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भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ी स्वास्थ्य सेवाएं: गौर में ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिरों’ पर लटका ताला, साहबों की जेबें गरम!

गौर स्वास्थ्य विभाग में 'अंधेरगर्दी': आरोग्य मंदिरों पर लटके ताले, साहबों की जेब में 'सुविधा शुल्क'!

अजीत मिश्रा (खोजी)

गौर स्वास्थ्य विभाग का ‘खूनी’ खेल: आरोग्य मंदिरों को बनाया उगाही का अड्डा, मरीजों की जान से खेल रहे जिम्मेदार!

ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल (उत्तर प्रदेश)

  • मरीज बेहाल, अफसर मालामाल: गौर सीएचसी प्रभारी और बीसीपीएम की सरपरस्ती में फल-फूल रहा ‘वसूली तंत्र’!
  • योगी सरकार की मंशा पर पानी फेर रहे जिम्मेदार: इलाज के नाम पर ‘तालेबंदी’, वसूली के नाम पर ‘खुली छूट’।
  • क्या ‘कमीशन’ के बदले बिक रही है गरीबों की सेहत? गौर के आरोग्य मंदिरों की बदहाली खोल रही भ्रष्टाचार की पोल।
  • मुफ्त दवा और जांच का सपना चकनाचूर: गौर में सीएचओ नदारद, प्रभारी ने साधी चुप्पी।
  • साहब! ये आरोग्य मंदिर हैं या भ्रष्टाचार के अड्डे? बंद केंद्रों के नाम पर दवाओं की ‘बंदरबांट’ की बू।

गौर (बस्ती)।। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जहां स्वास्थ्य व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के लिए दिन-रात पसीना बहा रहे हैं, वहीं बस्ती जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गौर में बैठे कुछ ‘सफेदपोश’ अधिकारी सरकार की साख को बट्टा लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। यहाँ सरकारी आदेशों की धज्जियाँ उड़ाई जा रही हैं और ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुके हैं।सूबे की सरकार भले ही ‘अंतिम पायदान’ तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुँचाने का दम भर रही हो, लेकिन बस्ती जनपद के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) गौर के जिम्मेदार अधिकारी सरकार की मंशा पर कालिख पोतने में जुटे हैं। गौर ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले आयुष्मान आरोग्य मंदिर अब ‘आरोग्य’ देने के बजाय भ्रष्टाचार के अड्डे बन चुके हैं।

ताले में बंद स्वास्थ्य व्यवस्था: मरीज बेहाल, अधिकारी मालामाल

महादेवा (बघौड़ा), गयाजीतपुर और तेनुआ—ये तीन नाम उन केंद्रों के हैं जहाँ मीडिया की टीम ने जब दस्तक दी, तो वहां इलाज नहीं बल्कि भारी-भरकम सरकारी ताले लटकते मिले। सुबह के वक्त जब इन केंद्रों पर गरीबों का हुजूम होना चाहिए था, वहां सन्नाटा पसरा हुआ था। दूर-दराज के गांवों से तपती धूप और कठिनाइयों को पार कर पहुंचे मरीज और उनके तीमारदार गेट पर माथा पटक कर वापस लौट गए। यह केवल तालेबंदी नहीं, बल्कि गौर ब्लॉक की गरीब जनता के भरोसे का गला घोंटने जैसा है।हालिया मीडिया पड़ताल में महादेवा (बघौड़ा), गयाजीतपुर और तेनुआ आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (उप स्वास्थ्य केंद्रों) की हकीकत बेहद डरावनी मिली। इन तीनों केंद्रों पर सन्नाटा पसरा था और मुख्य द्वार पर ताला लटक रहा था। दूर-दराज से इलाज की आस लेकर आए गरीब मरीज घंटों इंतजार के बाद मायूस होकर वापस लौट गए। सवाल यह है कि जब केंद्र ही बंद रहेंगे, तो दवा और इलाज किसे मिलेगा?

भ्रष्टाचार का ‘गोरखधंधा’: सुविधा शुल्क दो और ड्यूटी से गायब रहो!

विश्वस्त सूत्रों के हवाले से जो खबर छनकर आ रही है, वह रोंगटे खड़े कर देने वाली है। चर्चा है कि सीएचसी गौर के प्रभारी डॉ० भास्कर यादव और बीसीपीएम अभिषेक कुमार ने स्वास्थ्य केंद्र को अपनी निजी जागीर बना लिया है।आरोप है कि यहाँ एक निश्चित ‘रेट लिस्ट’ तय है। जो सीएचओ (CHO) साहबों को प्रतिमाह ‘सुविधा शुल्क’ (कमीशन) पहुँचा देता है, उसे केंद्र से गायब रहने की खुली छूट मिल जाती है। बीसीपीएम और प्रभारी का मुख्य एजेंडा स्वास्थ्य सेवाएं देना नहीं, बल्कि सीएचओ से अवैध वसूली करना बन गया है। सवाल यह उठता है कि जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं, तो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था किसके भरोसे चलेगी?

सूत्रों से प्राप्त सनसनीखेज जानकारी के अनुसार, गौर सीएचसी में भ्रष्टाचार का एक संगठित सिंडिकेट चल रहा है। आरोप है कि सीएचसी प्रभारी डॉ. भास्कर यादव और बीसीपीएम अभिषेक कुमार की सरपरस्ती में सीएचओ (CHO) से प्रतिमाह मोटा ‘सुविधा शुल्क’ वसूला जाता है।

चर्चा है कि जो सीएचओ साहबों की जेब गरम कर देता है, उसे ड्यूटी से गायब रहने की ‘अघोषित छूट’ मिल जाती है। बीसीपीएम और प्रभारी का मुख्य उद्देश्य मरीजों की सेवा नहीं, बल्कि अवैध उगाही का लक्ष्य पूरा करना रह गया है।

दवाइयों और जांच किट का ‘अंधेरगर्दी’ खेल

सरकारी नियमों के अनुसार, इन आरोग्य मंदिरों में सुबह 08 से दोपहर 02 बजे तक मरीजों की निःशुल्क जांच (खून, पेशाब, शुगर, बलगम) और मुफ्त दवा वितरण होना चाहिए। लेकिन जब महीनों तक केंद्र खुलते ही नहीं, तो सरकार द्वारा भेजी जा रही दवाओं की खेप कहाँ जा रही है? क्या इन दवाओं को कागजों पर बांटकर खुले बाजार में बेचा जा रहा है? यदि शासन स्तर से इन केंद्रों के स्टॉक और उपस्थिति पंजिका की निष्पक्ष जांच (Audit) हो जाए, तो बीसीपीएम और प्रभारी के भ्रष्टाचार की परतें उधड़नी तय हैं।सरकारी नियमों के मुताबिक, इन आरोग्य मंदिरों को सुबह 08 बजे से दोपहर 02 बजे तक खुला रहना अनिवार्य है। यहां खून, पेशाब, शुगर और बलगम जैसी जांचें मुफ्त होनी चाहिए। लेकिन जब केंद्र खुलते ही नहीं, तो सरकार द्वारा भेजी जा रही लाखों की दवाइयां और मेडिकल किट आखिर जा कहां रही हैं? क्या इन दवाइयों को कागजों पर खपाकर बंदरबांट किया जा रहा है? यदि निष्पक्ष जांच हो जाए, तो गौर ब्लॉक में एक बड़ा घोटाला उजागर होना तय है।

मीडिया के सवालों से भागते ‘जिम्मेदार’

जब इस पूरी अराजकता पर पक्ष जानने के लिए संबंधित केंद्रों के सीएचओ को फोन किया गया, तो किसी ने फोन उठाना मुनासिब नहीं समझा। विडंबना देखिए, पूरे ब्लॉक की जिम्मेदारी संभालने वाले प्रभारी डॉ० भास्कर यादव ने भी मीडिया के फोन को अनसुना कर दिया। अधिकारियों की यह ‘रहस्यमयी चुप्पी’ खुद-ब-खुद चीख-चीख कर घोटाले की कहानी बयां कर रही है।जब इस घोर लापरवाही और तालेबंदी के संबंध में संबंधित सीएचओ से संपर्क करने की कोशिश की गई, तो किसी ने फोन नहीं उठाया। हद तो तब हो गई जब जिम्मेदार सीएचसी प्रभारी डॉ. भास्कर यादव ने भी मीडिया के फोन को रिसीव करना मुनासिब नहीं समझा। अधिकारियों की यह चुप्पी साफ दर्शाती है कि कहीं न कहीं दाल में काला नहीं, बल्कि पूरी दाल ही काली है।

मुख्य बिंदु जो जांच के घेरे में हैं:

  • नदारद कर्मचारी: ड्यूटी समय में केंद्रों पर ताला क्यों?
  • अवैध वसूली: क्या बीसीपीएम और प्रभारी की शह पर चल रहा है ‘सुविधा शुल्क’ का खेल?
  • दवा घोटाला: बंद केंद्रों के नाम पर जारी होने वाली सरकारी दवाइयां कहां गायब हो रही हैं?

सीधी चेतावनी: कब जागेगा प्रशासन?

सीएचओ, बीसीपीएम और प्रभारी की इस तिकड़ी ने प्रदेश सरकार की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को ठेंगे पर रख दिया है। आखिर कब तक भ्रष्टाचार की इस आग में गरीब जनता झुलसती रहेगी? क्या बस्ती के आला अधिकारी इस ‘लूटतंत्र’ का संज्ञान लेंगे या फिर फाइलें दबाकर भ्रष्टाचारियों को संरक्षण देना जारी रखेंगे?

जनता जवाब मांग रही है!

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