उज्जैन महापौर को रथ से नीचे उतारा, अन्य अधिकारी रहे चुप

तेजकुमार जारवाल जिला रिपोर्टर / वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज़ / इंदौर मध्य प्रदेश /
उज्जैन दलित महापौर के सम्मान का सवाल उठा, बैरवा समाज में आक्रोश — समाज का अपमान या उज्जैन के प्रथम नागरिक की गरिमा का सवाल? उज्जैन।
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के उज्जैन रोड शो के दौरान महापौर मुकेश टटवाल को रथ से नीचे उतारे जाने का मामला अब राजनीतिक और सामाजिक मुद्दा बनता जा रहा है। घटना के बाद महापौर ने सार्वजनिक रूप से अपनी आपत्ति जताई है और कहा है कि इस घटनाक्रम से उनके सम्मान को ठेस पहुंची है।
जानकारी के अनुसार सदावल हेलीपैड से रोड शो शुरू होने से पहले महापौर मुकेश टटवाल भी रथ पर सवार हुए थे। महापौर का कहना है कि उन्हें कार्यक्रम से जुड़े पदाधिकारियों द्वारा रथ पर आने के लिए कहा गया था।
कुछ समय बाद उन्हें रथ से नीचे उतरने के लिए कहा गया। इस दौरान रथ पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन, मुख्यमंत्री डॉ.
मोहन यादव सहित अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद थे। आखिर महापौर को ही क्यों उतारा गया?
घटना के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि
यदि महापौर को रथ पर सवार होने के लिए कहा गया था, तो बाद में उन्हें नीचे उतारने का निर्णय क्यों लिया गया? उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार पुलिस की ओर से प्रोटोकॉल सूची का हवाला दिया गया, जिसमें महापौर का नाम नहीं होने की बात सामने आई है।
वहीं कार्यक्रम से जुड़े पदाधिकारी ने बताया कि महापौर का नाम रथ पर सवार होने वाली सूची में था और उन्हें नीचे किसने तथा किस कारण से उतारा, इसकी उन्हें जानकारी नहीं थी। बैरवा समाज में आक्रोश
घटना के बाद बैरवा समाज के संगठनों की ओर से भी विरोध सामने आया है।
एक रिपोर्ट के अनुसार बैरवा समाज एकता संगठन ने मामले को महापौर के सार्वजनिक अपमान से जोड़ते हुए राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा तथा पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की। समाज की ओर से सवाल उठाया जा रहा है कि यदि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ सार्वजनिक कार्यक्रम में ऐसा व्यवहार हुआ है, तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।
वहीं, इस घटना को जातिगत अपमान के रूप में देखे जाने को लेकर राजनीतिक आरोप भी सामने आए हैं। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों का आधिकारिक स्पष्टीकरण भी महत्वपूर्ण होगा।
महापौर ने जताया विरोध
घटना से आहत महापौर मुकेश टटवाल ने 20 सितंबर को फ्रीगंज स्थित डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के सामने मौन बैठकर विरोध करने की घोषणा की है।
रिपोर्ट के मुताबिक उनका कहना है कि वे बाबा साहेब की प्रतिमा के सामने बैठकर अपमान सहने की शक्ति की प्रार्थना करेंगे। अन्य नेताओं की भूमिका पर भी सवाल
घटना के दौरान रथ पर मौजूद अन्य नेताओं और अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।
सवाल यह है कि जब महापौर को रथ से नीचे उतारा गया, तब मौके पर मौजूद जिम्मेदार पदाधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट करने या महापौर के सम्मान को लेकर हस्तक्षेप क्यों नहीं किया। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि किसी अधिकारी या नेता ने जानबूझकर महापौर का अपमान किया।
इस पूरे मामले में यह स्पष्ट होना बाकी है कि महापौर को नीचे उतारने का अंतिम निर्णय किसने लिया और उसका वास्तविक कारण क्या था। उज्जैन की जनता और बैरवा समाज अब जवाब चाहता है—महापौर को रथ से नीचे उतारने का आदेश किसका था, उन्हें क्यों उतारा गया और मौके पर मौजूद जिम्मेदार लोगों ने उस समय क्या कार्रवाई की?
मामले की निष्पक्ष जांच और संबंधित पक्षों के स्पष्ट बयान के बाद ही पूरी तस्वीर सामने आ सकेगी।
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