राधाष्टमी विशुद्ध प्रेम, चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रकटीकरण का पर्व- अविराज सिंह

सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 *युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि श्रीराधा निष्काम एवं निस्वार्थ प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना की सर्वोच्च शक्ति हैं तथा श्रीराधा-कृष्ण एक ही अखंड परमतत्व के दो अभिन्न रूप हैं। श्री राधाष्टमी महोत्सव-2026 एवं विशाल शोभायात्रा के अवसर पर मुख्य बस स्टैंड, बांदरी में आयोजित कार्यक्रम में सहभागिता करते हुए उन्होंने कहा कि सनातन दर्शन में श्रीराधा को भगवान श्रीकृष्ण की ह्लादिनी शक्ति अर्थात आनंद प्रदान करने वाली परम ऊर्जा के रूप में स्वीकार किया गया है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार शैव दर्शन में अर्धनारीश्वर की अवधारणा है, उसी प्रकार श्रीराधा और श्रीकृष्ण विशुद्ध प्रेम की लीला के विस्तार के लिए एक से दो रूपों में प्रकट हुए, जबकि तात्विक रूप से दोनों एक ही परमतत्व हैं। अविराज सिंह ने कहा कि श्रीराधा अष्टमी केवल सामान्य धार्मिक उत्सव नहीं, बल्कि विशुद्ध प्रेम, चेतना और आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रकटीकरण का पर्व है।
सनातन परंपरा में भी श्रीकृष्ण से पहले श्रीराधा का नाम लिया जाता है और हम 'राधे-कृष्ण' कहकर परमतत्व का स्मरण करते हैं। उन्होंने कहा कि जैसे भगवान विष्णु के साथ माता लक्ष्मी का अभिन्न संबंध है, वैसे ही भगवान श्रीकृष्ण के साथ श्रीराधा का संबंध है।
श्रीराधा को भगवान श्रीकृष्ण की मूल प्रकृति और ह्लादिनी शक्ति माना गया है। उनके अनुसार श्रीराधा का प्रेम पूर्णतः निष्काम है और इसी प्रेम के माध्यम से जीव और परमात्मा के बीच दिव्य संबंध स्थापित होता है।
उन्होंने कहा कि विभिन्न संतों और सनातन परंपरा के आचार्यों ने श्रीराधा के महत्व को अपने-अपने दर्शन और साधना के माध्यम से स्पष्ट किया है। भगवान शिव से लेकर देवर्षि नारद, श्री चैतन्य महाप्रभु, स्वामी हरिदास, श्रीरामकृष्ण परमहंस तथा वेदव्यास जी से संबंधित परंपराओं में श्रीराधा को प्रेम, भक्ति और परम शक्ति का स्वरूप बताया गया है।
श्री चैतन्य महाप्रभु के दर्शन में श्रीराधा का प्रेम 'महाभाव' का सर्वोच्च स्वरूप माना गया है, जबकि भक्ति परंपरा में उनकी कृपा को भगवान श्रीकृष्ण की प्राप्ति का महत्वपूर्ण माध्यम बताया गया है। उन्होंने कहा कि श्रीराधा का स्मरण व्यक्ति को निष्काम प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक चेतना की ओर ले जाता है।
अविराज सिंह ने कहा कि राधाष्टमी की पूजा में श्रीराधा की कृपा और उनके प्रति भक्ति का विशेष महत्व है। 'श्री राधा कृपा कटाक्ष स्तोत्र' का भी इस अवसर पर विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण ने कृष्ण पक्ष की अंधियारी मध्यरात्रि में जन्म लिया, जबकि श्रीराधा शुक्ल पक्ष की उज्ज्वल वेला में प्रकट हुईं। यह प्रतीकात्मक रूप से प्रकाश और प्रेम की उस शक्ति को दर्शाता है, जो जीवन से अज्ञान और अंधकार को दूर करती है।
श्रीराधा ने अपने जीवन से यह संदेश दिया कि भगवान की प्राप्ति का मार्ग केवल ज्ञान अथवा कठोर तपस्या तक सीमित नहीं, बल्कि निष्काम और एकाग्र प्रेम भी ईश्वर प्राप्ति का महत्वपूर्ण मार्ग है। उन्होंने कहा कि श्रीराधा का मन जिस प्रकार भगवान श्रीकृष्ण में पूर्ण रूप से एकाग्र था, उसी प्रकार मनुष्य को भी अपने जीवन में ईश्वर के प्रति एकाग्रता और समर्पण का भाव रखना चाहिए।
स्वयं भगवान श्रीकृष्ण द्वारा श्रीराधा की उपासना किए जाने की धार्मिक मान्यता उनके तत्व की सर्वोच्चता को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि श्रीराधा का नाम और वृंदावन की रज सनातन भक्ति परंपरा में अत्यंत पवित्र माने गए हैं।
राधा-कृष्ण की भक्ति व्यक्ति के भीतर प्रेम, विनम्रता, समर्पण और सेवा की भावना को मजबूत करती है। अविराज सिंह ने कहा कि अवधूत सिद्ध महायोगी श्री दादा गुरुजी का जीवन भी समर्पण और सेवा का उदाहरण है।
वे मां नर्मदा, धर्म, धरा, धेनु, प्रकृति एवं पर्यावरण के संरक्षण के लिए निरंतर समर्पित हैं। दादा गुरुजी की दीर्घकालीन साधना और तपस्या साधना, सेवा और त्याग की प्रेरणा देती है।
उनके जीवन का संदेश है कि जो जीवन केवल अपने लिए जिया जाता है, वह सीमित रह जाता है, जबकि सेवा के लिए समर्पित जीवन वास्तविक साधना बन जाता है। कार्यक्रम के दौरान श्री राधाष्टमी महामहोत्सव एवं शोभायात्रा में सहभागिता के साथ श्री गौर गोविन्द मंदिर, रविशंकर वार्ड, सागर तथा कल्पधाम सन सिटी, कनेरा देव, सागर में आयोजित कल्प महोत्सव-2026 में भी सहभागिता की गई।
कार्यक्रम में लक्ष्मीनारायण यादव पूर्व सांसद, भारत यादव जी यादव समाज प्रदेश अध्यक्ष, सर्वजीत सिंह, श्वेता यादव, गौरी यादव, सुमित यादव, शिवशंकर यादव यादव समाज जिला अध्यक्ष, डी.पी. यादव, बंटी यादव बांदरी यादव समाज अध्यक्ष, पप्पू यादव, आजाद यादव, उदयपाल यादव, पुष्पेंद्र यादव, शेरसिंह यादव, नीरज यादव, नीतेश यादव, कोमल यादव, यश यादव, आकाश यादव उपस्थित रहे
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