कप्तानगंज: न्यायालय के आदेश पर भारी पड़ीं ‘दबंग’ महिलाएं, राजस्व टीम खाली हाथ लौटी वापस

कप्तानगंज: दबंगों के आगे नतमस्तक प्रशासन, न्यायालय के आदेश के बावजूद नहीं हट पाया अवैध कब्ज़ा
- बस्ती: पैरालिसिस पीड़ित की ज़मीन पर अवैध रास्ता, राजस्व टीम के सामने ही दबंगई का बोलबाला
- न्याय की आस में बुजुर्ग: कब्ज़ा हटाने पहुँचे प्रशासन को महिलाओं ने दिखाया ठेंगा, बिना कार्यवाही लौटी टीम
कप्तानगंज (बस्ती): एक ओर जहाँ न्यायपालिका पीड़ितों को राहत पहुँचाने के लिए सख्त आदेश जारी कर रही है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी स्तर पर प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। कप्तानगंज तहसील क्षेत्र में एक वृद्ध और बीमार व्यक्ति की पुश्तैनी ज़मीन पर अवैध कब्ज़ा हटाने पहुँची राजस्व टीम को दबंग महिलाओं के विरोध के आगे घुटने टेकने पड़े, जिसके चलते न्यायालय का आदेश अधूरा ही रह गया।
क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, राधेश्याम (पुत्र भागीरथी, निवासी ग्राम लहिलवारा) पैरालिसिस जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। उनकी ग्राम बढ़या में पुश्तैनी ज़मीन है। आरोप है कि गाँव के ही कुछ लोगों, विशेषकर अनिल सोनकर व उनके साथियों ने ज़बरदस्ती राधेश्याम की ज़मीन पर 2.5 मीटर चौड़ा और 34 मीटर लंबा रास्ता बना लिया है।
इस अवैध कब्जे से परेशान होकर राधेश्याम ने कानूनी रास्ता अपनाया। मामले की गंभीरता को देखते हुए उप जिलाधिकारी, हरैया ने 19 मई, 2026 को एक आदेश जारी कर राजस्व टीम गठित की। इस टीम में नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक और कई लेखपालों को शामिल किया गया था। आदेश में स्पष्ट निर्देश थे कि मौके पर पहुँचकर मामले का निस्तारण किया जाए और 5 दिनों के भीतर आख्या उपलब्ध कराई जाए।
प्रशासन की बेबसी या लाचारी?
न्यायालय के निर्देश के क्रम में जब राजस्व टीम पुलिस बल के साथ मौके पर पहुँची, तो वहां मौजूद दबंग महिलाओं ने जमकर हंगामा किया। उनके उग्र तेवरों और विरोध के आगे प्रशासन पूरी तरह बेबस नज़र आया। टीम को बिना अवैध रास्ता हटाए ही वापस लौटना पड़ा, जिससे न्याय की बाट जोह रहे पीड़ित राधेश्याम को भारी निराशा हाथ लगी है।
आगे क्या?
अब सवाल यह उठता है कि क्या सरकारी मशीनरी दबंगों के आगे इतनी लाचार है कि एक बीमार बुजुर्ग को उसका हक नहीं दिला सकती? प्रशासन द्वारा बल प्रयोग न करने और खाली हाथ लौट आने से क्षेत्र में तरह-तरह की चर्चाएं हैं। अब देखना यह है कि क्या प्रशासन दोबारा पूरी तैयारी और सख्ती के साथ जाकर इस अवैध कब्ज़े को हटा पाता है, या फिर पीड़ित को फिर से लंबी कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ेगी।
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