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नागौद में खेल प्रतिभाओं की अनदेखी, CBSE क्लस्टर मैच मे भाग नही ले पाए विद्यालय के खिलाड़ी

प्रतिभाशाली खिलाड़ियों में निराशा, अभिभावकों ने खेल शुल्क और सुविधाओं पर उठाए सवाल

IMG 20260730 WA0001 1सतना/नागौद। नगर के एकमात्र सीबीएसई (CBSE) विद्यालय विवेकानंद पब्लिक स्कूल के किसी भी खिलाड़ी या टीम को इस वर्ष आयोजित सीबीएसई क्लस्टर स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर नहीं मिला, जबकि इस समय देशभर में विभिन्न स्थानों पर क्लस्टर प्रतियोगिताएं आयोजित हो रही हैं और अन्य विद्यालयों के खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर रहे हैं। ऐसे में विद्यालय के खिलाड़ियों के प्रतियोगिता से वंचित रहने पर विद्यार्थियों और अभिभावकों में निराशा देखी जा रही है।
अभिभावकों का कहना है कि प्रवेश के समय विद्यालय द्वारा उत्कृष्ट खेल सुविधाओं और विभिन्न खेलों में सहभागिता के दावे के लिए रंगीन पोस्टर और विज्ञापन के माध्यम से किए जाते है तथा विद्यार्थियों से खेल शुल्क भी लिया जाता है। इसके बावजूद खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर नहीं मिलना चिंताजनक है। उनका कहना है कि इससे बच्चों का उत्साह प्रभावित होता है और उनकी प्रतिभा को उचित मंच नहीं मिल पाता।
*खिलाड़ियों का मनोबल प्रभावित होता है -अरुण कुमार सिंह*
वरिष्ठ खेल प्रशिक्षक एवं क्रीड़ा भारती के प्रांताध्यक्ष अरुण कुमार सिंह ने कहा कि प्रतियोगिताओं में भाग लेने का अवसर न मिलने से खिलाड़ियों का मनोबल गिरता है तथा विद्यालय की खेल गतिविधियों की छवि भी प्रभावित होती है। उन्होंने कहा कि शासन ने विद्यार्थियों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए शिक्षा के साथ खेलों को भी समान महत्व दिया है, लेकिन कई विद्यालयों में प्रशिक्षित खेल प्रशिक्षकों और पर्याप्त खेल सुविधाओं का अभाव है।
उन्होंने कहा कि यदि किसी विद्यालय में आवश्यक खेल सुविधाएं, मैदान एवं योग्य प्रशिक्षक उपलब्ध नहीं हैं, तो विद्यार्थियों से खेल शुल्क लेना उचित नहीं है, साथ ही जिन विद्यालयों के पास मान्यता की शर्तों के अनुरूप खेल मैदान उपलब्ध नहीं हैं, उनकी मान्यता की समीक्षा कर आवश्यक कार्यवाही की जानी चाहिए।
*’खेल संस्कृति को बढ़ावा नहीं मिला तो बच्चे मैदान छोड़ देंगे’*
अरुण कुमार सिंह ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि यदि विद्यालयों में खेल संस्कृति को बढ़ावा नहीं दिया गया और खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के अवसर नहीं मिला, तो आने वाले समय में बच्चे मैदान के खेलों से दूर होकर केवल मोबाइल आधारित खेलों तक सीमित रह जाएंगे। उन्होंने विद्यालयों से खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और प्रतियोगिताओं में सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की।

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