



बांगरदा ( खरगोन ) – समाज को पतन – पराभव से बचाने के लिए विद्यार्थियों के मन – मस्तिष्क में
शिक्षा के साथ – साथ संस्कारों को प्रतिष्ठित करने की मूल आवश्यकता हैं। राष्ट्र को सशक्त, समर्थ, श्रेष्ठ एवं स्वावलम्बी बनाने के लिए शिक्षकों को नैतिक,मानवीय, राष्ट्रीय एवं सांस्कृतिक मूल्यों का संवर्धन करने वाली संस्कार युक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए कृत संकल्पित होना पड़ेगा।
उक्त विचार एकीकृत शा. उ. मा. वि. बांगरदा से स्थानांतरित शिक्षक जगदीश शाह एवं तरुण मंडलोई के विदाई समारोह के अवसर पर संकुल प्राचार्य के. के. डोंगरे ने व्यक्त किये।
शिक्षक जगदीश शाह ने ज्ञान, कर्म एवं निष्ठा के युग्म पर प्रकाश डालते हुवे कहा की इन तीनों को जीवन में धारण करके ही लक्ष्य को प्राप्त किया जा सकता हैं।
शिक्षक तरुण मण्डलोई ने शिक्षक के सामर्थ एवं शिष्य की पात्रता को असाधारण उपलब्धियों का आधार बताया।
इस अवसर पर जनशिक्षक रायसिंह पंवार एवं वरिष्ठ शिक्षक विरेन्द्र सिंह सोलंकी ने स्थानांतरित शिक्षकों के सुचितापूर्ण व्यक्तित्व एवं कर्मशील कृतित्व पर अपने विचार व्यक्त किये।
कार्यक्रम का प्रारम्भ दीप प्रज्ज्वलन एवं माँ सरस्वती के पूजन के साथ हुवा। तत्पश्चात स्थानांतरित शिक्षकों का मंगल तिलक व पुष्पहार से स्वागत करते हुवे शाल, श्रीफल व अभिनन्दन पत्र भेंटकर सम्मानित किया गया।
अभिनन्दन पत्र का वाचन जनशिक्षक बी.एल.रेवापाटी एवं वरिष्ठ शिक्षक राधेश्याम ओछठ ने किया।
कार्यक्रम का संचालन श्रीमती मनीषा प्रधान एवं विनोद नरगावे ने किया। एवं आभार राकेश पाटीदार ने माना।
इस अवसर पर संकुल केंद्र बांगरदा के सभी शिक्षक – शिक्षिकाएं एवं कार्यालयीन स्टॉफ उपस्थित रहा।
:- रामेश्वर फुलकर पत्रकार
बांगरदा


