नकली सोने की ईंट को असली बताकर रुपये लूटने वाले अपराधियों पर आखिर क्यों मेहरबान है दिगौड़ा पुलिस?

टीकमगढ़। दिगौड़ा पुलिस की 9 सितंबर को जारी प्रेस विज्ञप्ति ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस ने नकली सोने की ईंट को असली बताकर 1.55 लाख रुपये की धोखाधड़ी करने के मामले में दो आरोपियों की गिरफ्तारी को अपनी सफलता के रूप में प्रस्तुत किया, लेकिन विज्ञप्ति में गिरफ्तार आरोपियों के नाम और निवास का उल्लेख नहीं किया गया।
खास बात यह है कि जिस व्यक्ति से ठगी की गई, उसका नाम पुलिस ने सार्वजनिक किया है। इतना ही नहीं, उसके फोटो और वीडियो भी जारी किए गए। वहीं, ठगी के आरोपियों की पहचान और नाम सार्वजनिक नहीं किए गए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर पुलिस अपराधियों के नाम बताने से क्यों बच रही है?
पुलिस के मुताबिक चार लोगों ने मिलकर पीतल के टुकड़े को सोने की ईंट बताकर फरियादी से 1.55 लाख रुपये ठगे थे। मामले में महिला समेत दो आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है और पुलिस ने 80 हजार रुपये बरामद करने का दावा किया है। पुलिस की पूछताछ में आरोपियों द्वारा अपने दो अन्य साथियों के साथ मिलकर ठगी करने की बात सामने आने की जानकारी भी दी गई है।
एसडीओपी बोले- अभी शिनाख्त नहीं हुई
इस मामले में एसडीओपी राहुल कटरे का कहना है कि आरोपियों की अभी शिनाख्त नहीं हुई है, इसलिए उनके नाम प्रेस विज्ञप्ति में नहीं दिए गए। लेकिन यही बात अब दूसरा सवाल खड़ा कर रही है। जब आरोपियों की पहचान ही स्पष्ट नहीं हुई थी, तो पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी और कार्रवाई की प्रेस विज्ञप्ति जारी करने में इतनी जल्दबाजी क्यों दिखाई?
यदि पुलिस को आरोपियों की पहचान सार्वजनिक करने में कोई कानूनी या जांच संबंधी बाधा थी, तो उसे प्रेस विज्ञप्ति में स्पष्ट किया जाना चाहिए था।
क्या समाज से बड़े हैं अपराधी?
पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति ने यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि क्या अपराधियों की पहचान छिपाना उन्हें समाज के सामने उजागर करने से ज्यादा जरूरी है? अपराधियों के नाम सामने आने से आम लोग ऐसे लोगों से सतर्क हो सकते हैं और संभव है कि इनके पुराने कारनामों के शिकार लोग भी सामने आएं।
यदि पुलिस के अनुसार आरोपी लंबे समय से इस तरह की ठगी में सक्रिय थे, तो उनके नाम सार्वजनिक होने से अन्य पीड़ितों तक पहुंचने में भी मदद मिल सकती है। ऐसे में दिगौड़ा पुलिस को यह स्पष्ट करना होगा कि फरियादी की पहचान और फोटो-वीडियो सार्वजनिक करने के बावजूद आरोपियों के नाम और निवास की जानकारी क्यों छिपाई गई?
फिलहाल नकली सोने की ईंट के नाम पर हुई ठगी से ज्यादा चर्चा पुलिस की उस प्रेस विज्ञप्ति की हो रही है, जिसमें फरियादी की पहचान सामने है, लेकिन अपराध के आरोपियों की पहचान पर्दे के पीछे है।
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