बस्ती पुलिस: क्या यहाँ वर्दी के आदेश से बड़ी ‘रसूख’ की ताकत है?

अजीत मिश्रा(खोजी)
बस्ती पुलिस महकमे में ‘अदृश्य सत्ता’ का खेल: डीआईजी के आदेशों को धता बता डटे हैं निरीक्षक!
- बस्ती का अनोखा पुलिस महकमा: जहाँ तबादले तो होते हैं, पर रवानगी नहीं!
- ‘हुक्म’ की बेअदबी: डीआईजी के आदेश को दरकिनार कर थानों में ‘राज’ कर रहे अफसर।
- बस्ती पुलिस का ‘चेयर लॉक’ खेल: आदेश आते हैं, पर कुर्सी हिलती नहीं!
- बस्ती में प्रशासनिक फेरबदल बेअसर, आदेश के बाद भी रवानगी से कतरा रहे अधिकारी।
- स्थानांतरण सूची जारी होने के बावजूद कार्यमुक्त नहीं हो रहे दरोगा, सवालों के घेरे में विभागीय अनुशासन?
- जोनल बोर्ड के आदेश की अनदेखी: बस्ती में स्थानांतरण के बाद भी अपनी जगह पर डटे हैं 22 निरीक्षक.??
बस्ती: क्या बस्ती पुलिस महकमे पर रेंज के डीआईजी का नियंत्रण महज कागजी रह गया है? यह सवाल आज इसलिए उठ रहा है क्योंकि एडीजी (जोन) गोरखपुर के सख्त आदेशों के बावजूद बस्ती के थानों में जमे कई निरीक्षक और उप-निरीक्षक कुर्सी छोड़ने को तैयार नहीं हैं। जोनल पुलिस स्थापना बोर्ड के आदेशों का मजाक उड़ना विभाग के भीतर अनुशासन की पोल खोल रहा है।

आदेश हुआ, पर अमल नदारद
हाल ही में गोरखपुर जोन में बड़े पैमाने पर प्रशासनिक फेरबदल हुआ, जिसमें 57 निरीक्षकों/उप-निरीक्षकों के तबादले किए गए। इस सूची में बस्ती जिले के 22 अधिकारियों के नाम शामिल थे। नियमतः, स्थानांतरण आदेश जारी होते ही अधिकारियों को कार्यमुक्त (Relieve) किया जाना चाहिए था, लेकिन ‘सूत्रों’ की मानें तो कई अधिकारी अभी भी अपने पुराने थानों की कुर्सी थामे बैठे हैं।
’साहब’ का आदेश या रसूख की ताकत?
एडीजी के कड़े निर्देशों के बाद भी स्थानांतरण आदेशों का पालन न होना पुलिस महकमे की कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। सवाल यह है कि आखिर वे कौन सी ताकतें हैं जो नियमों के ऊपर हावी हैं?
स्थानांतरण सूची में अनिल कुमार यादव, नीरज शाही, संजय सिंह, राम प्रसाद यादव, विकास यादव, राजेश यादव, जनार्दन यादव, श्रीराम, एस.पी. सिंह, अजय सिंह, रणजय सिंह, शैलेन्द्र शुक्ल, सुभाष चन्द्र सिंह, रोहित उपाध्याय, अनुपम त्यागी, बृजमोहन सिंह, शोभा यादव, जय प्रकाश तिवारी, जयशंकर पाण्डेय समेत अन्य अधिकारी शामिल हैं।
महकमे में खलबली, अनुशासन पर संकट
इस ‘अटूट’ पकड़ को लेकर निचले स्तर के पुलिसकर्मियों में भी भारी आक्रोश और चर्चा है। जो अधिकारी ईमानदारी से नियमों का पालन करते हुए रवानगी ले रहे हैं, वे इस दोहरे मापदंड को देख हतप्रभ हैं। यदि उच्चाधिकारियों के आदेशों का पालन इस तरह टालमटोल के साथ होगा, तो जनता के बीच कानून-व्यवस्था का क्या संदेश जाएगा?
अब आगे क्या?
एडीजी गोरखपुर जोन ने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि स्थानांतरित पुलिसकर्मियों को तत्काल कार्यमुक्त किया जाए। इसके बावजूद ‘चेयर लॉक’ करके बैठे अधिकारियों पर कार्रवाई न होना, जिले के उच्च पुलिस अधिकारियों की कार्यकुशलता को कठघरे में खड़ा करता है।
क्या डीआईजी कार्यालय अब अपनी साख बचाने के लिए इन ‘अड़ियल’ अधिकारियों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई करेगा, या फिर यह तबादला सूची भी महज औपचारिकता बनकर दफ्तर की फाइलों में दफन हो जाएगी?
बस्ती की जनता और पुलिस विभाग को अब इन सवालों के जवाब का इंतजार है।
यह लेख प्रशासनिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी और वर्तमान में पुलिस महकमे में व्याप्त स्थिति के आधार पर लिखा गया है।
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