
अजीत मिश्रा (खोजी)
🎯सिद्धार्थनगर में ‘सिस्टम’ के लापरवाहों पर गिरी गाज: जिलाधिकारी का कड़ा हंटर, CDPO मंजूलता गौतम को थमाई प्रतिकूल प्रविष्टि!🎯
- सरकारी योजना को बनाया मजाक: 1885 का था लक्ष्य, मैडम ने कराया सिर्फ 223 रजिस्ट्रेशन!
- साहब… अब काम करना पड़ेगा! सिद्धार्थनगर डीएम ने लापरवाह CDPOs की उतारी हेकड़ी।
- भ्रष्टाचार और हीलाहवाली पर बड़ा प्रहार: एक साथ 4 अधिकारियों पर गिरी गाज, हिला महकमा।
- मातृ वंदना योजना में ‘शून्य’ परफॉर्मेंस, सीडीपीओ मंजूलता की खुली पोल, अब चार्जशीट की तैयारी!
- चेतावनी के बाद भी नहीं सुधरी चाल, तो जिलाधिकारी ने थमा दिया ‘सजा का परवाना’।
09 अप्रैल 26, बस्ती मंडल, उत्तर प्रदेश।
सिद्धार्थनगर। सरकारी कुर्सी पर बैठकर ‘मलाई’ काटने और जनहित की योजनाओं को ठंडे बस्ते में डालने वाले अधिकारियों के बुरे दिन शुरू हो गए हैं। जनपद सिद्धार्थनगर में भ्रष्टाचार, हीलाहवाली और घोर लापरवाही के खिलाफ जिलाधिकारी शिवशरणप्पा जी.एन. ने अपना रौद्र रूप दिखाया है। ताज़ा मामले में इटवा की बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) मंजूलता गौतम को उनके निकम्मेपन और शासकीय कार्यों में शून्य रुचि के चलते आधिकारिक तौर पर प्रतिकूल प्रविष्टि (Adverse Entry) जारी कर दी गई है।
हड़कंप: एक साथ चार CDPO निशाने पर!
सूत्रों की मानें तो जिले में एक साथ चार-चार CDPO के खिलाफ कार्रवाई की तलवार लटकने से विभाग में हड़कंप मच गया है। जो अधिकारी अब तक ‘साहब’ बनकर फाइलों को दबाए बैठे थे, अब उनकी सिट्टी-पिट्टी गुम है।
क्यों हुई कार्रवाई? आंकड़ों ने खोली पोल
जारी किए गए पत्र के अनुसार, मंजूलता गौतम की लापरवाही का आलम यह है कि प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (PMMVY) जैसे संवेदनशील और शीर्ष प्राथमिकता वाले कार्यक्रम को उन्होंने मजाक बना दिया था।
लक्ष्य बनाम हकीकत: इटवा परियोजना में 1885 लाभार्थियों के पंजीकरण का लक्ष्य था, जिसके सापेक्ष मात्र 223 पंजीकरण (केवल 11.83%) ही पाए गए।
⭐चेतावनी को किया दरकिनार: डीएम और मुख्य विकास अधिकारी द्वारा बार-बार ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी करने और प्रतिदिन 50 लाभार्थियों के पंजीकरण के निर्देश देने के बावजूद, मैडम की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ा।
⭐अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा: विभाग का कहना है कि यह न केवल कार्य में शिथिलता है, बल्कि उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और घोर अनुशासनहीनता है।
🛑”शासकीय कार्यों में अरुचि और निर्देशों की अवहेलना बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो अधिकारी जनता की सेवा के बजाय लापरवाही को अपना हथियार बनाएंगे, उनके खिलाफ इसी तरह की कठोर दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।”🛑
⭐तीन दिन का अल्टीमेटम: अब चार्जशीट की बारी!
जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए जिला कार्यक्रम अधिकारी को निर्देश दिया है कि यदि तीन दिनों के भीतर अपेक्षित प्रगति नहीं दिखी, तो विभागीय कार्यवाही हेतु आरोप पत्र (Charge Sheet) तैयार कर प्रस्तुत किया जाए।
इस कार्रवाई ने उन अधिकारियों को सीधा संदेश दे दिया है जो जनता के हक की योजनाओं में ‘भ्रष्टाचार और हीलाहवाली’ का घुन लगा रहे हैं। अब देखना यह है कि इस हंटर के बाद सिद्धार्थनगर के दफ्तरों में फाइलें दौड़ती हैं या फिर लापरवाही का यह खेल यूं ही जारी रहता है।
ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल।





















