क्या शहर की सड़कें प्रशासन की जागीर हैं? आम आदमी की जान दांव पर!

अजीत मिश्रा (खोजी)
सड़कों पर अवैध कब्जा और बेलगाम भारी वाहनों से घुट रहा बस्ती शहर: क्या प्रशासन का इकबाल खत्म हो चुका है?
- मौत का रास्ता: दिनदहाड़े नो-एंट्री तोड़ रहे भारी वाहन, जिम्मेदार अधिकारी केवल कागजी नोटिस में मस्त
- क्या शहर की सड़कों पर है प्रशासन का कंट्रोल? अतिक्रमण और जाम ने छीना नागरिकों का चैन
- गांधीनगर मार्ग से रोडवेज तक अवैध कब्जों का साम्राज्य; नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों पर कब चलेगा बुलडोजर?
बस्ती शहर की सड़कों पर व्याप्त अराजकता का आलम यह है कि यातायात के नियम केवल कागजों तक ही सीमित रह गए हैं। शहर के प्रमुख मार्गों की हालत बदतर है, जहाँ सड़कों पर न केवल अतिक्रमण का साम्राज्य है, बल्कि भारी वाहनों का बेधड़क प्रवेश आम जनता की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन चुका है।शहर की सड़कों की दुर्दशा देखकर ऐसा लगता है कि यहाँ ‘नियम’ नाम की कोई चीज़ बची ही नहीं है, या शायद प्रशासन ने इन्हें ताक पर रख दिया है।शहर की मुख्य सड़कें अब राहगीरों के लिए नहीं, बल्कि माफियाओं और लापरवाह दुकानदारों के अवैध कब्जों के लिए सुरक्षित पनाहगाह बन चुकी हैं।
नियमों की धज्जियां: ‘नो एंट्री’ में भारी वाहनों का तांडव
शहर के यातायात को सुचारू रखने के लिए निर्धारित ‘नो एंट्री’ के नियम पूरी तरह से बेअसर हैं। सुबह आठ बजे के बाद भी ट्रक, ट्रेलर और ट्रैक्टर-ट्रॉली शहर की मुख्य सड़कों पर न केवल प्रवेश कर रहे हैं, बल्कि बीच सड़क पर ही सामान की लोडिंग और अनलोडिंग का काम कर रहे हैं।हद तो यह है कि ‘नो एंट्री’ के नियमों को खुलेआम चुनौती दी जा रही है। सुबह आठ बजे के बाद भी भारी वाहन, ट्रक, ट्रैक्टर-ट्रॉली शहर की मुख्य सड़कों पर बेधड़क दौड़ रहे हैं, जिससे आम जनता की जान जोखिम में पड़ गई है। मालवीय मार्ग से लेकर रोडवेज तक का इलाका तो मानो अतिक्रमण का गढ़ बन गया है, जहाँ न सिर्फ सड़कों पर ट्रकों की लोडिंग-अनलोडिंग हो रही है, बल्कि अवैध गैरेज तक चल रहे हैं।
गांधीनगर मार्ग पर अतिक्रमण हटाने के लिए नगर पालिका के तमाम दावे खोखले साबित हुए हैं। बुलडोजर चलाने की बात तो दूर, पालिका का प्रशासन अतिक्रमणकारियों के सामने पूरी तरह असहाय नजर आता है। सड़क किनारे तीन-तीन मीटर चौड़ी पटरियों पर पूरी तरह कब्जा है, और लोग सड़क पर चलने को मजबूर हैं। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
प्रमुख क्षेत्रों में व्याप्त कुव्यवस्था
- गांधीनगर मार्ग: नगर पालिका ने अतिक्रमण हटाने के लिए कई बार प्रयास किए, लेकिन अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिली है। बुलडोजर चलाने की बात तो की गई, लेकिन हकीकत में सड़क किनारे की पटरियों और नालों पर अवैध निर्माण और दुकानें बदस्तूर जारी हैं।
- मालवीय मार्ग से रोडवेज: यह क्षेत्र अतिक्रमण का मुख्य अड्डा बन गया है। सड़कों पर गिट्टी-मौरंग के ढेर लगे हैं और तीन मीटर चौड़ी पटरियों पर दुकानदारों ने कब्जा कर रखा है, जिससे राहगीर सड़क पर चलने को मजबूर हैं।
- अवैध गैरेज का जाल: मुख्य सड़कों पर गाड़ियों के गैरेज खुल गए हैं, जहाँ सड़क के बीचों-बीच वाहनों की मरम्मत की जा रही है।
आम जनजीवन और सुरक्षा पर संकट
स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क किनारे फैली गंदगी और अवैध कब्जे के कारण मालवीय मार्ग पर आवागमन असुरक्षित हो गया है। रीतन चौराहा से रोडवेज के बीच का रास्ता, जहाँ से भारी वाहनों का गुजरना प्रतिबंधित होना चाहिए, वहां भी जाम की समस्या हर दिन की बात हो गई है। स्कूली बच्चों और कार्यालय जाने वाले कर्मचारियों के लिए यह रास्ता किसी युद्धक्षेत्र से कम नहीं है।
प्रशासन की चुप्पी और खोखले दावे
- नगर पालिका के अधिकारी अंगद गुप्ता का कहना है कि अतिक्रमणकारियों को नोटिस दिए गए हैं और बहुत जल्द अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया जाएगा।
- सीओ यातायात प्रदीप कुमार त्रिपाठी का दावा है कि सुबह 8 बजे से रात 9 बजे तक भारी वाहनों पर पूर्ण प्रतिबंध है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े करती है।
शहर की यह स्थिति यह सवाल उठाने पर मजबूर करती है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है, या फिर यातायात व्यवस्था के नाम पर सिर्फ औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं?
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह इलाका अब सुरक्षित नहीं बचा है। सड़कों पर बिखरी गिट्टी-मौरंग और अवैध दुकानों के कारण हर वक्त दुर्घटना का डर बना रहता है। अधिकारी कागजों पर नोटिस देने की खानापूर्ति कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर सुधार शून्य है।
कब जागेगा प्रशासन? क्या शहर की सड़कें जनता के लिए खुलेंगी, या यह अतिक्रमण का अड्डा ही बनी रहेंगी? जनता जवाब चाहती है!
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