खाकी और कानून को चुनौती: ‘हाजी’ के रसूख के आगे क्या बेबस है बस्ती पुलिस?

अजीत मिश्रा (खोजी)
‘हाजी’ का रसूख या कानून का मज़ाक: पॉक्सो एक्ट के आरोपियों पर कोर्ट सख्त, लेकिन पुलिस ‘मेहरबान’
- पॉक्सो केस में घिरे मैनेजर का परिवार: अदालत ने ठुकराई अग्रिम जमानत, क्या अब भी पुलिस करेगी ‘समझौते’ का इंतज़ार?
- हाजी मुनीर के परिवार पर संकट: दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट में फंसे आरोपी, पुलिस की चुप्पी पर उठे गंभीर सवाल!
- क्या थाना बिक चुका है? हाजी के रसूख तले दबी इंसाफ की मांग, कोर्ट ने खारिज की जमानत, पुलिस ने साधी चुप्पी!
बस्ती। कप्तानगंज स्थित दारुल उलूम सुन्नत फैजुनबी के मैनेजर ‘हाजी’ मुनीर अली के परिवार पर लगे संगीन आरोपों और पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामले में घिरे उनके परिजनों की अग्रिम जमानत अदालत द्वारा खारिज कर दिए जाने के बाद क्षेत्र में हड़कंप मच गया है। कानून की नज़र में ‘हाजी’ का परिवार अब कटघरे में है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि पुलिस आखिर किस ‘दबाव’ के चलते अब तक इन आरोपियों को सलाखों के पीछे नहीं डाल पाई है?क्या कानून सिर्फ आम आदमी के लिए है? यह सवाल बस्ती के कप्तानगंज स्थित दारुल उलूम सुन्नत फैजुनबी के मैनेजर हाजी मुनीर अली के रसूख को देखकर हर किसी के जेहन में उठ रहा है। एक तरफ पॉक्सो एक्ट जैसे गंभीर मामले में हाजी के बेटे, पोते और दामाद पर शिकंजा कस रहा है, तो दूसरी तरफ पुलिस की कार्यशैली पर सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं।
जमानत खारिज, फिर भी गिरफ्तारी क्यों नहीं?
अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत ने हाजी मुनीर के पोते आसिफ (पुत्र मो. अहमद), सदस्य अनवर (पुत्र हाजी मुनीर अली) और दामाद साजिद की अग्रिम जमानत याचिका को एक सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यह मामला जमानत देने योग्य नहीं है। बावजूद इसके, घटना के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक एक भी आरोपी को गिरफ्तार करने की जहमत नहीं उठाई है।
क्या है पूरा मामला?
घटना 28 अप्रैल 2026 की रात की है, जब हाजी मुनीर अली का पोता आसिफ (पुत्र मो. अहमद) पीड़िता के घर में घुस गया। आरोप है कि उसने पीड़िता का गला दबाया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर उसका वीडियो भी बनाया। हद तो तब हो गई जब पीड़िता ने चिल्लाना शुरू किया, तो आरोपी ने खुद को बाथरूम में बंद कर लिया, जिसके बाद ग्रामीणों ने उसे बाहर निकालकर पुलिस (112) के हवाले किया।अदालत में दिए गए बयानों के मुताबिक, हाजी का पोता आसिफ रात के अंधेरे में पीड़िता के घर में घुस गया, उसका गला दबाया, उसके साथ दुष्कर्म किया और फिर उसका वीडियो भी बनाया। यह वही परिवार है जो पहले भी पाँच दामादों को नौकरी देने के आरोपों में घिर चुका है और छठे दामाद के मामले में एक टीचर को अनैतिक रूप से बर्खास्त करने का विवाद झेल रहा है।
कोर्ट की फटकार और कानून की धज्जियाँ
अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत ने हाजी मुनीर के पोते आसिफ (पुत्र मो. अहमद), सदस्य अनवर (पुत्र हाजी मुनीर अली) और दामाद साजिद की अग्रिम जमानत याचिका को एक सिरे से खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट कर दिया कि यह मामला जमानत देने योग्य नहीं है। बावजूद इसके, घटना के एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी पुलिस ने अब तक एक भी आरोपी को गिरफ्तार करने की जहमत नहीं उठाई है।इस मामले में हाजी मुनीर के पोते आसिफ, मदरसे के सदस्य अनवर (पुत्र हाजी मुनीर अली) और मदरसे के शिक्षक व हाजी के दामाद साजिद के खिलाफ पॉक्सो एक्ट में मुकदमा दर्ज है।
- अपर सत्र न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) की अदालत ने दोनों पक्षों की लंबी बहस के बाद इन सभी की अग्रिम जमानत याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि प्रार्थना पत्र पोषणीय ही नहीं है।
- अदालत का मानना है कि यदि ऐसे मामलों में जमानत मिलती रही, तो अपराधियों में डर खत्म हो जाएगा।
- मुकदमा दर्ज हुए एक महीने से अधिक का समय बीत चुका है, पीड़िता का मेडिकल और कोर्ट में बयान भी दर्ज हो चुका है, फिर भी पुलिस ने अब तक एक भी आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया है।
हाजी के रसूख का साया और पीड़ित परिवार का दर्द
पीड़िता की माँ का सीधा आरोप है कि ‘हाजी’ मुनीर अली ने मानो पूरी पुलिस व्यवस्था को ही खरीद लिया है।
- एफआईआर दर्ज कराने के समय भी उन पर समझौते के लिए भारी दबाव बनाया गया था।
- पुलिस एफआईआर तो दर्ज कर लेती है, लेकिन हाजी के दबाव में आकर आरोपियों पर हाथ डालने से कतराती है।
- आरोपी खुलेआम घूमकर पीड़िता के परिवार को मुकदमा वापस लेने की धमकी दे रहे हैं, लेकिन प्रशासन मौन है।
हाजी का ‘विवादित’ ट्रैक रिकॉर्ड
यह पहला मौका नहीं है जब हाजी मुनीर अली और उनका परिवार चर्चाओं में है। इससे पहले भी वे पाँच दामादों को नौकरी देने के मामले में विवादों में रहे हैं। छठे दामाद को नौकरी देने के लिए एक शिक्षक गुलाम मुस्तफा को अनैतिक रूप से बर्खास्त करने का मामला पहले से ही उच्च न्यायालय में विचाराधीन है। जिस मदरसे के ये मैनेजर हैं, वहाँ के बच्चे हाल ही में भीख मांगते हुए भी पकड़े गए हैं, जो इनके प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े करता है।पीड़िता की माँ का आरोप है कि हाजी मुनीर अली ने मानो पूरे थाने को ही खरीद लिया है। जब पीड़िता की माँ एफआईआर दर्ज कराने गई, तो उन पर समझौता करने का दबाव बनाया गया। पुलिस की सुस्ती का फायदा उठाकर आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़िता के परिवार को मुकदमा वापस लेने की धमकी दे रहे हैं।
क्या हाजी साहब का रसूख इतना बड़ा हो गया है कि अब अपराधी बेखौफ होकर घूम रहे हैं? या फिर पुलिस को अभी भी ‘ऊपर’ से आदेश का इंतजार है? सवाल यह भी है कि जिस मदरसे के बच्चे हाल ही में भीख मांगते पकड़े गए, क्या अब उसी के मैनेजर के परिवार पर भी कानून का डंडा चलेगा या यह मामला भी रसूख की भेंट चढ़ जाएगा?
अब देखना यह है कि न्यायालय द्वारा जमानत खारिज होने के बाद क्या बस्ती पुलिस अपनी कुंभकर्णी नींद से जागेगी और आरोपियों को गिरफ्तार करेगी, या रसूख के आगे कानून के हाथ हमेशा की तरह बंधे रहेंगे?
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