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महिला एवं वाल विकास निगम गया के तत्वाधान मे प्रज्ञा शक्ति के तहत जिला पदाधिकारी गया की अध्यक्षता मे एक दिवसीय कार्यशाला एक निजी होटल मे की गईं l

गया, 12 मार्च 2026, महिला एवं बाल विकास निगम गया के तत्वाधान मे प्रज्ञा शक्ति के तहत ज़िला पदाधिकारी गया श्री शशांक शुभंकर की अध्यक्षता में आज 1 दिवसीय कार्यशाला एक निजी होटल में आयोजित की गई। कार्यशाला का शुभारंभ जिला पदाधिकारी, सहायक समाहर्ता, सिविल सर्जन, डीपीओ आइसीडीएस सहित अन्य पदाधिकारियों द्वारा द्वीप प्रज्वलित कर किया गया। यह प्रोग्राम गया जिले में मॉडल के रूप में चालू किया गया है।
प्रज्ञा शक्ति प्रोग्राम चलने का मुख्य उद्देश्य यह है कि विभिन्न आयु वर्ग के बच्चे से आप सभी विभागीय पदाधिकारी यथा बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, विभिन्न विद्यालयों के शिक्षक गण, श्रम विभाग के पदाधिकारी गण, चाइल्ड प्रोटेक्शन पदाधिकारी सहित तमाम पदाधिकारी विभिन्न आयु वर्ग के बच्चों से प्रतिदिन इंटरेक्ट होते हैं, सभी बच्चे अलग-अलग हैं, सभी का बिहेवियर अलग-अलग है, सभी बच्चे विकास के एक लेवल पर नहीं है, उनको थोड़ा और सहायता प्रधान करने से वह काफी आगे जाएंगे उन बच्चों को चिन्हित करना पहली प्राथमिकता है।
उन्होंने सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी को कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र में काफी छोटे बच्चे आते हैं उन केंद्रों पर भी बच्चों को ध्यान से देखा जाए तो बच्चे और अधिक विकसित हो सकते हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों को एक्स्ट्रा केयर किया जाए।
माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्कूल एवं विद्यालय स्तर के बच्चे के विकास के संबंध में कहा कि विद्यालय एवं महाविद्यालय में शिक्षकों द्वारा पढ़ने पर सभी बच्चे समान रूप से नहीं समझ पाते हैं, नहीं पढ़ पाते हैं, वह बच्चे पीछे छूट जाते हैं, उन बच्चों पर थोड़ी और ध्यान देने से वह बच्चे भी आगे जा सकेंगे, अच्छे से पढ़ सकेंगे। उन बच्चों को चिन्हित कर उन्हें विशेष सहायता उपलब्ध कराते हुए उसे अच्छी तरह से विकास की गति से जोड़ा जाए। ताकि उनके जीवन में बदलाव लाया जा सके।
श्रम विभाग के पदाधिकारी को निर्देश दिया गया कि काफी सारे बच्चे ईट भट्टे, फैक्ट्री में काम करते हैं वह बच्चे सही से पढ़ नहीं पाते हैं, उनक्त विकास नही हो पाता है, वह विकास की धारा से दूर हो जाते हैं, वैसे सभी बच्चो को चिन्हित करें।
इसी संबंध में आज सभी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, विद्यालय के शिक्षक जो मास्टर ट्रेनर के रूप में नामित हैं, उनके साथ एक कार्यशाला आयोजित करते हुए आदित्य बिरला फाऊंडेशन के रिसोर्स पर्सन जो मध्य प्रदेश से आए निखिल मिश्रा, मुंबई से आए मीका चौहान सहित अन्य दूसरे राज्यों से आए हुए रिसोर्स पर्सन द्वारा गया जिले के विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मियों जिन्हें प्रज्ञा शक्ति प्रोग्राम के लिए मास्टर ट्रेनर बनाया गया है, उन सभी को विस्तार से बच्चों को और बेहतर तरीके से मानसिक विकास बेहतर बनाने की दिशा में ट्रेनिंग दी गई।

जिला पदाधिकारी ने अपने संबोधन में कहा कि आप सभी विभागों के पदाधिकारियों के साथ पूर्व में दो बार ओरिएंटेशन हुआ है। जिसका सकारात्मक परिणाम है कि जिले में 4000 से अधिक बच्चों को चिन्हित करने का काम किया गया है। उन्होंने कहा कि ज़िले में कई सारे संस्थान छोटे छोटे इनिशिएटिव कर रहे थे, अपने लेवल पर, लेकिन एक उसको समेकित करके एक इंटिग्रेटेड एफर्ट करने की आवश्यकता महसूस की गई ताकि पूरे जिले में एक पहचान किया जा सके कि कितने ऐसे बच्चे हैं जिनको इंटरवेन्शन की आवश्यकता है, मदद की आवश्यकता है। इस प्रज्ञाशक्ति प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य यह है कि हम ऐसे बच्चों को चिन्हित कर रहे हैं जिनको सहायता देने पर वो और अच्छा अपनी ज़िन्दगी में कर पाएं। जिनको विशेष सहायता दे कर के उनको और अच्छा जिंदगी में कराया जा सके, जिसे आप सभी ने भी इस बात को समझा। विभिन्न विद्यालयों में शिक्षकों के द्वारा बहुत कम समय में 4000 से ज्यादा ऐसे बच्चों को चिन्हित कर लिया गया है, उन चिन्हित बच्चो को अगर मदद करें तो वो जिंदगी में और अच्छा कर सकते हैं। प्रज्ञा शक्ति प्रोग्राम के अंतर्गत अबतक हमारे पास 4000 से ज्यादा बच्चों का लिस्ट है और उनको किस तरह की उनमें इश्यूस देखे गए। जैसे किन्ही में चिड़चिड़ापन है, कुछ बच्चे सोसाइटी में अड्जॅस्ट नहीं कर पा रहे हैं, इन सभी बच्चो के सिम्पटम्स के साथ उन वैसे बच्चों को चिन्हित किया गया है।
जिला स्तर पर जो कुछ संस्थान चिन्हित है वहाँ बुलाकर भी उनको हेल्प कर सकते हैं। तो इसीलिए ट्रेनिंग आप लोग अच्छे से लीजिए। मैंने पहले भी कहा था कि बहुत महत्वपूर्ण एक्सर्साइज़ है और इसको करने से बच्चो के विकास में बहुत बड़ा बदलाव आएगा। जिले में जो बच्चे हैं जो थोड़ा अपने आप को पिछड़ा हुआ महसूस कर रहे हैं या कटा हुआ महसूस कर रहे है या फिर जो आंगनबाड़ी केदो में बच्चे आते है वो तो बिलकुल छोटे बच्चे है तो वो भविष्य में उनको दिक्कत नहीं है। अगर अभी से उन बच्चों को थोड़ा अधिक ध्यान देने से उनका भविष्य बहुत संवर सकता है।
उन्होंने कहा कि यह समेकित प्रयास भारत में पहली बार हो रहा है। पूर्व में छोटे छोटे प्रयास हुए हैं लेकिन समेकित करके पूरे जिले में अभियान चला करके पहली बार हो रहा है।
उन्होंने विभिन्न दूसरे राज्यों से आए सभी रिसोर्स पर्सन्स को धन्यवाद दिया है और कहा कि अच्छे से ट्रेनिंग सभी को दे।
कार्यशाला में सहायक समाहर्ता, सिविल सर्जन, डीपीओ आइसीडीएस, ज़िला जन सम्पर्क पदाधिकारी, यूनिसेफ के वरीय पदाधिकारी श्रीमती गार्गी जी, डीपीएम स्वास्थ्य, डीपीएम बाल विकास निगम, सहायक निदेशक बाल संरक्षण सहित सभी बल विकास परियोजना पदाधिकारी विभिन्न विद्यालयों के शिक्षकगण उपस्थित थे।

त्रिलोकी नाथ डिस्ट्रिक्ट रिपोर्टर गयाजी बिहार

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