

🚨⚖️ “राजधानी लखनऊ में शिक्षा माफियाओं का कब्जा खेल?” लालबाग गर्ल्स स्कूल की जमीन पर अवैध स्कूल संचालन का आरोप, कई नामों पर गंभीर सवाल 🚨⚖️
लखनऊ से बड़ी और सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जहां राजधानी के प्रतिष्ठित शैक्षणिक क्षेत्र लालबाग में स्थित लालबाग गर्ल्स इंटर कॉलेज की जमीन और भवन पर अवैध कब्जे और फर्जी तरीके से स्कूल संचालन के गंभीर आरोप लगे हैं। जानकारी के अनुसार, यहां “ईसाबेला थार्रबन पब्लिक स्कूल” के नाम से एक अवैध विद्यालय संचालित किया जा रहा है, जिसे लेकर शिक्षा विभाग और प्रशासनिक तंत्र की भूमिका पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के मुताबिक, विज्ञान भवन पर कब्जा कर यह स्कूल चलाया जा रहा है और आरोप है कि इसके पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय है। इस गिरोह में ललित श्रीवास्तव, निशा श्रीवास्तव, यशस्वी ललित, शिखर श्रीवास्तव, अजय रिसाल सिंह, अक्षय रिसाल सिंह, बलजीत कौर, अमनदीप नारंग, निधी स्मिथ और सावन औसटीन स्मिथ जैसे नाम शामिल बताए जा रहे हैं। आरोप यह भी है कि इन लोगों ने फर्जी सोसाइटी बनाकर शिक्षा संस्थान का संचालन शुरू किया है और इस पूरे खेल में शिक्षा विभाग के कुछ अधिकारियों की कथित मिलीभगत भी सामने आ रही है।
यह मामला इसलिए और गंभीर हो जाता है क्योंकि बताया जा रहा है कि यही गिरोह पहले भी इसी तरह के कब्जे और अवैध संचालन में शामिल रहा है। पूर्व में सेंटिनियल इंटर कॉलेज पर भी कब्जा कर वहां “मेथोडिस्ट चर्च स्कूल” चलाने का मामला सामने आया था। उस समय बिशप सुबोध सी मण्डल की शिकायत के बाद मामला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचा था, जिसके बाद तत्कालीन जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार ने कार्रवाई करते हुए उस संस्थान को कब्जामुक्त कराया था।
अब एक बार फिर उसी तरह के आरोप सामने आने से पूरे प्रकरण ने तूल पकड़ लिया है। ईसाई समाज और स्थानीय लोगों में इसको लेकर भारी रोष देखा जा रहा है। समाज के लोगों का कहना है कि क्रिश्चियन सोसाइटी की जमीनों और शैक्षणिक संस्थानों पर संगठित तरीके से कब्जा करने की साजिश रची जा रही है, जिससे न केवल शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है बल्कि धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियां भी खतरे में पड़ रही हैं।
मामले में यह भी मांग उठ रही है कि इस पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और आरोपियों के खिलाफ सख्त धाराओं में मुकदमा दर्ज कर उन्हें जेल भेजा जाए। साथ ही यह भी अपील की जा रही है कि प्रदेश सरकार और संबंधित धार्मिक संस्थाएं मिलकर ऐसे सभी कब्जों को हटाएं और मूल संस्थाओं को उनकी संपत्ति वापस दिलाई जाए।
फिलहाल यह मामला राजधानी में शिक्षा और संपत्ति विवाद का एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल एक आपराधिक मामला होगा बल्कि प्रशासनिक व्यवस्था पर भी बड़ा सवाल खड़ा करेगा।
👉 बड़ा सवाल: क्या राजधानी में शिक्षा माफियाओं का यह नेटवर्क और गहराता जा रहा है? और क्या प्रशासन इस बार भी सख्त कार्रवाई करेगा?
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✍ रिपोर्ट: एलिक सिंह
ब्यूरो प्रमुख – हलचल इंडिया न्यूज़, सहारनपुर
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🖋 संपादक – वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़









