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बस्ती स्वास्थ्य विभाग की ‘सेटिंग’ या लापरवाही? महीने भर बाद भी ओझा डायग्नोस्टिक पर मेहरबान अधिकारी!

नाम बड़े और दर्शन खोटे: ओझा डायग्नोस्टिक में डॉक्टरों के नाम का खेल, बिना हस्ताक्षर की रद्दी रिपोर्टों से मरीजों की जान खतरे में!

अजीत मिश्रा (खोजी)

💫बस्ती का ‘ओझा डायग्नोस्टिक’: मरीजों की जान से खिलवाड़ और रद्दी कागजों का कारोबार!💫

  • सैकड़ों खबरों और शिकायतों के बाद भी प्रशासन मौन, क्या ‘मलाई’ के आगे झुक गई स्वास्थ्य विभाग की ईमानदारी?
  • जांच की फाइल या ठंडे बस्ते का खेल? सीएमओ की नाक के नीचे एसीएमओ की सुस्ती ने ओझा सेंटर को दिया ‘अभयदान’!
  • कैली रोड पर खुला है ‘अवैध रिपोर्ट’ का बाजार! रसूख के आगे नतमस्तक हुए जिम्मेदार, आखिर कब होगी ओझा सेंटर पर कार्रवाई?
  • बस्ती का ‘ओझा’ तंत्र: न हस्ताक्षर, न प्रमाण… बस शिकायतों के बीच जारी है लूट का सामान!

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।

बस्ती। जनपद के जिला अस्पताल के ठीक सामने, कैली रोड पर स्थित ‘ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर’ इन दिनों भ्रष्टाचार और लापरवाही का पर्याय बन चुका है। विडंबना देखिए कि एक महीने से लगातार जिले के सम्मानित समाचार पत्रों में इस सेंटर की काली करतूतें उजागर हो रही हैं, लेकिन मजाल है कि स्वास्थ्य महकमे के कान पर जूं तक रेंग जाए। सवाल यह है कि आखिर किसके संरक्षण में यह सेंटर मरीजों को ‘अमहर और अप्रमाणित’ रिपोर्ट थमाकर उनकी जिंदगी के साथ जुआ खेल रहा है?

💫डॉक्टरों के नाम का ‘मायाजाल’, पर हस्ताक्षर गायब!

ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर के रिपोर्ट कार्डों पर बड़े-बड़े अक्षरों में कई प्रतिष्ठित डॉक्टरों के नाम दर्ज हैं। यह मरीजों को भरोसा दिलाने का एक हथकंडा है, लेकिन असलियत यह है कि उन रिपोर्टों पर संबंधित डॉक्टरों के हस्ताक्षर तक नहीं होते। बिना हस्ताक्षर की रिपोर्ट महज एक रद्दी का टुकड़ा है, जिसके आधार पर किया गया इलाज मरीज के लिए जानलेवा साबित हो सकता है। क्या यह भ्रष्टाचार की पराकाष्ठा नहीं है कि रिपोर्ट पर नाम तो ‘विशेषज्ञ’ का है, लेकिन उसे प्रमाणित करने वाला कोई नहीं?

💫सीएमओ और एसीएमओ की भूमिका पर गहराते सवाल

जनता के बीच अब यह चर्चा आम है कि सीएमओ डॉ. राजीव निगम और जांच अधिकारी एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार चौधरी की ‘मेहरबानी’ से ही ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर के हौसले बुलंद हैं।

🎯सोशल मीडिया पर मामला गरमाने के बाद सीएमओ ने खानापूर्ति के लिए जांच तो बैठाई।

🎯एसीएमओ डॉ. अशोक कुमार चौधरी को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया।

🎯लेकिन एक महीना बीत जाने के बाद भी जांच रिपोर्ट का पता नहीं है।

“यह जांच है या भ्रष्टाचार को दबाने की कोई गुप्त फाइल? आखिर क्यों एसीएमओ रिपोर्ट सौंपने में कतरा रहे हैं? क्या विभाग केवल किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?”

💫जांच के नाम पर ‘तारीख पर तारीख’, मरीजों की आफत

जांच अधिकारी की कछुआ चाल और लापरवाही ने ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर के संचालकों और वहां कार्यरत डॉक्टरों को अभयदान दे दिया है। जब कार्रवाई का डर ही खत्म हो जाए, तो मनोबल बढ़ना लाजमी है। आज भी ओझा डायग्नोस्टिक खुलेआम बिना हस्ताक्षर वाली फर्जी रिपोर्टों का वितरण कर रहा है।

💫विभागीय मिलीभगत या सिस्टम की लाचारी?

बस्ती की जनता पूछ रही है कि क्या स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारी इतने लाचार हो गए हैं कि एक डायग्नोस्टिक सेंटर पर नियमानुसार कार्रवाई नहीं कर पा रहे? या फिर ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर ने अपनी ‘पहुंच’ के दम पर पूरे सिस्टम को ही बंधक बना लिया है?

जिला अस्पताल के सामने बैठकर सरेआम नियमों की धज्जियां उड़ाने वाला यह सेंटर स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर एक बदनुमा दाग है। यदि जल्द ही इस अवैध और अप्रमाणित खेल पर लगाम नहीं लगाई गई, तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि बस्ती में स्वास्थ्य सेवाएं ‘सेवा’ नहीं, बल्कि ‘अवैध वसूली’ का अड्डा बन चुकी हैं।

बस्ती की जनता जवाब चाहती है: आखिर कब थमेगा ओझा डायग्नोस्टिक का यह ‘फर्जीवाड़ा’?

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