
अजीत मिश्रा (खोजी)
🛑बस्ती में ‘गैस माफिया’ का नंगा नाच: शांति गैस एजेंसी हर्रैया बनी लूट का अड्डा, ₹200 में बिक रहा सिस्टम!🛑
- KYC के नाम पर ‘अवैध वसूली’ का खेल, शांति गैस एजेंसी पर उपभोक्ताओं का हो रहा खुला शोषण।
- सिस्टम फेल या सेटिंग? होटल-ढाबों को ‘बैक-डोर’ सप्लाई, आम जनता लाइन में बेहाल।
- प्रशासन की कुम्भकर्णी नींद: हर्रैया में गैस सिंडिकेट सक्रिय, आखिर कब होगी कार्रवाई?
09 अप्रैल 2026, बस्ती (उत्तर प्रदेश)
ब्यूरो रिपोर्ट: बस्ती मंडल
बस्ती/हर्रैया।। कहने को तो प्रशासन जीरो टॉलरेंस की बात करता है, लेकिन बस्ती जनपद के हर्रैया स्थित शांति गैस एजेंसी की हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। यहाँ गैस सिलेंडर की डिलीवरी नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के हक की ‘डकैती’ हो रही है। एजेंसी पर सरेआम ‘सुविधा शुल्क’ का खेल चल रहा है, जहाँ ₹200 की अतिरिक्त रिश्वत फेंकने पर बिना लाइन लगे पर्ची काट दी जाती है, जबकि गरीब और ईमानदार उपभोक्ता घंटों लाइन में लगकर अपनी बारी का इंतजार करता रह जाता है।
KYC का जाल और कालाबाजारी की रफ़्तार
एजेंसी ने आम जनता को KYC और बीमा के नाम पर उलझा रखा है। सूत्रों की मानें तो केवाईसी और बीमा के नाम पर उपभोक्ताओं से ₹234 की अवैध उगाही की जा रही है। हद तो तब हो गई जब नई पासबुक बनाने के नाम पर भी ₹100 की खुली वसूली की बात सामने आ रही है। आखिर किसके इशारे पर एजेंसी स्टाफ और बिचौलिए मिलकर जनता की जेब पर डाका डाल रहे हैं?
पीछे के दरवाजे से ‘सप्लाई’, ढाबों तक पहुँच रही रसोई गैस
एक तरफ आम जनता सिलेंडर के लिए दर-दर भटक रही है, वहीं दूसरी तरफ गैस माफिया और बिचौलियों का सिंडिकेट सक्रिय है। एजेंसी के पिछले दरवाजे से घरेलू सिलेंडरों की खेप सीधे होटलों और ढाबों तक पहुँच रही है। यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि एक संगठित ‘गैस सिलेंडर रैकेट’ है जो प्रशासन की नाक के नीचे फल-फूल रहा है।
प्रशासन की ‘कुम्भकर्णी’ निद्रा और उठते सवाल
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल क्षेत्रीय जिम्मेदार अधिकारियों पर खड़ा होता है। क्या अधिकारियों को इस लूट की भनक नहीं है? या फिर ‘सेटिंग’ के खेल में भ्रष्टाचार की मलाई ऊपर तक पहुँच रही है?
- क्या प्रशासन की नींद तब टूटेगी जब जनता सड़कों पर उतरेगी?
- आखिर कब तक शांति गैस एजेंसी के स्टाफ की बदौलत बिचौलिए मालामाल होते रहेंगे?
- जिम्मेदार अधिकारी इस खुलेआम हो रहे उत्पीड़न पर मौन क्यों साधे हुए हैं?
हर्रैया की जनता अब सवाल कर रही है कि उन्हें इस ‘गैस सिंडिकेट’ से मुक्ति कब मिलेगी? क्या उच्चाधिकारी इस एजेंसी की जांच कर इसके लाइसेंस को निरस्त करने और दोषियों को जेल भेजने की हिम्मत दिखाएंगे, या फिर कागजी खानापूर्ति कर मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा?
ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल, वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़





















