बुराई पर अच्छाई की जीत, अधर्म पर धर्म की जीत का त्योहार है ,विजयादशमी दशहरा

अधर्म पर धर्म की जीत और बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक, पावन पर्व है विजयादशमी दशहरा। विजयादशमी दशहरा पर बुराई को खत्म करने के स्वरूप में रावण के पुतले का दहन भी किया जाता है।
विजयादशमी, रावण रूपी बुराई, अधर्म पर श्रीराम रूपी अच्छाई, धर्म की जीत का पर्व है । इस वर्ष 2026 में विजयादशमी दशहरा पर्व देश के अधिकतर हिस्सों में मंगलवार 20 अक्टूबर को मनाई जायेगी।.
विजयादशमी दशहरा का यह त्योहार प्रतिवर्ष अश्विन मास शुक्ल दशमी तिथी नवरात्रि के समापन के समय मनाया जाता है। विजयादशमी दशहरा के दिन विजय मूहुर्त में पूजा ध्यान करना विशेष रूप से फलदायी माना जाता है।
ऐसा माना जाता है कि विजयादशमी पर शुरू किये गए कार्यों में सफलता जरूर मिलती है। शारदीय नवरात्रि के आखिरी दिन विजयादशमी दशहरा पर प्रभू श्रीराम, देवी मां दुर्गा, पूजा के साथ साथ अस्त्र शस्त्रों की भी पूजा की परंपरा रही है।
दशहरा पर रावण पुतला दहन का विशेष महत्व रहता है, यह प्रभू श्रीरामचंद्र जी की अधर्म रूपी रावण पर विजय का स्मरण करता है। विजयादशमी दशहरा के दिन प्रातःकाल स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए, और अपने घर के पूजा स्थल की साफ-सफाई भी करनी चाहिए।.इस दिन प्रभू श्रीरामचंद्र जी और देवी मां दुर्गा जी का ध्यान चिंतन मनन करना चाहिए।
दशहरा के दिन शमी के पेड़ ,अपराजिता और शस्त्रों की भी पूजा करने की धार्मिक परंपरा है। पूजा ध्यान के दौरान भगवान को फल,फूल, मिष्ठान अपनी श्रद्धा भक्ति अनुसार अन्य सामग्री भी अर्पित कर सकतें हैं।
दशहरा पर शमी के पेड़ के समक्ष दीपक प्रज्वलित कर पूजा वंदना की जाती है, और अपने घर परिवार के लिए सुख समृद्धि की कामना की जाती है। विजयादशमी दशहरा त्योहार मनाने के पीछे दो प्रमुख धार्मिक मान्यताएं है= पहला- त्रेतायुग में प्रभू श्रीरामचंद्र जी ने लंकापति राक्षसराज रावण का वध करके देवी माता सीता को बंधन मुक्त करवाया था, और इसी की याद में प्रतिवर्ष रावण के पुतले का दहन भी किया जाता है।
एक दूसरी मान्यता है कि देवी दुर्गा मां महिषासुर नामक असुर का वध करके देवताओं और समस्त संसार को महिषासुर के अत्याचारों से मुक्ति दिलवाई थी, इसलिए भी विजयादशमी को शक्ति और धर्म की विजय का प्रतीक मानते हैं। विजयादशमी दशहरा को बहुत ही शुभ महत्वपूर्ण पर्व माना जाता है।
इस दिन कई लोग नये वाहन खरीदते है, नये कार्यों की शुरुआत भी करतें हैं। हमारे भारतदेश की संस्कृति में पर्वों त्योहारों का बहुत महत्व रहता है।
हमारे यह पर्व त्योहार हमारे समाज और परिवार की एकता को भी प्रदर्शित करतें हैं। नवरात्रि और विजयादशमी दशहरा भी हमारे देश में मनाए जाने वाले त्योहारों मे से एक महत्वपूर्ण त्योहार है।
यह विजयादशमी दशहरा पर्व सबकी आस्थाओं को एक समान आदर करने ,वसुधैव कुटुंबकम की भावना वाली भारतीय संस्कृति का ही एक महत्वपूर्ण अंग है। विजयादशमी का यह त्योहार पूरे भारतवर्ष में बड़े उत्साह, उमंग, आपसी भाईचारे, प्रेम के साथ मनाया जाता है।.हमारे भारतदेश में विभिन्न संस्कृतियां होने के बावजूद भी यह किसी भी पर्व त्योहार को प्रभावित नहीं करतीं हैं।
विजयादशमी दशहरा का यह पर्व हमें यह संदेश देता है कि क्रोध, लालच,अहंकार दंभ आदि मानव जीवन के सबसे बड़े शत्रु हैं ,इनका त्याग करना ही मानव जीवन की सबसे बड़ी जीत भी है। विजयादशमी दशहरा पर्व हमें यह भी बताता है कि सत्य का मार्ग चाहे जितना भी मुश्किलों भरा हो, आखिर अंत में जीत सत्य की ही होती है।
दशहरा पर रावण पुतला दहन केवल एक रस्म ही नहीं ,बल्कि यह हमारे अंदर की बुराई, काम ,क्रोध, लोभ, अहंकार, आदि को खत्म करने का संकल्प का संकल्प लेने का भी दिन होता है।.विजयादशमी के दिन पूजा पंडालों में स्थापित किए गए दुर्गा मां की प्रतिमा का विसर्जन भी किया जाता है। दशहरा पर्व हमें यह भी सिखाता है कि हमारे अंदर श्री राम भी हैं और और रावण भी।
हमें अपने अंदर के रावण रूपी बुराई को खत्म करके श्रीराम रूपी अच्छाई को ही धारण करना चाहिए। विजयादशमी दशहरा केवल एक बाहरी उत्सव ही नहीं है, बल्कि यह एक आध्यात्मिक जागरण भी है,जो हमें अच्छाई, सत्य, प्रेम, न्याय, धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
विजयादशमी दशहरा पर.हमें अपने समाज, हमारे देश मे फैली हुई नफरत, हिंसा, अन्याय, भ्रष्टाचार, जैसी बुराईयों को हमेशा के लिए खत्म करने का संकल्प लेना चाहिए, खत्म करना भी चाहिए, तभी कहीं सही मायनों में विजयादशमी दशहरा पर्व का सही मतलब सार्थक होगा।.
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