अवैध प्लॉटिंग पर बीडीए का कड़ा रुख: 25 दिन की मोहलत, फिर गर्जेगा बुलडोजर

अजीत मिश्रा (खोजी)
अवैध प्लॉटिंग करने वालों को अंतिम नोटिस, 25 दिन बाद चलेगा बुलडोजर; स्कूल और व्यावसायिक भवन भी रडार पर
संवाद न्यूज़ एजेंसी / विशेष रिपोर्ट
- नोटिस दरकिनार करने वाले 36 डेवलपर्स पर शिकंजा, बीडीए ने दी अंतिम चेतावनी
- कागजी चेतावनियों को नजरअंदाज करने वालों पर एक्शन! बस्ती में अवैध कॉलोनियों के ध्वस्तीकरण की तैयारी
- स्कूल और व्यावसायिक भवन भी रडार पर: 406 भवनों को नोटिस, मात्र 10% ने लिया संज्ञान
- महायोजना-2031 के तहत कार्रवाई: 151 वर्ग किमी क्षेत्र और 217 गांवों में अनियोजित विकास पर लगेगी रोक
- आम जनता सावधान: बिना लेआउट और नक्शा पास कॉलोनियों में फंसा पैसा, तो भुगतना पड़ेगा खामियाजा
बस्ती। बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने नियमों को ताक पर रखकर अवैध प्लॉटिंग करने और बिना लेआउट मंजूर कराए कॉलोनियां बसाने वाले 36 निजी विकासकर्ताओं (डेवलपर्स) पर शिकंजा कस दिया है। प्राधिकरण ने इन सभी को दोबारा नोटिस जारी कर अंतिम चेतावनी दी है कि यदि निर्धारित समय के भीतर लेआउट स्वीकृत नहीं कराया गया या विनियमितीकरण (शमन) नहीं किया गया, तो सीधे बुलडोजर से ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।बस्ती विकास प्राधिकरण (बीडीए) ने एक बार फिर 36 निजी विकासकर्ताओं (डेवलपर्स) को नोटिस जारी कर 25 दिनों की मोहलत दी है। चेतावनी दी गई है कि यदि निर्धारित समय में लेआउट स्वीकृत नहीं कराया गया या शमन (विनियमितीकरण) नहीं हुआ, तो सीधे बुलडोजर चलेगा। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर ये ‘अंतिम चेतावनियां’ कब तक सिर्फ कागजों तक सीमित रहेंगी?
नोटिस-नोटिस का खेल और बेपरवाह भू-माफिया
प्राधिकरण के आंकड़े खुद गवाही दे रहे हैं कि करीब एक माह पहले भी इन डेवलपर्स को नोटिस थमाए गए थे। लेकिन भू-माफियाओं के कानों पर जूं तक नहीं रेंगी। बिना लेआउट मंजूर कराए, बिना नक्शा पास किए हरदिया बुजुर्ग, पटेल चौक, ओड़वारा, अमहट, लखनेऊरा, गणेशपुर, बड़गदवा और कटरा जैसे प्रमुख इलाकों में धड़ल्ले से कॉलोनियां काटी जा रही हैं।
जब पहली नोटिस का कोई असर नहीं हुआ, तो यह दूसरा अल्टीमेटम किस भरोसे पर असर दिखाएगा? अगर भू-माफियाओं के अंदर कानून का खौफ ही नहीं रहा, तो इसके पीछे कहीं न कहीं प्रशासनिक ढिलाई और ढुलमुल रवैया ही जिम्मेदार है।
कागजी नोटिस को किया गया नजरअंदाज
प्राधिकरण के अनुसार, इन 36 निजी विकासकर्ताओं को करीब एक माह पहले भी अवैध प्लॉटिंग और निर्माण के मामलों में नोटिस जारी किए गए थे। लेकिन किसी भी विकासकर्ता ने इस चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए बीडीए के सचिव कीर्ति प्रकाश भारती ने दोबारा नोटिस जारी करते हुए नवंबर के पहले सप्ताह तक नियमानुसार विनियमितीकरण कराने का स्पष्ट निर्देश दिया है।
इन प्रमुख इलाकों में धड़ल्ले से चल रहा है खेल
प्राबधिकरण की जांच रिपोर्ट के मुताबिक, शहर और उसके आसपास के कई इलाकों में बिना स्वीकृति के धड़ल्ले से नई कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं और भूखंडों की बिक्री की जा रही है। इनमें प्रमुख रूप से शामिल क्षेत्र हैं:
- हरदिया बुजुर्ग (पेलट चौक के पास 7 मामले)
- ओड़वारा (4 मामले)
- खोराखार (3 मामले)
- देवरी (2 मामले)
- जिगिना, घरसोहिया, नारंग रोड, अमहट, लखनेऊरा, गणेशपुर रोड (बन बिहार), मुडघाट प्राथमिक विद्यालय के पास, महुडर, कटरा और बरगदवा समेत कई अन्य विभिन्न स्थान।
- इसके अलावा लाइन, हरदिया खास और सियरापार-बरगदवा सहित अन्य क्षेत्रों में भी बिना स्वीकृति कॉलोनियां बसाए जाने की शिकायतें मिल रही हैं, जिनकी जांच के लिए बीडीए की टीमें लगातार स्थलों का निरीक्षण कर रही हैं।
महायोजना-2031 के दायरे में स्कूल और कमर्शियल बिल्डिंग्स
बीडीए सचिव ने बताया कि महायोजना-2031 को ध्यान में रखकर शहर और विस्तारित प्राधिकरण क्षेत्र के हर अवैध निर्माण पर पैनी नजर रखी जा रही है। बिना स्वीकृति के बने कई व्यावसायिक भवन, कॉम्प्लेक्स और स्कूल भी अब जांच के दायरे में आ चुके हैं। कुछ स्कूलों में तो बच्चों की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इसके अतिरिक्त, बाईपास रोड पर बिना नक्शा पास कराए बने भवनों को शमन कराने के लिए भी नोटिस दिए गए हैं।
प्राधिकरण द्वारा पहले कुल 406 भवन स्वामियों को नोटिस जारी कर नियमानुसार शुल्क जमा कर अपने निर्माण को नियमित कराने को कहा गया था, लेकिन अब तक महज 10 प्रतिशत भवन स्वामियों ने ही इस पर संज्ञान लिया है।
151 वर्ग किलोमीटर तक फैला है बीडीए का दायरा
उल्लेखनीय है कि बस्ती विकास प्राधिकरण का दायरा बढ़कर अब 151 वर्ग किलोमीटर हो गया है, जिसमें कुल 217 गांव शामिल हैं। प्राधिकरण का मुख्य उद्देश्य सुनियोजित विकास को बढ़ावा देना और अवैध निर्माणों पर प्रभावी रोक लगाना है।
अब सिर्फ बयानबाजी नहीं, सख्त कार्रवाई का वक्त
बीडीए सचिव की तरफ से बयान तो आ गया है कि “25 दिन बाद ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी”। लेकिन जनता अब आश्वासनों से ऊब चुकी है। अगर महायोजना-2031 के अनुरूप नियंत्रित और व्यवस्थित बस्ती शहर का निर्माण करना है, तो प्राधिकरण को सिर्फ ‘नोटिस भेजने की औपचारिकता’ से बाहर निकलकर जमीन पर कठोर और निष्पक्ष कार्रवाई करनी ही होगी।
अनियोजित विकास से होती है आम नागरिकों को परेशानी
जानकारों का कहना है कि बिना किसी वैध नक्शे और लेआउट के मनमाने तरीके से कॉलोनियां विकसित किए जाने से भविष्य में कई तरह की गंभीर समस्याएं पैदा हो जाती हैं। कॉलोनियां बसने के बाद वहां सड़क, पेयजल और बिजली जैसी बुनियादी नागरिक सुविधाएं मुहैया कराने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, और अंततः इसका खामियाजा उन आम नागरिकों को भुगतना पड़ता है जो अपनी गाढ़ी कमाई इन भूखंडों में लगाते हैं।डेवलपर्स मनमाने तरीके से बिना सड़क, बिना नाली, बिना पानी और बिजली के इंफ्रास्ट्रक्चर के कॉलोनियां काटकर मुनाफा कमाकर निकल जाते हैं। बाद में जब प्राधिकरण की कार्रवाई की तलवार लटकती है या बुनियादी सुविधाओं की कमी होती है, तो भुगतना आम जनता को पड़ता है, जिन्होंने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई उन भूखंडों में लगा दी होती है।
बीडीए ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि तय समय-सीमा के भीतर निर्माण कार्यों को वैध नहीं कराया गया, तो सख्त ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी।
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