शारदीय नवरात्र के छठवें दिन देवी मां कात्यायनी की पूजा की जाती है

प्यारे भाईयों बहनों इन दिनों देशभर में अश्विन मास शुक्ल पक्ष शारदीय का महोत्सव बड़े धूमधाम, श्रद्धा भक्तिभाव से मनाया जा रहा है, मंदिरों ,और देवी के पूजा पंडालों में सुबह शाम देवी के मंत्र जयकारे गुंजते हैं। इस वर्ष अश्विन शुक्ल पक्ष शारदीय नवरात्र का शुभारंभ 11 अक्टूबर से हो चुका है, और नवरात्री के पांच दिन भी गुजर चुके हैं।
कल शुक्रवार 16 अक्टूबर को अश्विन मास शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि , नवरात्रि का छठवां दिन है। शारदीय नवरात्रि के छठवें दिन षष्ठी तीथि पर देवी दुर्गा के छठवें रूप में मां कात्यायनी देवी की पूजा की जाती है।
देवी कात्यायनी का यह रूप दिव्य और चमकीला है। देवी मां कात्यायनी सिंह की सवारी करतीं हैं।
देवी मां की पूजा अर्चना से जीवन में सुख ,शांति, और समृद्धि के संयोग बनतें हैं। देवी कात्यायनी की चार भुजाएं हैं,देवी के दाहिनी ओर का ऊपर वाला हाथ सदा अभय मुद्रा में रहता है, नीचे वाला हाथ वर मुद्रा में रहता है।
देवी के बाकी ओर के हाथ में तलवार है, जिसका नाम चंद्रहास है, देवी के नीचे वाले हाथ में कमल पुष्प शोभायमान हैं। नवरात्रि की पूजा में सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए।
देवी कात्यायनी की पूजा आराधना में यदि संभव हो तो पीले या लाल रंग के वस्त्र धारण करना चाहिए । पूजा स्थल को स्वच्छ कर गंगाजल से शुद्ध कर लेना चाहिए।
लकड़ी की एक साफ चौकी पर पीला, या लाल रंग का स्वच्छ वस्त्र बिछाकर उसमें देवी की मूर्ति या कोई तस्वीर स्थापित करना चाहिए, सर्वप्रथम कलश की पूजा अर्चना करनी चाहिए, फिर देवी को नवीन वस्त्र अर्पित करने चाहिए । देवी मां के समक्ष देसी गाय का शुद्ध घी का दीपक प्रज्वलित करना चाहिए, देवी मां को रोली, चंदन, अक्षत, पुष्प माला अर्पित करना चाहिए।
पान के साफ पत्ते पर शुद्ध शहद रखकर, बताशे ,और लौंग का भोग प्रसाद अर्पित करना चाहिए, फिर देवी मां की कथा का पाठ करना या सुनना चाहिए । पूजा के अंत में कपूर और दीपक प्रज्वलित विधि अनुसार देवी मां की आरती पूजन करनी चाहिए ।
पूजा के दौरान परिवार सहित देवी मां के जयकारे लगाने चाहिए।देवी मां कात्यायनी की पूजा के दौरान देवी को पीले रंग की मिठाई का भोग प्रसाद अर्पित करना शुभ होता है। संभव हो सके तो बेसन का बना हलुआ, पीले रंग की बर्फी भी देवी को भोग प्रसाद में अर्पित कर सकतें हैं।
पूजा समाप्त होने पर प्रसाद स्वयं भी लें और घर परिवार में सबको बांटें।.मान्यतानुसार देवी कात्यायनी की पूजा आराधना से विवाह संबंधी बाधाएं दूर होतीं हैं। देवी मां शक्ति सौन्दर्य, ज्ञान की देवी हैं, इनकी पूजा वंदना से आत्मविश्वास, बढ़ता है, सुख समृद्धि आती है।
देवी मां के मंत्र =: देवी कात्यायन्यै नम:। स्तुति=: या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। देवी वंदना=: कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरी, नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरू ते नम:।।
चतुर्भुजा सिंहस्था खड्गशूूवराायकरा । कात्यायनी महामाया चंद्रार्धकृतशेखरा ।
। देवी मां कात्यायनी आज्ञा चक्र को जागृत करने वाली देवी हैं।
" हे कात्यायनी देवी मां आप भक्ति, शक्ति, न्याय की प्रतीक है, देवी मां कृपया सभी बाधाएं, कष्ट दूर कर , सबकी मनोकामनाएं पूर्ण किजिए।।" शारदीय नवरात्रि का यह छठवां दिन षष्ठी तिथि शक्ति, साहस, न्याय का प्रतीक दिन है, इस दिन देवी मां कात्यायनी की संपूर्ण पूजा विधि का पालन करने से जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होतीं हैं, आत्मविश्वास बढ़ता है, । आईए हम सब मिलकर देवी मां की वंदना ,आराधना करें, और अपने जीवन को सफल बनाएं।
।। जय माता दी ।।
स्वस्थ रहें, प्रसन्नचित्त रहें, ।। .
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धन्यवाद। ।
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