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बदहाल गौर सीएचसी: प्रभारी डॉ. भास्कर यादव ड्यूटी से नदारद, स्वास्थ्य सिस्टम का निकला ‘दम’

कुर्सी खाली, कमरे पर ताला: गौर सीएचसी में 'लापता' डॉक्टर के भरोसे मरीजों की जान!

अजीत मिश्रा (खोजी)

सिस्टम की ‘सर्जरी’ कौन करेगा? सीएचसी गौर में प्रभारी ही ‘लापता’, भगवान भरोसे मरीजों की जान!

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश

  • साहब को नहीं है ड्यूटी की परवाह! गौर सीएचसी में ताला बंद, जिम्मेदार मौन
  • स्वास्थ्य विभाग की ‘कुंभकर्णी’ नींद: सीएचसी गौर में मनमानी की भेंट चढ़ीं सरकारी सेवाएं

गौर (बस्ती)। सरकारी दावों में भले ही स्वास्थ्य सेवाएं ‘चकाचक’ हों, लेकिन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) गौर की जमीनी हकीकत किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं है। यहाँ के प्रभारी डॉ. भास्कर यादव की ‘लापरवाही’ और ‘मनमानी’ ने पूरे केंद्र को सफेद हाथी बना दिया है। आलम यह है कि जब मुखिया ही मैदान छोड़कर गायब है, तो मातहतों से कर्तव्यनिष्ठा की उम्मीद करना बेमानी है।

साहब के कमरे पर लटकता ताला, सिस्टम को दे रहा चिढ़ावा

मीडिया टीम द्वारा पिछले कई महीनों से किए गए औचक निरीक्षण में एक बात सामान्य रही—प्रभारी डॉ. भास्कर यादव के कमरे पर लटकता भारी-भरकम ताला। आखिर साहब अस्पताल सेवा देने आते हैं या सिर्फ कागजों में हाजिरी लगाने? सूत्रों की मानें तो अधीक्षक महोदय कभी भी सीएचसी पर रात्रि विश्राम नहीं करते। रात के अंधेरे में जब गरीब मरीज इमरजेंसी की उम्मीद लेकर यहाँ आता है, तो उसे केवल सन्नाटा और अव्यवस्था ही मिलती है।

आरोग्य मंदिरों पर ताले, कर्मचारियों की चांदी

प्रभारी की अनुपस्थिति का फायदा उठाकर सीएचसी के अंतर्गत आने वाले अधिकांश आयुष्मान आरोग्य मंदिरों और उप-स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके हुए हैं। जब रक्षक ही भक्षक बन जाए या अपनी जिम्मेदारी से मुंह मोड़ ले, तो कर्मचारियों पर लगाम कौन कसेगा? गौर सीएचसी में कर्मचारी अपनी मर्जी के मालिक हैं; कोई कमरे में आराम फरमा रहा है तो कोई ड्यूटी से नदारद है।

जिम्मेदारों की ‘कुंभकर्णी’ नींद पर बड़े सवाल

हैरानी की बात यह है कि महीनों से चल रही इस बदहाली के बावजूद जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के उच्चाधिकारी गहरी नींद में सो रहे हैं। क्या किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जा रहा है?

मीडिया का सामना करने से बच रहे जिम्मेदार:

जब इस पूरे प्रकरण पर डॉ. भास्कर यादव का पक्ष जानने के लिए उन्हें फोन किया गया, तो उन्होंने कॉल रिसीव करना उचित नहीं समझा। बार-बार फोन करने के बावजूद न तो फोन उठा और न ही कोई कॉल बैक आया। यह मौन स्वीकारोक्ति है या सत्ता और पद का अहंकार?

बस्ती मंडल में इस अव्यवस्था को लेकर जनता के बीच भारी आक्रोश है। अब देखना यह है कि विभाग के आला अफसर इस ‘लापता’ प्रभारी पर क्या कार्रवाई करते हैं या फिर गौर की जनता इसी तरह ‘राम भरोसे’ रहेगी।

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