ध्रुव त्रिपाठी की एकतरफा बढ़त, पर दूसरे नंबर की जंग और प्रथम वरीयता का कोटा बना सबसे बड़ा सस्पेंस

गोरखपुर-फैजाबाद शिक्षक निर्वाचन: ध्रुव त्रिपाठी की एकतरफा बढ़त, पर दूसरे नंबर की जंग और प्रथम वरीयता का कोटा बना सबसे बड़ा सस्पेंस
महराजगंज /उत्तर प्रदेश। गोरखपुर-फैजाबाद खंड शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सभी 17 जनपदों—गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज, बस्ती, संतकबीरनगर, सिद्धार्थनगर, अयोध्या, अंबेडकरनगर, सुल्तानपुर, अमेठी, बहराइच, श्रावस्ती, गोंडा, बलरामपुर, मऊ और आजमगढ़—में मतदान संपन्न होने के बाद चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो चुकी है।
प्राथमिक रुझानों से यह स्पष्ट है कि वर्तमान एमएलसी ध्रुव कुमार त्रिपाठी अपने सुदृढ़ सांगठनिक ढांचे, दीर्घकालिक संपर्कों और व्यापक प्रभाव के दम पर सभी जिलों में निर्णायक बढ़त बनाए हुए हैं। मैदान में उतरे बाकी सभी प्रत्याशियों की सीधी लड़ाई ध्रुव कुमार त्रिपाठी से ही है, लेकिन दूसरे और तीसरे स्थान की होड़ पूरी तरह उलझी हुई नजर आ रही है।
दूसरे स्थान के लिए मची इस खींचतान का मुख्य कारण प्रत्याशियों का जिलावार और संवर्गवार बंटा हुआ जनाधार है। पिछले चुनाव में उपविजेता रहे वित्तविहीन शिक्षक महासभा के अजय सिंह आजमगढ़ और मऊ जैसे बड़े शिक्षक मतदाता वाले जनपदों में वित्तविहीन शिक्षकों के दम पर मजबूती से दूसरे नंबर पर उभर रहे हैं।
वहीं, समाजवादी पार्टी समर्थित डॉ. संजयन त्रिपाठी अंबेडकरनगर, अयोध्या और बस्ती क्षेत्र में दलीय संगठन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों के प्रभाव और उच्च व निजी शिक्षण संस्थानों के शिक्षकों के बूते दूसरे स्थान की दौड़ को कड़ा बना रहे हैं।
इसके साथ ही, माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के राजीव यादव पुरानी पेंशन बहाली (OPS) के मुद्दे पर कुशीनगर, अंबेडकरनगर, देवरिया और संतकबीरनगर के युवा और एडेड माध्यमिक शिक्षकों के बीच पैठ बनाकर कई बूथों पर मतों का बड़ा हिस्सा अपने पक्ष में खींचते दिख रहे हैं। मतदान के बाद शिक्षक समाज में यह बात लगभग तय मानी जा रही है कि ध्रुव कुमार त्रिपाठी चौथी बार विधान परिषद की दहलीज पार करने जा रहे हैं।
अब मतगणना के दिन सबसे बड़ा कौतूहल सिर्फ दो बिंदुओं पर टिका रहेगा—पहला यह कि 17 जिलों के कुल मतों के जोड़ में उपविजेता का तमगा किसे मिलता है, और दूसरा सबसे अहम सवाल यह कि क्या ध्रुव कुमार त्रिपाठी पहली ही वरीयता में 50 प्रतिशत से अधिक का इलेक्टोरल कोटा हासिल कर नया इतिहास रचेंगे, या फिर परिणाम के लिए द्वितीय वरीयता के मतों की गिनती का सहारा लेना पड़ेगा।
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