एआई अगले पांच साल में तकनीक की दुनिया में लाएगा बड़ा बदलाव : शेखावत

जोधपुर : केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा कि अगले पांच वर्षों में तकनीक के क्षेत्र में पिछले एक दशक की तुलना में हजार गुना अधिक बदलाव हो सकते हैं। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) चिकित्सा क्षेत्र सहित मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को प्रभावित करेगा।
ऐसे में तकनीक के इस्तेमाल का उद्देश्य मानव जीवन को बेहतर बनाना और चिकित्सा सेवाओं को समाज के हर वर्ग तक पहुंचाना होना चाहिए। डॉ.
एसएन मेडिकल कॉलेज में आयोजित एआई इनोवेशन मेडिकल हैकाथॉन के शुभारंभ के अवसर पर शेखावत ने कहा कि तकनीक जिस तेजी से विकसित हो रही है, उससे आने वाले समय में चिकित्सा क्षेत्र में भी व्यापक बदलाव देखने को मिलेंगे। जरूरी है कि इन तकनीकों का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, अपितु दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को भी मिले।
मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ बी एस जोधा, अतिरिक्त प्राचार्य डॉ फतेह सिंह भाटी सहित अनेक गणमान्य जन उपस्थित रहे। केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि मानव सभ्यता के विकास में अग्नि की खोज और खेती की शुरुआत ने बड़े बदलाव किए।
हजारों वर्षों में हुए परिवर्तनों की तुलना में पिछली एक शताब्दी में अधिक बदलाव देखने को मिले। वहीं, पिछले दस वर्षों में तकनीकी विकास की गति और तेज हुई है।
आने वाले पांच वर्षों में यह बदलाव और व्यापक हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि कंप्यूटर, इंटरनेट और मोबाइल फोन के आगमन के समय भी रोजगार पर इनके प्रभाव को लेकर चर्चाएं हुई थीं।
इन तकनीकों ने मानव क्षमताओं को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी तरह एआई भी काम करने के तरीकों और मानव जीवन को प्रभावित करेगा।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल से डेटा का विश्लेषण करने और उसका उपयोग करने की क्षमता बढ़ सकती है। डॉक्टर बनने के लिए वर्षों तक शिक्षा, प्रशिक्षण और रेजिडेंसी के दौरान ज्ञान अर्जित करना पड़ता है।
इसके विपरीत, एआई बहुत कम समय में बड़ी मात्रा में डेटा का विश्लेषण कर सकता है। इससे चिकित्सा क्षेत्र में नई संभावनाएं पैदा होंगी।
उन्होंने कहा कि इस तकनीक का उपयोग किस तरह मरीजों के लिए बेहतर और सुलभ स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में किया जा सकता है, इस पर विचार करना जरूरी है। शेखावत ने एलन मस्क के एक साक्षात्कार का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य में तकनीकी विकास मानव जीवन की बुनियादी जरूरतों और आर्थिक व्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है।
इसलिए तकनीक के विकास के साथ यह सुनिश्चित करना होगा कि उसका उपयोग लोगों के जीवन को अधिक सुविधाजनक बनाने में हो।उन्होंने कहा कि एआई के साथ क्वांटम कंप्यूटिंग का विकास भी भविष्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे ऐसी जटिल समस्याओं के समाधान की संभावनाएं बढ़ेंगी, जिन्हें पारंपरिक कंप्यूटिंग के जरिए हल करना कठिन है।
उन्होंने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में भारत अभी 60 क्यूबिट के स्तर पर काम कर रहा है, जबकि उनके अनुसार चीन 250 से 300 क्यूबिट तक पहुंच चुका है। दुनिया का लक्ष्य अगले तीन से चार वर्षों में एक हजार क्यूबिट तक पहुंचना है।
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि भारत को अपनी जरूरतों के अनुरूप तकनीक के इस्तेमाल पर विचार करना होगा। तकनीकी नवाचार का उद्देश्य केवल नई क्षमताएं विकसित करना नहीं, अपितु यह सुनिश्चित करना भी होना चाहिए कि उनका लाभ दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों तक पहुंचे।
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