लखुरीडीह में सीसी रोड निर्माण पर गंभीर सवाल, तकनीकी मानकों की अनदेखी

सरसींवा (सारंगढ़-बिलाईगढ़) / गोपी अजय :- ग्राम पंचायत कोसमकुंडा के आश्रित ग्राम लखुरीडीह में ग्रामीणों की सुविधा के लिए कराया जा रहा सीसी रोड निर्माण कार्य अब गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में है। प्राप्त सूचना एवं स्थानीय सूत्रों के अनुसार निर्माण कार्य में निर्धारित स्लैब थिकनेस, कंक्रीट ग्रेड, मिक्स डिजाइन एवं निर्माण सामग्री की गुणवत्ता को लेकर कथित तौर पर लापरवाही बरते जाने की बात सामने आई है। जानकारी के अनुसार सड़क निर्माण में सबग्रेड की तैयारी एवं कम्पैक्शन, बेस लेयर, सीमेंट-कंक्रीट का अनुपात, वॉटर-सीमेंट रेशियो, एग्रीगेट की गुणवत्ता, स्लैब की मोटाई तथा कंक्रीट की स्ट्रेंथ जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी बिंदुओं की जांच जरूरी है। यदि इन मानकों में निर्धारित प्रावधानों से विचलन होता है तो सड़क की लोड-बेयरिंग क्षमता, क्रैक रेजिस्टेंस और सर्विस लाइफ प्रभावित हो सकती है।
मौके की तकनीकी जांच क्यों नहीं? – निर्माण कार्य को लेकर उठ रही शिकायतों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या संबंधित उपयंत्री अथवा तकनीकी अधिकारी द्वारा नियमित साइट इंस्पेक्शन किया जा रहा है? क्या निर्माण के दौरान सड़क की वास्तविक मोटाई की माप एवं रिकॉर्डिंग, उपयोग की जा रही सामग्री का सत्यापन तथा कंक्रीट की निर्धारित ग्रेड के अनुरूप क्वालिटी टेस्ट कराया जा रहा है? यदि निर्माण कार्य पूरी तरह मानक के अनुरूप है, तो प्रशासन के लिए मौके पर तकनीकी माप एवं गुणवत्ता परीक्षण कराकर स्थिति स्पष्ट करना आवश्यक है।
प्रशासन से सीधे सवाल – क्या सीसी रोड का निर्माण स्वीकृत प्राक्कलन एवं तकनीकी स्वीकृति के अनुसार हो रहा है? क्या सड़क की स्लैब थिकनेस और लेवल की मौके पर जांच की गई है? क्या कंक्रीट के मिक्स डिजाइन एवं निर्धारित ग्रेड का पालन हो रहा है? क्या निर्माण सामग्री और कंक्रीट की स्ट्रेंथ टेस्टिंग कराई गई है? क्या निर्माण की एमबी (Measurement Book) में वास्तविक कार्य की सही माप दर्ज की जा रही है?
ग्रामीणों ने संबंधित प्रशासनिक एवं तकनीकी अधिकारियों से तत्काल स्थल निरीक्षण, सड़क की वास्तविक मोटाई की माप, निर्माण सामग्री की गुणवत्ता की जांच तथा आवश्यक होने पर कंक्रीट स्ट्रेंथ टेस्ट कराने की मांग की है।
सरकारी राशि से होने वाले इस निर्माण में गुणवत्ता से कोई समझौता न हो, इसके लिए प्रशासन की तकनीकी निगरानी और मौके पर सत्यापन बेहद जरूरी है। अब देखना होगा कि जिम्मेदार अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए मौके पर जांच कराते हैं या निर्माण कार्य अपनी गति से ही चलता रहेगा।
जल्द ही सम्बंधित अधिकारियो से इस सम्बन्ध मे बात कर तकनिकी जानकारी भी लिया जायेगा की क्या कार्य उचित मापदंड और एस्टीमेट के आधार पर हो रहा क्या नियमित निरीक्षक किया जा रहा या नहीं बने रहिये हमारे साथ।
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