बस्ती में ‘स्पा’ की आड़ में गंदा खेल: चौकी से चंद कदम की दूरी पर चल रहा था देह व्यापार, 16 गिरफ्तार।

अजीत मिश्रा (खोजी)
‘सुख’ की आड़ में ‘अनैतिकता’ का बाजार: क्या बस्ती पुलिस की नाक के नीचे पनप रही थी यह काली दुनिया?
- चौकी के पास ही चल रहा था देह व्यापार, क्या सो रही थी स्थानीय पुलिस?
- बस्ती में क्या स्पा सेंटर बन गए हैं अवैध धंधों का अड्डा? 16 लोग गिरफ्तार।
बस्ती। शहर के बीचों-बीच, दक्षिण दरवाजा पुलिस चौकी से चंद कदम की दूरी पर एक स्पा सेंटर ‘किंग स्पा’ नाम से संचालित हो रहा था। बाहर से देखने पर यह आधुनिक सुख-सुविधाओं और आराम का केंद्र लग रहा था, लेकिन जब पुरानी बस्ती थाना पुलिस ने यहां दबिश दी, तो जो सच सामने आया, वह शहर के सभ्य समाज के मुंह पर एक तमाचा है। एक ऐसा धंधा, जो बंद कमरों में देह व्यापार की गंदी गलियों की ओर इशारा कर रहा था।
सवाल: चौकी की नाक के नीचे यह ‘खेल’ कैसे?
सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि स्पा सेंटर में क्या हो रहा था, बल्कि यह है कि दक्षिण दरवाजा पुलिस चौकी से चंद कदमों की दूरी पर यह सब कैसे फलता-फूलता रहा? क्या स्थानीय पुलिस को इसकी भनक नहीं थी? या फिर ‘सुविधा शुल्क’ के पर्दे ने कानून की आंखों पर पट्टी बांध रखी थी? अगर यह धंधा इतने लंबे समय से वहां चल रहा था, तो पुलिस की खुफिया तंत्र (Local Intelligence) क्या कर रही थी?
नैतिकता का पतन और प्रशासन की चुप्पी
आज के दौर में स्पा और वेलनेस सेंटर्स के नाम पर जिस तरह से शहरों में ‘अवैध अड्डों’ की बाढ़ आई है, वह चिंताजनक है। ये केंद्र अक्सर युवाओं को आकर्षित करते हैं, लेकिन इनकी आड़ में पनप रहा यह अनैतिक व्यापार समाज की नींव को खोखला कर रहा है। पकड़े गए 16 लोगों (5 महिलाएं और 11 युवक) का आंकड़ा यह बताता है कि इस जाल की जड़ें कितनी गहरी हैं।
क्या महज ‘छापेमारी’ काफी है?
सीओ सिटी सत्येंद्र भूषण तिवारी ने कार्रवाई की पुष्टि की है और जांच का आश्वासन दिया है। लेकिन बस्तियां वासियों को सिर्फ खानापूर्ति नहीं, बल्कि ठोस कार्रवाई चाहिए।
- दोषियों पर कठोर प्रहार: केवल हिरासत में लेना काफी नहीं है, इन संचालकों के खिलाफ ‘अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम’ के तहत ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जो भविष्य के लिए मिसाल बने।
- भवन मालिकों की जवाबदेही: जिस भवन में यह धंधा चल रहा था, क्या उसके मालिक की जिम्मेदारी तय नहीं होनी चाहिए?
- व्यापक जांच: यह सिर्फ एक स्पा की बात नहीं है, शहर में चल रहे अन्य ऐसे केंद्रों की भी तुरंत सघन जांच होनी चाहिए ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि बस्ती ‘अनैतिकता का गढ़’ न बने।
निष्कर्ष
पुलिस ने भंडाफोड़ करके अपना कर्तव्य तो निभाया है, लेकिन अब जिम्मेदारी प्रशासन और समाज की है कि वे ऐसे ‘काले अड्डों’ को पनपने ही न दें। यह घटना चेतावनी है कि हम अपने शहर को किस दिशा में ले जा रहे हैं। यदि पुलिस की चौकी के पास ही ‘अपराध का गलियारा’ सुरक्षित रहेगा, तो फिर आम नागरिक खुद को सुरक्षित कैसे समझेगा?
प्रशासन को अब जवाब देना होगा—यह खेल कब से जारी था और इसके पीछे कौन-कौन से चेहरे बेनकाब होंगे?
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