
देश मे संसाधन की कमी,रुपये के किमत मे कमी,महंगाई,बेकारी, भ्रष्टाचार,शिक्षा,पेपर लिक,बॅंकोकी मनमानी,मिलावट,पर्यावरण पर संज्ञान कब लेगी सरकार.! सरकार सबंधित वादोंके तथा धार्मिक मुद्दे का साथ चूनकर आयी,पर देश की आर्थिक,मंदिर चंदा चोरी,किसान आत्महत्या,रोजगार, सामाजिक,धार्मिक ,शिक्षानितीपर तथा अनेक क्षेत्रमे शतप्रतिशत विफल रही है सरकार।! जनता के भलाई मूद्दे छोड पूँजवादी के लिये काम कर रहे है,जनता द्वारा चुनकर आये लोकप्रतिनिधी.! “किसीने कहा था जो सरकारे धार्मिकता का जहर फैलाकर सत्ता हतियाती है,वर सरकार का वजूद ईतिहास मे आपने आप सिपर होता है। भलेही वह दो दिन सत्ता मे रहे। आखिरकार उसे अपमान के साथ पदच्चुत होना ही होगा।
“ क्या सरकार अपने दायित्वसे भाग रही है। ? क्या समय रहते अपनी जनता विरोधी नितीमे बदलकर पायेगी सरकार। ? भविष्य मे जनता,विद्यार्थी, किसान,जनता के रोष को झेल पायेगी सरकार। ? यह आवाज पुरे देश,राज्य,हर क्षेत्र से सरकार के गलत नितीयोंके विरुद्ध उठ रही है आवाज।





