मृत घोषित व्यक्ति जिंदा मिला,NSUI का संजय गांधी अस्पताल पर हल्लाबोल!

*मृत घोषित व्यक्ति जिंदा मिला,NSUI का संजय गांधी अस्पताल पर हल्लाबोल!*
*फर्स्ट ईयर मेडिकल छात्र की भूमिका पर गंभीर सवाल,4 घंटे से ज्यादा चला धरना,डीन के इस्तीफे की मांग पर जमकर हंगामा*
रीवा। संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर ऐसा मामला सामने आया है, जिसने अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था और मरीजों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस व्यक्ति को अस्पताल में मृत घोषित कर दिया गया, उसे पोस्टमार्टम के लिए ले जाते समय जीवित पाए जाने की जानकारी सामने आने से अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया।
बताया जा रहा है कि एक फर्स्ट ईयर मेडिकल छात्र द्वारा व्यक्ति को मृत घोषित किया गया, जिसके बाद उसे पोस्टमार्टम की प्रक्रिया के लिए भेजा गया। लेकिन रास्ते में उसके जीवित होने की जानकारी सामने आने के बाद अस्पताल की पूरी व्यवस्था सवालों के घेरे में आ गई। हालांकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति और जिम्मेदारी जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
*मामला सामने आते ही NSUI ने खोला मोर्चा*
घटना से आक्रोशित NSUI रीवा इकाई ने जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय के नेतृत्व में संजय गांधी अस्पताल परिसर में मोर्चा खोल दिया। कार्यकर्ताओं ने अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए जिम्मेदार चिकित्सकों एवं कर्मचारियों पर कार्रवाई की मांग की।
देखते ही देखते प्रदर्शन ने उग्र रूप ले लिया और चार घंटे से अधिक समय तक अस्पताल परिसर में धरना-प्रदर्शन चलता रहा। इस दौरान अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर विरोध जताया गया।
*पुलिस और NSUI कार्यकर्ताओं में तीखी बहस*
प्रदर्शन के दौरान पुलिस और NSUI कार्यकर्ताओं के बीच कई बार तीखी नोकझोंक की स्थिति बनी। NSUI कार्यकर्ता अस्पताल अधीक्षक डॉ. प्रियंक शर्मा से मुलाकात की मांग पर अड़े रहे। वहीं मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. सुनील अग्रवाल के इस्तीफे की मांग को लेकर कार्यकर्ताओं ने जमकर हंगामा किया।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि यदि किसी व्यक्ति को मृत घोषित करने जैसी गंभीर चूक सामने आती है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। NSUI ने पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषी पाए जाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठाई।
*एक सवाल, जिसने पूरी व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया*
मामले ने अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सबसे बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है—आखिर जिस व्यक्ति को मृत घोषित किया गया, वह पोस्टमार्टम के लिए ले जाते समय जीवित कैसे मिला?
यदि घटना की पुष्टि जांच में होती है तो यह केवल एक व्यक्ति की कथित चूक का मामला नहीं, बल्कि अस्पताल में मेडिकल प्रोटोकॉल, मृत्यु की पुष्टि की प्रक्रिया और जवाबदेही की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करने वाला मामला हो सकता है।
प्रसूता कल्पना मिश्रा और उसके नवजात शिशु की मौत का विवाद अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि सामने आए इस नए मामले ने संजय गांधी स्मृति चिकित्सालय को एक बार फिर सवालों के घेरे में ला खड़ा किया है।
अब देखना होगा कि अस्पताल प्रबंधन और प्रशासन इस पूरे मामले की जांच में क्या तथ्य सामने लाते हैं और यदि लापरवाही साबित होती है तो जिम्मेदारों पर क्या कार्रवाई की जाती है।
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