राजभाषा पखवाड़ा के आलोक में सामुदायिक भवन में राजभाषा समापन सह पुरस्कार वितरण किया गया

धनबाद, बीसीसीएल :
आज दिनांक 28/09/2026 को राजभाषा पखवाड़ा के आलोक में पूर्वांचल 10:30 बजे से विशेष सामुदायिक भवन धनबाद में राजभाषा समापन सेवा पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया गया जिसमें कतरास क्षेत्र को हिंदी में विशिष्ट कार्य करने में तृतीय स्थान प्राप्त करने हेतु अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक बीसीसीएल द्वारा डॉo शंकर दयाल स्मृति सम्मान से परिष्कृत किया गया l
राजभाषा पखवाड़ा के आलोक में सामुदायिक भवन में राजभाषा समापन सह पुरस्कार वितरण किया गया
राजभाषा पखवाड़ा: हिंदी की प्रासंगिकता और हमारा दायित्वभारत एक बहुभाषी देश है, जहाँ की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता इसकी सबसे बड़ी ताकत है। इस विविधता के बीच राष्ट्र को एक सूत्र में पिरोने के लिए 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारत की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।
इसी ऐतिहासिक दिन की स्मृति में हर साल 14 सितंबर को 'हिंदी दिवस' मनाया जाता है और इसी के आलोक में सरकारी कार्यालयों, बैंकों और शिक्षण संस्थानों में राजभाषा पखवाड़ा (14 से 28 सितंबर) का आयोजन किया जाता है।राजभाषा पखवाड़े का मुख्य उद्देश्य केवल 15 दिनों तक हिंदी का उत्सव मनाना नहीं है, बल्कि प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के उपयोग को बढ़ावा देना और इसके प्रति जागरूकता बढ़ाना है।पखवाड़े का महत्व और उद्देश्यराजभाषा पखवाड़े के दौरान विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताओं जैसे—निबंध लेखन, वाद-विवाद, हिंदी टिप्पण (नोटिंग) और आलेखन, काव्य पाठ और प्रश्नोत्तरी (क्विज) का आयोजन किया जाता है। इन आयोजनों के पीछे मुख्य लक्ष्य यह होते हैं:झिझक दूर करना: अंग्रेजी के बढ़ते चलन के बीच अधिकारी और कर्मचारी प्रशासनिक कार्यों में हिंदी का प्रयोग करने में जो झिझक महसूस करते हैं, उसे दूर करना।सकारात्मक माहौल बनाना: कार्यालयों में एक ऐसा वातावरण तैयार करना जहाँ हिंदी में काम करना गर्व की बात समझी जाए, न कि किसी मजबूरी का परिणाम।प्रोत्साहन देना: बेहतर कार्य करने वाले कर्मचारियों को पुरस्कृत कर उन्हें निरंतर राजभाषा में काम करने के लिए प्रेरित करना।आधुनिक युग में राजभाषा की चुनौतियाँ और तकनीकआज के डिजिटल और वैश्विक युग में हिंदी के सामने कई नई चुनौतियाँ हैं।
हालाँकि, तकनीक के समावेशन ने इन चुनौतियों को काफी हद तक आसान भी बनाया है।सरल हिंदी का प्रयोग: राजभाषा के रूप में हिंदी को तभी व्यापक स्वीकार्यता मिल सकती है जब इसकी शब्दावली कठिन न होकर सरल और जनमानस के समझ में आने वाली हो।तकनीकी समावेशन: आज गूगल वॉइस टाइपिंग, ट्रांसलेशन टूल्स और विभिन्न हिंदी सॉफ्टवेयरों ने कंप्यूटर पर हिंदी में काम करना बेहद आसान बना दिया है। ई-ऑफिस और डिजिटल फाइलों में हिंदी का प्रयोग तेजी से बढ़ा है।हमारा सामूहिक दायित्वसंविधान के अनुच्छेद 351 के तहत यह सरकार और नागरिकों का कर्तव्य है कि वे हिंदी भाषा का प्रसार बढ़ाएं ताकि यह भारत की मिश्रित संस्कृति के सभी तत्वों के लिए अभिव्यक्ति का माध्यम बन सके।
राजभाषा पखवाड़ा हमें आत्मचिंतन का अवसर देता है कि हम पूरे वर्ष अपने दैनंदिन और आधिकारिक कार्यों में हिंदी को कितना स्थान दे रहे हैं।निष्कर्षराजभाषा पखवाड़े के आलोक में हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि हम हिंदी का सम्मान करेंगे और अपने दैनिक प्रशासनिक कार्यों में स्वेच्छा से इसका प्रयोग बढ़ाएंगे। जब हम अपनी मातृभाषा और राजभाषा को आत्मसात करेंगे, तभी वैश्विक पटल पर भारतीय संस्कृति और अस्मिता को एक नया मुकाम मिलेगा।
हिंदी केवल संवाद की भाषा नहीं, बल्कि हमारी राष्ट्रीय चेतना का प्रतीक है । उक्त आयोजन में मुख्य अतिथि के रूप में डॉ शेफाली चतुर्वेदी, तथा अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक श्री मनोज अग्रवाल एवं निदेशक मंडल से निदेशक(वित्त सह मा.
सं.), निदेशक(संचालन), निदेशक (योजना एवं परियोजना) तथा सभी महाप्रबंधक व अन्य अधिकारी/ कर्मी उपस्थित थे । कतरास क्षेत्र से क्षेत्रीय प्रबंधक (मा.
सं.), श्री उमंग कुमार ठक्कर, प्रबंधक (मा. सं.) कुमारी स्वेता एवं अनुवादक श्री अभिषेक सिंह द्वारा उक्त शील्ड को ग्रहण किया गया l
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