इंदौर जल संकट: जांच आयोग की रिपोर्ट में बड़ा खुलासा, नगर निगम और अधिकारियों की लापरवाही से गहराया था संकट

🔴 तेजकुमार जारवाल
जिला रिपोर्टर | इंदौर
वंदे भारत LIVE TV NEWS
इंदौर (खास खबर )
हाईकोर्ट के निर्देश पर गठित जांच आयोग ने सौंपी रिपोर्ट; नर्मदा पाइपलाइन संधारण में देरी और लापरवाही के लिए जिम्मेदार इंजीनियरों पर गाज गिरना तय।
वर्ष 2026 के भीषण जल संकट की जांच के लिए गठित विशेष जांच आयोग ने अपनी अंतिम रिपोर्ट शासन को सौंप दी है। रिपोर्ट में यह चौकाने वाला खुलासा हुआ है कि शहर में जल संकट प्राकृतिक या आकस्मिक कारणों से नहीं, बल्कि नगर निगम की प्रशासनिक अनदेखी, रख-रखाव में देरी और संबंधित इंजीनियरों की गंभीर लापरवाही के कारण उत्पन्न हुआ था। आयोग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि यदि समय रहते पाइपलाइन मरम्मत और जल वितरण प्रबंधन पर ध्यान दिया जाता, तो शहर की जनता को भीषण पेयजल संकट का सामना न करना पड़ता।
जांच आयोग के मुख्य निष्कर्ष:
लापरवाही: नर्मदा तृतीय चरण की मुख्य पाइपलाइन में लीकेज की लगातार अनदेखी की गई।
रखरखाव में देरी: मरम्मत और मेंटेनेंस के प्रस्ताव महीनों तक फाइलों में अटके रहे।
निगरानी का अभाव: जिम्मेदार इंजीनियरों द्वारा ग्राउंड लेवल पर नियमित निरीक्षण नहीं किया गया।
टैंकर प्रबंधन में गड़बड़ी: सप्लाई बाधित होने पर आपातकालीन टैंकर व्यवस्था में भी भारी अव्यवस्था पाई गई।
निगम प्रशासन और तालमेल की कमी:
रिपोर्ट में कहा गया है कि जब शहर में पानी की त्राहि-त्राहि मची थी, तब नगर निगम के संबंधित जल कार्य विभाग के अधिकारियों के बीच तालमेल की भारी कमी देखने को मिली। संधारण (Maintenance) कार्यों के लिए स्वीकृत बजट का समय पर उपयोग नहीं किया गया और अंतिम समय तक स्थिति को टालने का प्रयास किया गया।
"यदि प्रशासनिक स्तर पर त्वरित निर्णय लिए जाते और लापरवाही बरतने वाले इंजीनियरों पर समय रहते कार्रवाई की जाती, तो इंदौर की जनता को इस संकट से बचाया जा सकता था।"
— जांच आयोग की टिप्पणी
दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की तैयारी:
जांच आयोग द्वारा सौंपे गए सबूतों और रिपोर्ट के आधार पर राज्य शासन अब दोषी इंजीनियरों और अधिकारियों के खिलाफ सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई करने की तैयारी में है। सूत्रों के अनुसार, संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को निलंबित करने और शो-कॉज नोटिस जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है।
सुधार हेतु आयोग के सुझाव:
जल वितरण की दैनिक ऑनलाइन मॉनिटरिंग और पारदर्शी ट्रैकिंग सिस्टम लागू करना।
नर्मदा पाइपलाइन और पंपिंग स्टेशनों के लिए समयबद्ध (Time-bound) मेंटेनेंस शेड्यूल तय करना।
आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए बैकअप पाइपलाइन और पर्याप्त रिजर्व जल भंडारण क्षमता तैयार करना।
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