भागीरथपुरा कांड: 8 इंजीनियरों व अफसरों पर तय हुई जिम्मेदारी, कांग्रेस लड़ेगी आर-पार की लड़ाई

🔴 तेजकुमार जारवाल
जिला रिपोर्टर | इंदौर
वंदे भारत LIVE TV NEWS
इंदौर (विशेष संवाददाता): स्वच्छता में देश का परचम लहराने वाले इंदौर शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में हुए दूषित जल कांड ने प्रशासनिक दावों की पोल खोलकर रख दी है। मामले की न्यायिक/जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद यह साफ़ हो गया है कि यह हादसा किसी प्राकृतिक आपदा का नतीजा नहीं, बल्कि घोर प्रशासनिक लापरवाही और 'सिस्टम फेल्योर' (System Failure) का सीधा परिणाम था।
जांच रिपोर्ट में बड़ा खुलासा: 8 अफसरों और इंजीनियरों की भूमिका संदिग्ध
जांच आयोग और तकनीकी टीम की विस्तृत रिपोर्ट में नगर निगम व जल कार्य विभाग के अधिकारियों की गंभीर उदासीनता को चिन्हित किया गया है। रिपोर्ट के मुख्य बिंदु:
8 अधिकारियों/इंजीनियरों पर गाज: तत्कालीन अपर आयुक्त (जल आपूर्ति), कार्यपालन यंत्री (EE), सहायक यंत्री (AE) और उप-यंत्री (Sub-Engineer) स्तर के 8 अधिकारियों को दोषी माना गया है और सख्त अनुशासनात्मक व दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश की गई है।
फाइलों की सुस्ती बनी जानलेवा: पाइपलाइन बदलने, लीकेज मरम्मत और बोरवेल जांच से संबंधित फाइलों को महीनों तक लटकाए रखने का खुलासा हुआ है। जल गुणवत्ता की उपेक्षा: दूषित जल आपूर्ति की शुरुआती शिकायतों को नजरअंदाज करना और समय पर पेयजल परीक्षण न कराना मौतों की मुख्य वजह बना।
राजनीतिक भूचाल: कांग्रेस पीड़ित परिवारों के साथ, न्याय की लड़ाई का किया ऐलान
जांच रिपोर्ट सार्वजनिक होते ही प्रदेश की राजनीति गरमा गई है। मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने राज्य सरकार और स्थानीय नगर निगम प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
पीड़ित परिवारों से मुलाकात: कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं और प्रतिनिधिमंडल ने भागीरथपुरा पहुंचकर पीड़ित परिवारों से मुलाकात की, उनका हाल जाना और ढांढस बंधाया। न्याय की लड़ाई का संकल्प: पार्टी के वरिष्ठ प्रवक्ताओं ने कहा, "यह केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि गैर-इरादतन हत्या का मामला है।
केवल निलंबन या तबादले से काम नहीं चलेगा, दोषियों पर FIR दर्ज होनी चाहिए।" कांग्रेस ने पीड़ितों के लिए उचित मुआवजे और पूरी कानूनी व सामाजिक लड़ाई लड़ने की घोषणा की है।
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