श्रीमद्भागवत कथा का भव्य समापन,दद्दा जी के प्रकटोत्सव पर हुई महाआरती, गुरु मार्ग पर चलने का लिया संकल्प

सागर।वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी 8225072664 *पीतल फैक्ट्री परिसर में मोहन कुशवाहा द्वारा आयोजित सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक वातावरण के बीच भव्य समापन हुआ। कथा के समापन अवसर पर ब्रह्मलीन गृहस्थ संत पंडित श्री देवप्रभाकर शास्त्री ‘दद्दा जी’ महाराज के पावन प्रकटोत्सव के उपलक्ष्य में विशेष पूजन एवं महाआरती का आयोजन किया गया।
इस अवसर पर गृहस्थ संत महंत केशव महाराज ने पूज्य दद्दा जी महाराज का विशेष पूजन कर महाआरती कराई। श्रद्धालुओं ने दद्दा जी के छायाचित्र पर श्रद्धा-सुमन अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
कथा समापन अवसर पर शास्त्री जी ने दद्दा जी महाराज के जीवन, साधना और समाज कल्याण के लिए किए गए कार्यों का स्मरण करते हुए कहा कि दद्दा जी ने विश्व एवं राष्ट्र कल्याण के लिए जो मार्ग दिखाया, उस पर चलना ही उनके जन्म दिवस पर सच्ची विनयांजलि होगी। उन्होंने कहा कि प्रत्येक शिष्य को गुरु के बताए आदर्शों को अपने जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए।
गुरु की महत्ता पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि जीवन में गुरु का स्थान सर्वोपरि होता है। गुरु केवल ज्ञान प्रदान नहीं करते, बल्कि सही और गलत में अंतर समझाकर जीवन को उचित दिशा भी देते हैं।
गुरु का मार्गदर्शन व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों का सामना करने की शक्ति प्रदान करता है और उसके चरित्र, विचार एवं व्यवहार को संस्कारित करता है। उन्होंने कहा कि दद्दा जी केवल गुरु नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक मार्गदर्शक थे।
उन्होंने अनुशासन, धैर्य, ईमानदारी और परिश्रम के महत्व को जीवन में उतारने की प्रेरणा दी। गुरु के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा गया कि ‘गुरु बिन ज्ञान नहीं होता।’ गुरु अज्ञान के अंधकार से निकालकर ज्ञान का प्रकाश दिखाते हैं।
गुरु का सम्मान करना और उनके बताए मार्ग का अनुसरण करना प्रत्येक शिष्य का कर्तव्य है। विभिन्न जिलों से पहुंचे दद्दा शिष्य कार्यक्रम में दद्दा शिष्य मंडल जबलपुर, दमोह, कटनी, पन्ना, छतरपुर, घनश्यामबाग, कूड़ा, बांदकपुर सहित विभिन्न स्थानों से शिष्य एवं श्रद्धालु शामिल हुए।सागर शिष्य मंडल से आयोजक मोहन कुशवाहा,सुरेंद्र सुहाने, अभय दरे, सुखदेव मिश्रा, राजकुमार तिवारी, उत्तम सिंह, माधव कटारे, अशोक दीक्षित, शिवदत्त व्यास, प्रदीप दुबे, इंजीनियर महेंद्र गोस्वामी, मनोज पवार, नारायण कबीर पंथी, आनंद ददरिया, गुड्डे अग्रवाल, महावीर शर्मा, अशोक चौधरी, रितेश तिवारी, अखिलेश गौर, हेमंत रैकवार, नितिन राठौर, रिंकू मासाब, चंदन सुहाने, संदर्भ कठल सहित बड़ी संख्या में गुरु भाई एवं श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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