपी की तलाशी ली, तो उसके पास से न केवल विवो का एंड्रॉयड फोन और ब्लूटूथ मिला, बल्कि 20,000 रुपये नकद, नेपाली मुद्रा, और पहचान पत्रों का अंबार भी मिला। आरोपी के पास से पैन कार्ड, वोटर आईडी, ड्राइविंग लाइसेंस और तीन एटीएम कार्ड का मिलना इस बात की ओर इशारा करता है कि यह खेल महज शौक नहीं, बल्कि एक संगठित अपराध का हिस्सा हो सकता है।

 

इन धाराओं में कसा गया शिकंजा

​बस्ती पुलिस ने विनय कुमार पर बीएनएस (BNS) की धारा 319, 318, 204, 221, 338, 339, 341 और 66 आईटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है। प्रभारी निरीक्षक मोतीचंद राजभर और उनकी टीम ने जिस तेजी से इस ‘सफेदपोश’ जालसाज को बेनकाब किया है, उससे विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।

बड़े नेटवर्क की तलाश जारी

​अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि इस आरोपी ने किन-किन विभागों के काम प्रभावित किए? क्या इसके पीछे कोई मास्टरमाइंड है या यह अकेला ही सिस्टम को चुनौती दे रहा था? पुलिस की जांच अब इस बात पर टिकी है कि फर्जी ‘जस्टिस’ बनकर इसने कितनी जगहों पर उगाही की है।

सावधान रहें! यह मामला उन अधिकारियों के लिए भी सबक है जो फोन पर आने वाले ‘प्रभाव’ से दब जाते हैं। बस्ती पुलिस की इस कार्रवाई ने साफ संदेश दिया है कि पहचान बदलकर सिस्टम को बंधक बनाने वालों का ठिकाना सिर्फ और सिर्फ जेल है।

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