यूपी बिजली विभाग में ‘हाई-वोल्टेज’ घमासान: ऊर्जा मंत्री के कड़े पत्र से मची प्रशासनिक हलचल

अजीत मिश्रा (खोजी)
यूपी बिजली विभाग में ‘हाई-वोल्टेज’ घमासान: मंत्री अरविंद शर्मा ने चेयरमैन को भेजा तीखा पत्र, मची हलचल
- बिजली संकट के बीच आमने-सामने मंत्री और चेयरमैन: ‘शासन की मंशा के विपरीत’ कामकाज पर सख्त रुख
- सहारनपुर का मामला बना विवाद की वजह, कुशल कर्मियों की छंटनी पर ऊर्जा मंत्री ने माँगा जवाब
लखनऊ: उत्तर प्रदेश का बिजली विभाग इन दिनों केवल अपनी कार्यप्रणाली के कारण ही नहीं, बल्कि शीर्ष स्तर पर मची खींचतान के कारण सुर्खियों में है। राज्य के ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा और यूपीपीसीएल (UPPCL) चेयरमैन के बीच की तल्ख़ी अब खुलकर सार्वजनिक हो गई है, जिससे प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है।
क्या है विवाद की जड़?
विवाद तब और गहरा गया जब ऊर्जा मंत्री द्वारा लिखा गया एक कड़ा पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। मंत्री ने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। पत्र में मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदुओं पर असंतोष व्यक्त किया गया है:
कुशल कर्मियों की छंटनी और नियुक्तियाँ: पत्र के अनुसार, मंत्री ने पूर्व में लिखे गए अपने पत्रों का हवाला देते हुए कुशल कर्मचारियों को हटाकर मनमाने ढंग से लोगों की नियुक्ति पर नाराजगी जताई है। इसे जाति/धर्म आधारित या भ्रष्टाचार से प्रेरित करार दिया गया है।
- सहारनपुर का मामला: पत्र में सहारनपुर जनपद के बेहट डिवीजन का विशेष उल्लेख है, जहाँ 15 वर्षों से कार्यरत कुशल लाइनमैन को हटाकर नए लोगों को रखे जाने की शिकायत की गई है।
- प्रशासनिक लापरवाही: मंत्री ने स्पष्ट किया है कि बिना सहमति के सरचार्ज बढ़ाने, महत्वपूर्ण निर्णयों की पूर्व सूचना न देने और संकट के समय मुख्यालय से अनुपस्थित रहने जैसे मामलों ने व्यवस्था की कार्यकुशलता पर प्रश्नचिन्ह लगा दिया है।
संकट के समय ‘अनुपस्थिति’ पर सवाल
पत्र में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि मई के महीने में आए आंधी-तूफान के कारण विद्युत अवसंरचना को भारी नुकसान पहुँचा था। इस कठिन समय में, जब उपभोक्ताओं को राहत पहुँचाने के लिए युद्ध स्तर पर काम करने की आवश्यकता थी, चेयरमैन की अनुपस्थिति और उनकी कार्यशैली मंत्री के निशाने पर आ गई है।
क्या होगा असर?
सत्ता और प्रशासनिक गलियारों में इस वायरल पत्र को लेकर चर्चाओं का बाज़ार गर्म है। सवाल यह है कि जनता से सीधे जुड़े इस संवेदनशील विभाग में जब शीर्ष नेतृत्व ही आमने-सामने होगा, तो आम उपभोक्ताओं को निर्बाध बिजली आपूर्ति का संकल्प कैसे पूरा होगा? फिलहाल, विभाग के भीतर मची यह ‘अंदरूनी जंग’ अब एक बड़े प्रशासनिक संकट का रूप लेती दिख रही है।
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