बड़ी खबर | साकेत थाने में महिला पत्रकारों से कथित मारपीट पर भड़का पत्रकार समाज, इंडियन जर्नलिस्ट राइट काउंसिल ने जताया कड़ा विरोध

उत्तर प्रदेश महासचिव एलिक सिंह ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा—दोषी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया जाए, मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष जांच हो; पत्रकारों के साथ इस तरह का व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
नई दिल्ली। दिल्ली के साकेत थाने में दो महिला पत्रकारों शाहीन और नफीसा के साथ कथित मारपीट के आरोपों ने पत्रकार जगत में आक्रोश पैदा कर दिया है। पत्रकारों की ओर से लगाए गए आरोपों के मुताबिक उन्हें कथित तौर पर थाने के अंदर एक कमरे में ले जाकर उनके साथ मारपीट की गई। घटना के बाद दोनों पत्रकारों की मेडिकल जांच कराए जाने की बात सामने आई है। मामले को लेकर पत्रकार संगठनों और पत्रकार समुदाय की ओर से निष्पक्ष जांच तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग उठने लगी है।
इसी क्रम में इंडियन जर्नलिस्ट राइट काउंसिल के उत्तर प्रदेश महासचिव एलिक सिंह ने पूरे मामले का कड़ा विरोध करते हुए कथित पुलिस कार्रवाई की तीखी निंदा की है। एलिक सिंह ने कहा कि पत्रकारों के साथ थाने के अंदर इस तरह का कथित व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। उन्होंने मांग की कि जिन पुलिसकर्मियों पर महिला पत्रकारों के साथ मारपीट करने के आरोप लगे हैं, उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर निष्पक्ष कानूनी कार्रवाई की जाए।
🔴 एलिक सिंह बोले—पत्रकारों के सम्मान से समझौता नहीं
इंडियन जर्नलिस्ट राइट काउंसिल के उत्तर प्रदेश महासचिव एलिक सिंह ने कहा कि पत्रकार लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ हैं और अपना काम करते समय पत्रकारों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार गंभीर विषय है। यदि किसी पत्रकार से सुरक्षा प्रोटोकॉल को लेकर कोई गलती हुई थी तो उसके लिए कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है, लेकिन कथित तौर पर थाने के अंदर मारपीट या दुर्व्यवहार का आरोप बेहद गंभीर है और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि “पत्रकारों के साथ इस तरह का व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ तत्काल निलंबन, मुकदमा और कठोर कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए।”
उन्होंने संबंधित पुलिस अधिकारियों से मांग की कि पूरे मामले की जांच किसी ऐसे अधिकारी से कराई जाए जो घटनाक्रम से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा न हो, ताकि जांच की निष्पक्षता पर कोई सवाल न उठे।
⚠️ CCTV, MLC और थाने के रिकॉर्ड की जांच की मांग
एलिक सिंह ने मांग की कि मामले की जांच के दौरान साकेत थाने और घटनास्थल के CCTV फुटेज, महिला पत्रकारों की MLC/मेडिकल रिपोर्ट, थाने की GD एवं ड्यूटी डायरी, हिरासत से संबंधित रिकॉर्ड तथा मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों के बयान सुरक्षित कराए जाएं।
उन्होंने कहा कि यदि CCTV फुटेज उपलब्ध है तो उसे सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि यही फुटेज पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने लाने में महत्वपूर्ण साक्ष्य साबित हो सकता है। साथ ही दोनों पत्रकारों की मेडिकल रिपोर्ट को भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया जाना चाहिए।
👮 पुलिस के पक्ष की भी हो निष्पक्ष जांच
मामले में दिल्ली पुलिस की ओर से VVIP सुरक्षा और प्रोटोकॉल से जुड़ा पक्ष सामने आया है। पुलिस का कहना है कि पत्रकारों को पत्रकारिता करने के कारण नहीं, बल्कि सुरक्षा व्यवस्था में कथित व्यवधान के चलते पूछताछ के लिए थाने ले जाया गया था और मारपीट के आरोपों को पुलिस ने गलत बताया है।
ऐसे में पूरे मामले की निष्पक्ष जांच जरूरी हो जाती है। यदि पत्रकारों ने प्रोटोकॉल का उल्लंघन किया था तो उसकी भी जांच हो और यदि पुलिसकर्मियों पर लगाए गए मारपीट के आरोप सही पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई हो। किसी भी पक्ष को जांच से बाहर नहीं रखा जाना चाहिए।
📰 पत्रकार संगठनों की भूमिका और बढ़ी जिम्मेदारी
घटना के बाद पत्रकार संगठनों की ओर से उठाई जा रही आवाज के बीच इंडियन जर्नलिस्ट राइट काउंसिल ने भी स्पष्ट किया है कि पत्रकारों के अधिकार और सम्मान से जुड़े मामलों में संगठन अपनी आवाज उठाता रहेगा। एलिक सिंह ने कहा कि पत्रकारों को अपना कार्य करने के दौरान डर या दबाव में काम करने की स्थिति नहीं बननी चाहिए।
उन्होंने मांग की कि पूरे मामले में दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी स्पष्ट रूप से सामने आएं और जनता तथा पत्रकार समुदाय को बताएं कि साकेत थाने में उस दौरान क्या हुआ था और आरोपों की जांच किस स्तर पर की जा रही है।
🔥 अब बड़ा सवाल—जांच कब और किसके खिलाफ?
अब इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कथित मारपीट के आरोपों की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच होगी? क्या थाने के CCTV फुटेज सार्वजनिक जांच के लिए सुरक्षित किए जाएंगे? क्या मेडिकल रिपोर्ट को जांच का आधार बनाया जाएगा? और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो क्या संबंधित पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज कर निलंबन और कानूनी कार्रवाई की जाएगी?
इंडियन जर्नलिस्ट राइट काउंसिल के उत्तर प्रदेश महासचिव एलिक सिंह ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि पत्रकारों के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार का मामला गंभीर है और यदि जांच में आरोप सही साबित होते हैं तो दोषी पुलिसकर्मियों पर तत्काल कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।
फिलहाल, मारपीट के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच के जरिए होना बाकी है, जबकि पुलिस ने आरोपों से इनकार किया है। ऐसे में निष्पक्ष जांच ही इस विवाद की वास्तविक सच्चाई सामने लाने का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता है।
📢 इंडियन जर्नलिस्ट राइट काउंसिल की मांग
✔️ आरोपी पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित किया जाए।
✔️ आरोपों की निष्पक्ष जांच कराई जाए।
✔️ दोषी पाए जाने पर मुकदमा दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।
✔️ CCTV फुटेज और सभी सरकारी रिकॉर्ड सुरक्षित किए जाएं।
✔️ पत्रकारों की सुरक्षा और सम्मान सुनिश्चित किया जाए।
एलिक सिंह, उत्तर प्रदेश महासचिव — इंडियन जर्नलिस्ट राइट काउंसिल
“पत्रकारों के साथ इस तरह का व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।”
📰 VANDE BHARAT LIVE TV NEWS
✍️ विशेष रिपोर्ट: एलिक सिंह
📰 सम्पादक: वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज, सहारनपुर
📍 ब्यूरो प्रमुख: हलचल इंडिया न्यूज़, सहारनपुर
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