भागीरथपुरा दूषित जलकांड: न्यायिक आयोग की रिपोर्ट में प्रशासनिक लापरवाही उजागर

🔴 तेजकुमार जारवाल
जिला रिपोर्टर | इंदौर
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इन्दौर। शहर के भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पेयजल आपूर्ति के कारण हुई मौतों और सैकड़ों लोगों के गंभीर रूप से बीमार पड़ने की त्रासदी में मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय द्वारा गठित एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग की अंतिम रिपोर्ट से बड़ा पर्दाफाश हुआ है। न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाले आयोग ने अपनी 600 से अधिक पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट हाई कोर्ट को सौंप दी है। रिपोर्ट में इस गंभीर मानवीय त्रासदी को "पूर्णतः रोकी जा सकने वाली प्रशासनिक नाकामी" करार दिया गया है।
859 दिनों की प्रशासनिक देरी बनी काल
जांच आयोग की रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि भागीरथपुरा की पुरानी व क्षतिग्रस्त सीवर और पेयजल पाइपलाइनों को बदलने के टेंडर और कार्यान्वयन की प्रक्रिया में नगर निगम के स्तर पर 859 दिनों का असाधारण विलंब हुआ। मई 2022 से शुरू हुई फाइल प्रक्रियाओं, लालफीताशाही और लगातार रद्द होते टेंडरों के कारण जो काम मई 2024 तक पूरा हो जाना चाहिए था, वह जनवरी 2026 तक अटका रहा। आयोग का स्पष्ट मानना है कि यदि पाइपलाइन समय रहते बदल दी जाती, तो इस दुखद हादसे को रोका जा सकता था।
30 सालों के तकनीकी जोखिम और रिकॉर्ड गायब
रिपोर्ट ने पिछले 30 वर्षों के दौरान जलापूर्ति व सीवरेज नेटवर्क के रखरखाव में हुई संस्थागत व्यवस्थागत चूक की परतें उघेड़ी हैं।
समानांतर नेटवर्क: इलाके में पीने के पानी और सीवर की लाइनें एक-दूसरे के बेहद करीब और समानांतर बिछाई गई थीं।
E. coli बैक्टीरिया: जांच में पानी के नमूनों में जानलेवा E. coli और कोलीफॉर्म बैक्टीरिया पाए गए, जिससे लोगों में गैस्ट्रोएंटेराइटिस और डिहाइड्रेशन जैसी गंभीर बीमारियां फैलीं।
रिकॉर्ड गायब: जांच आयोग को पुराने निर्माण से जुड़े नक्शे, वर्क ऑर्डर व मेंटेनेंस के मूल रिकॉर्ड तक नहीं मिल सके।
अधिकारियों पर गाज, तत्कालीन शीर्ष नेतृत्व को राहत
जांच रिपोर्ट में अधिकारियों की जवाबदेही तय की गई है:
निगम इंजीनियरों और तत्कालीन अपर आयुक्तों की लापरवाही: कार्यपालन यंत्री (इंजीनियर) संजीव कुमार श्रीवास्तव और तत्कालीन अपर आयुक्तों (भव्या मित्तल व रोहित सिसोनिया) के कार्यकाल में फाइलों को महीनों दबाए रखने और पर्यवेक्षण में घोर लापरवाही पर सख्त टिप्पणी की गई है। आयोग ने इनके खिलाफ विभागीय और कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की है।
महापौर और निगमायुक्तों को क्लीनचीट: रिपोर्ट में तत्कालीन निगमायुक्तों (प्रतिभा पाल, दिलीप यादव, शिवम वर्मा) और महापौर परिषद को प्रशासनिक स्तर पर सीधी देरी से बरी करते हुए क्लीनचीट दी गई है।
पीड़ित परिवारों को 10-10 लाख मुआवजे की सिफारिश
न्यायिक आयोग ने भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण जान गंवाने वाले लोगों (22 से अधिक मौतें) के पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए प्रति परिवार ₹10 लाख के मुआवजे की सिफारिश की है। इसके साथ ही इलाके की संपूर्ण पाइपलाइन प्रणाली को आधुनिक तकनीक से रिप्लेस करने और पानी की निरंतर निगरानी के कड़े निर्देश दिए हैं।
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