
वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664* मध्यप्रदेश में एक ऐसा दुर्लभ प्राकृतिक अवशेष सामने आया है, जिसे बैगा आदिवासी समुदाय लंबे समय से पवित्र मानकर सुरक्षित रखता आ रहा था। वैज्ञानिक जांच में पता चला कि यह सामान्य पत्थर नहीं, बल्कि करीब 6.5 करोड़ वर्ष पुराना दुर्लभ कोरल जीवाश्म है। जानकारी के अनुसार, यह जीवाश्म डिंडोरी क्षेत्र में एक वनस्थली से जुड़ी पारंपरिक आस्था के केंद्र में संरक्षित था। स्थानीय बैगा समुदाय इसे श्रद्धा की दृष्टि से देखता था और पीढ़ियों से इसकी देखभाल करता आ रहा था। वैज्ञानिकों द्वारा क्षेत्रीय और प्रयोगशाला स्तर पर जांच किए जाने के बाद इसकी असाधारण प्राचीनता और वैज्ञानिक महत्व सामने आया।विशेषज्ञों के अनुसार, यह जीवाश्म उस भूवैज्ञानिक काल का है जब धरती पर डायनासोरों का अस्तित्व था। करीब 65 मिलियन वर्ष पुराना यह अवशेष मध्य प्रदेश की भूवैज्ञानिक विरासत के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
इस खोज की खास बात यह है कि स्थानीय समुदाय ने इसे वैज्ञानिक पहचान मिलने से बहुत पहले ही सामान्य पत्थर न मानकर विशेष महत्व दिया और सुरक्षित रखा। इस तरह पारंपरिक आस्था के कारण लाखों वर्ष पुराना प्राकृतिक अवशेष पीढ़ियों तक संरक्षित रहा। रिपोर्ट के अनुसार, डिंडोरी क्षेत्र से सामने आए कुछ चयनित भूवैज्ञानिक अवशेषों को भविष्य में राज्य के संग्रहालयों में प्रदर्शित करने की योजना है। इससे लोगों को मध्य प्रदेश की प्राचीन भूगर्भीय विरासत और प्राकृतिक इतिहास को समझने का अवसर मिलेगा। यह खोज विज्ञान और स्थानीय पारंपरिक ज्ञान के बीच एक दिलचस्प संबंध भी सामने लाती है। जिस अवशेष को समुदाय ने श्रद्धा के कारण सुरक्षित रखा, वही अब वैज्ञानिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हुआ है।






