बालाघाट जिले में आखिर क्यों नहीं मिल रहा योजनाओं का लाभ? जनसुनवाई में सामने आई हितग्राहियों की परेशानी ?

जिला सवांददाता – नन्दकिशोर सिंह मेरावी (बालाघाट )
बालाघाट जिले में मंगलवार को जन सुनवाई में सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को लेकर सामने आई तीन शिकायतों ने पंचायत और जनपद स्तर की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक मामले में आवासविहीन मजदूर द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायत की गई, वहीं दूसरे मामले में ग्राम पंचायत का प्रस्ताव और जरूरी दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने के बावजूद कपिलधारा कुएं की तकनीकी स्वीकृति नहीं मिलने का मामला सामने आया है।
पेंडरई पंचायत का मामला:- ग्राम पंचायत पेंडरई निवासी उमेश मांद्रे ने शिकायत में बताया कि वह मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करता है और उसके पास स्वयं का मकान नहीं है। प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ लेने के लिए पंचायत में कई बार आवेदन करने के बावजूद उसका नाम स्वीकृत नहीं किया गया।
ऐसे में सवाल यह है कि यदि हितग्राही वास्तव में पात्र है, तो उसका प्रकरण अब तक लंबित क्यों है? पंचायत स्तर पर आवेदन के बाद क्या कार्रवाई की गई और पात्रता का सत्यापन किस स्तर पर हुआ?
मामले में परियोजना अधिकारी, प्रधानमंत्री आवास, जिला पंचायत को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। बिरसा जनपद का मामला :-
ग्राम पंचायत अचानकपुर निवासी शत्रुघ्न प्रसाद दुबे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने की मांग को लेकर पहुंचे।
शिकायतकर्ता के अनुसार परिवार की आर्थिक स्थिति कमजोर है और पूजन-पाठ से होने वाली आय से ही परिवार का पालन-पोषण होता है। उनका कहना है कि स्वयं का पक्का मकान नहीं होने के कारण परिवार को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ऐसे में सवाल उठता है कि यदि परिवार आर्थिक रूप से कमजोर है और आवास की आवश्यकता है, तो प्रधानमंत्री आवास योजना की पात्रता सूची में उसका नाम क्यों नहीं है? क्या पंचायत स्तर पर उसका पात्रता सत्यापन किया गया है ?
आवेदन के बाद अब तक क्या कार्रवाई हुई और यदि वह पात्र है तो आवास स्वीकृति में देरी किस स्तर पर हो रही है ? शिकायत के बाद जनपद सीईओ बिरसा को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
कपिलधारा कुएं की स्वीकृति पर भी सवाल:
खैरलांजी तहसील के ग्राम पंचायत पांजरा निवासी तुलसी कुमार ने मनरेगा के तहत कपिलधारा कुआं निर्माण की तकनीकी स्वीकृति नहीं मिलने की शिकायत की है। शिकायतकर्ता के अनुसार ग्राम पंचायत में प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित हुआ था तथा ग्रामसभा प्रस्ताव, नक्शा और तकनीकी प्रतिवेदन भी अधिकारियों को सौंपे गए थे।
इसके बावजूद शिकायतकर्ता का आरोप है कि खैरलांजी और कटंगी ब्लॉक के अधिकारी ब्लॉक सीमा का हवाला देकर उसे गुमराह कर रहे हैं। यदि दस्तावेज और पंचायत प्रस्ताव प्रस्तुत किए जा चुके हैं, तो तकनीकी स्वीकृति में अड़चन किस स्तर पर है?
क्या वास्तव में ब्लॉक सीमा का मामला है या प्रकरण किसी अन्य प्रशासनिक कारण से लंबित है ? मामले में जनपद सीईओ खैरलांजी को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
अब जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि हितग्राही योजना की निर्धारित पात्रता पूरी करते हैं या नहीं और यदि पात्र हैं, तो उन्हें अब तक योजना का लाभ क्यों नहीं मिल पाया।
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