विशेष छानबीन रिपोर्ट: इंदौर के प्रमुख सरकारी अस्पतालों में पेयजल व्यवस्था लाचार; 15 में से 6 पानी के सैंपल फैले, मिला जानलेवा E. coli और Coliform

🔴 तेजकुमार जारवाल
जिला रिपोर्टर | इंदौर
वंदे भारत LIVE TV NEWS
विशेष संवाददाता | इंदौर
इंदौर शहर की जनस्वास्थ्य व्यवस्था पर एक बार फिर बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। हाल ही में इंदौर नगर निगम की वाटर टेस्टिंग लैब द्वारा शहर के प्रमुख शासकीय अस्पतालों और उनके परिसरों से लिए गए पानी के 15 सैंपलों की लैब जांच रिपोर्ट में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं।
जांच किए गए कुल सैंपलों में से 6 सैंपलों में Coliform Bacteria तथा 5 सैंपलों में E. coli (ई-कोलाई) पाया गया है। इस खुलासे के बाद से पीसी सेठी अस्पताल, महाराजा यशवंतराव (MY) अस्पताल, चाचा नेहरू बाल अस्पताल और जिला अस्पताल समेत प्रमुख स्वास्थ्य केंद्रों की पेयजल प्रणाली पर गंभीर प्रशासनिक चिंताएं बढ़ गई हैं।
📊 अस्पताल-वार जांच के आंकड़े एवं संक्रमण की स्थिति
राष्ट्रीय पेयजल सुरक्षा मानकों (BIS/NABL) के अनुसार 100 ml पानी में Coliform और E. coli बैक्टीरिया की मात्रा शून्य होना अनिवार्य है। हालांकि, इंदौर के अस्पतालों में ली गई जांच की स्थिति अत्यंत चिंताजनक है:
अस्पताल का नामसैंपल का स्थान / स्रोतColiform (MPN/100ml)E. coli (MPN/100ml)जोखिम का स्तर
PC Sethi Hospitalबोरवेल118 (सर्वाधिक)24🚨 अति-गंभीर
ग्राउंड फ्लोर RO यूनिटमौजूदमौजूद⚠️ उच्च जोखिम
District Hospitalपरिसर का वाटर कूलर645⚠️ उच्च जोखिम
Chacha Nehru Hospitalमुख्य द्वार स्थित RO यूनिट2616⚠️ उच्च जोखिम
बिल्डिंग बोरवेल104⚠️ मध्यम जोखिम
MY Hospitalमुख्य बोरवेल97⚠️ मध्यम जोखिम
नर्मदा बल्क सप्लाई लाइन0 (मुक्त)0 (मुक्त)सुरक्षित
Mental Hospitalबोरिंग एवं इमरजेंसी RO23मौजूद
मुख्य बिंदु: PC सेठी अस्पताल के बोरवेल के पानी में Coliform की मात्रा 118 MPN/100ml तक दर्ज की गई, जो पूरे अध्ययन का सबसे अधिक दूषित स्तर है।
🦠 E. coli और Coliform क्या हैं, और यह कितना खतरनाक है?
चिकित्सा विशेषज्ञों एवं माइक्रोबायोलॉजिस्ट्स के अनुसार:
Coliform Bacteria: यह पानी में गंदगी और अनुचित रखरखाव (प्रदूषण) का प्राथमिक संकेत देता है।
E. coli (Escherichia coli): यह जीवाणु मुख्य रूप से इंसान व पशुओं के मल-मूत्र के संदूषण (Fecal Contamination) के कारण पानी में घुलता है।
स्वास्थ्य पर संभावित प्रभाव:
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल संक्रमण: दूषित पानी के सेवन से पेट दर्द, उल्टी, दस्त, मरोड़ और डिहाइड्रेशन (शरीर में पानी की कमी) हो सकती है।
कमजोर प्रतिरक्षा वाले मरीजों पर असर: अस्पतालों में पहले से भर्ती मरीज, नवजात शिशु, गर्भवती महिलाएं तथा बुजुर्ग रोगी इस संक्रमण के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होते हैं।
🔍 दूषित पानी के प्रमुख कारण
पाइपलाइनों का रिसाव: भूमिगत पेयजल लाइनों और सीवरेज ड्रेनेज के समानांतर होने से लीकेज की स्थिति में गंदा पानी मिक्स हो जाता है।
जल शुद्धिकरण प्रणालियों (RO/UV) का रखरखाव न होना: अस्पताल परिसरों में स्थापित Water Coolers तथा RO प्रणालियों के फिल्टर्स की समय पर सर्विसिंग और मेम्ब्रेन चेंज न होना।
ओवरहेड टैंकों की सफाई में लापरवाही: वाटर टैंकों की नियमित रासायनिक ब्लीचिंग और सफाई न होना।
🛑 तत्काल सुधारात्मक कदम (प्रशासनिक अनुशंसाएं)
टैंकों व वाटर कुलरों का क्लोरीनेशन: सभी जल स्रोतों और ओवरहेड टैंकों में सुपर-क्लोरीनेशन प्रक्रिया तुरंत शुरू की जाए।
अल्टरनेटिव वाटर सप्लाई: जब तक बोरवेल व RO की पुनः जांच रिपोर्ट नेगेटिव न आए, तब तक मरीजों व स्टाफ के लिए सुरक्षित टैंकर व जार के माध्यम से शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराया जाए।
फिल्टर एवं मेम्ब्रेन बदलाव: अस्पतालों के बंद या खराब पड़े RO तथा वाटर कूलरों के फिल्टर तुरंत बदले जाएं।
साप्ताहिक जल-परीक्षण ऑडिट: 'अस्पताल संक्रमण नियंत्रण समिति' (HICC) तथा स्वास्थ्य विभाग द्वारा हर हफ्ते जल गुणवत्ता की नियमित ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
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