समाज के नाम पर संगठन हैं, तो समाज के मुद्दों पर साथ क्यों नहीं?

सीधी जिले में ब्राह्मण, राजपूत और सवर्ण समाज के नाम पर कई सामाजिक संगठन सक्रिय हैं। इन संगठनों का दावा समाज के हित, अधिकार और सम्मान की लड़ाई लड़ने का है।
लेकिन सवाल यह है कि जब समाज से जुड़े बड़े और संवेदनशील मुद्दे सामने आते हैं, तब इन संगठनों की सामूहिक भूमिका दिखाई क्यों नहीं देती?
हाल ही में UGC नियमों, आरक्षण व्यवस्था और SC/ST एक्ट से जुड़े मुद्दों को लेकर श्री राजपूत करणी सेना के नेतृत्व में आंदोलन हुआ। मेरा सवाल किसी संगठन विशेष से नहीं, बल्कि उन तमाम सामाजिक संगठनों से है जो समाज के नाम पर काम करने का दावा करते हैं—
क्या समाज के मुद्दे केवल अपने संगठन के कार्यक्रम तक सीमित हैं?
यदि कोई संगठन समाजहित की बात करता है, तो दूसरे सामाजिक संगठनों के कार्यक्रमों में उसकी भागीदारी भी दिखाई देनी चाहिए। और यदि दूसरे संगठनों के कार्यक्रमों में हम शामिल नहीं होंगे, तो फिर अपने कार्यक्रमों में दूसरे संगठनों से सहयोग की अपेक्षा कैसे करेंगे?
यह सवाल नया नहीं है। सीधी में इससे पहले भी सवर्ण समाज के भीतर अपने ही नेताओं की कथित चुप्पी को लेकर विरोध दर्ज कराया गया है। अगस्त 2026 में सोन नदी के कोलदहा घाट पर सवर्ण समाज के लोगों द्वारा प्रतीकात्मक अर्थी, मुंडन और पिंडदान के जरिए नाराजगी जताने की खबरें सामने आई थीं।
मेरी स्पष्ट मान्यता है—
संगठन समाज से बड़ा नहीं हो सकता।
राजनीतिक दल समाज से बड़ा नहीं हो सकता।
पद समाज से बड़ा नहीं हो सकता।
जो व्यक्ति जिस संगठन में है, उसे अपनी संस्था के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए, लेकिन समाज के व्यापक हित के मुद्दों पर भी अपनी भूमिका स्पष्ट करनी चाहिए।
और यदि किसी संगठन की प्राथमिकता सामाजिक मुद्दों के बजाय किसी राजनीतिक दल के साथ सक्रिय राजनीतिक भूमिका निभाना है, तो यह भी सार्वजनिक रूप से स्पष्ट होना चाहिए। किसी पर आरोप लगाना उद्देश्य नहीं है—लेकिन समाज को यह जानने का अधिकार जरूर है कि उसके नाम पर बने संगठन किन मुद्दों पर खड़े होते हैं और किन मुद्दों पर मौन रहते हैं।
इसलिए सीधी जिले के समाजबंधुओं से मेरा सवाल है—
👉 सीधी में कौन-कौन से सामाजिक संगठन वास्तव में समाज के मुद्दों पर सक्रिय हैं?
👉 कौन से संगठन अन्य समाजों और संगठनों के कार्यक्रमों में भी भागीदारी करते हैं?
👉 कौन से संगठन शिक्षा, रोजगार, सामाजिक न्याय, कानूनी सहायता और समाज की वास्तविक समस्याओं पर काम कर रहे हैं?
👉 और कौन-कौन से पदाधिकारी केवल पद और संगठन के नाम तक सीमित हैं?
आइए, नाम लेकर नहीं—काम देखकर संगठन की पहचान करें।
जिस संगठन ने समाज के लिए काम किया है, उसका सम्मान होना चाहिए।
और जहां कमी दिखाई देती है, वहां सवाल पूछना भी समाज का अधिकार है।
क्योंकि हमारा पहला धर्म है—समाजहित।
हमारा पहला दायित्व है—समाज की आवाज बनना।
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