लाखो की कथित मांग के आरोपों पर जांच करने पहुंची टीम, महिलाओं ने खोली शिकायतों की परत

रोहिना रीपा भवन में घंटों चली पूछताछ, आपसी विवाद के चलते पूरी नहीं हो सकी जांच; पीआरपी को हटाने की मांग पर अड़ी महिलाएं
पत्रकार गोपी अजय
भटगांव (सारंगढ़-बिलाईगढ़) :- बिहान समूह की महिलाओं द्वारा पीआरपी सत्यवती कुर्रे के खिलाफ की गई शिकायत अब जांच के घेरे में है। शिकायत में लगाए गए गंभीर आरोपों की पड़ताल करने बुधवार को जिला स्तर पर गठित जांच टीम रोहिना स्थित रीपा भवन पहुंची। टीम ने क्लस्टर की कार्यकर्ताओं, पदाधिकारियों और शिकायतकर्ता महिलाओं से जानकारी लेकर मामले की वास्तविकता जानने का प्रयास किया। जांच के दौरान महिलाओं ने पीआरपी पर कई गंभीर आरोप लगाए। शिकायतकर्ता महिलाओं के मुताबिक, उनसे जिला स्तर के एक अधिकारी के नाम पर कथित रूप से 10 लाख रुपये की मांग की गई थी। महिलाओं का आरोप है कि मांग पूरी नहीं करने पर उन्हें परेशान किया जाता था तथा क्लस्टर से बाहर करने की धमकी भी दी जाती थी। महिलाओं ने जांच टीम के सामने अपने-अपने आरोप रखते हुए मामले की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की।
बयान के दौरान बिगड़ा माहौल :- जांच टीम के प्रमुख अधिकारी संजू पटेल ने बताया कि पीआरपी के खिलाफ कई आरोपों की शिकायत मिली है और इन्हीं शिकायतों की जांच के लिए टीम पहुंची थी। हालांकि, जांच के दौरान पीआरपी, समूह की अध्यक्ष-सचिव और कैडर की महिलाओं के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हो गई। इसके चलते मौके का माहौल बिगड़ गया और जांच पूरी नहीं हो सकी। अधिकारी के अनुसार, शेष जांच आगामी समय में पूरी की जाएगी।
‘हमारी बात पूरी तरह नहीं सुनी गई’ :- वहीं शिकायतकर्ता महिलाओं ने जांच प्रक्रिया को लेकर असंतोष जताया। उनका कहना है कि समय के अभाव में जांच अधूरी रह गई और उनकी शिकायतों को जिस गंभीरता से सुना जाना चाहिए था, वह नहीं हुआ। महिलाओं ने मांग की कि प्रत्येक आरोप की अलग-अलग जांच की जाए और संबंधित दस्तावेजों व बयानों के आधार पर निष्पक्ष रिपोर्ट तैयार की जाए। महिलाओं ने सत्यवती कुर्रे को पीआरपी के पद से हटाने की मांग भी जांच टीम के सामने रखी है।
अधूरी जांच ने खड़े किए सवाल :- गंभीर आरोपों की जांच के लिए टीम के पहुंचने के बावजूद कार्रवाई पूरी नहीं हो पाने से अब कई सवाल खड़े हो गए हैं। शिकायत में लगाए गए 10 लाख रुपये की कथित मांग के आरोपों की सच्चाई क्या है? क्या इसके संबंध में कोई दस्तावेज या अन्य साक्ष्य उपलब्ध हैं? महिलाओं द्वारा लगाए गए अन्य आरोपों की जांच किस स्तर तक पहुंची है? इन सवालों का जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
अब निगाहें जिला प्रशासन की अगली जांच कार्रवाई पर टिकी हैं। देखना होगा कि दोबारा जांच कब पूरी होती है और जांच रिपोर्ट में शिकायतों को लेकर क्या निष्कर्ष सामने आता है।
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