शाह के हरियाणा दौरे से दो दिन पहले 3 नवंबर को होगी सैनी मंत्रिमंडल की बैठक, निवेश प्रस्तावों पर बन सकती है रणनीति

Sandeep Sharma District Reporter Kurukshetra Haryana
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के हरियाणा दौरे से ठीक दो दिन पहले मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने मंत्रिमंडल की बैठक बुलाई है। 3 नवंबर को हरियाणा सिविल सचिवालय में मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक को राजनीतिक और प्रशासनिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। मुख्य सचिव की ओर से शनिवार को बैठक के संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी कर दी गई है। हालांकि, अभी तक बैठक का विस्तृत एजेंडा सामने नहीं आया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि मंत्रिमंडल के समक्ष किन प्रस्तावों को अंतिम मंजूरी के लिए रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी हाल ही में गुजरात के दो दिवसीय दौरे से लौटे हैं। इस दौरे के दौरान उन्होंने हरियाणा में निवेश की संभावनाओं को लेकर उद्योगपतियों, निवेशकों और प्रवासी भारतीयों के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें की थीं। दौरे में करीब 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्तावों का उल्लेख किया गया था। ऐसे में 3 नवंबर की कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों को आगे बढ़ाने और उन्हें जमीन पर उतारने के लिए रणनीति तैयार किए जाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
गुजरात दौरे के दौरान मिले निवेश प्रस्ताव हरियाणा सरकार के लिए आर्थिक और औद्योगिक विकास के लिहाज से अहम हैं। अब सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन प्रस्तावों को वास्तविक निवेश में बदलने की होगी। इसके लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर तालमेल, निवेशकों को समयबद्ध सुविधाएं उपलब्ध करवाने और परियोजनाओं के क्रियान्वयन की प्रक्रिया को गति देने जैसे मुद्दे महत्वपूर्ण होंगे। यदि बैठक में इस विषय पर चर्चा होती है तो विभिन्न विभागों को उनकी जिम्मेदारियां सौंपने की दिशा में भी पहल हो सकती है।
25 हजार करोड़ के निवेश प्रस्तावों पर सरकार की नजर
मुख्यमंत्री के गुजरात दौरे के दौरान करीब 25 हजार करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव सामने आने की जानकारी दी गई थी। इनमें कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में लगभग 1,400 करोड़ रुपये तथा सेमीकंडक्टर क्षेत्र में करीब 2,900 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव शामिल बताए गए। इसके अलावा दौरे के पहले दिन निवेशकों के साथ लगभग 12 हजार करोड़ रुपये के समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए जाने की जानकारी भी सामने आई थी।
इन प्रस्तावों के माध्यम से हरियाणा को औद्योगिक निवेश के नए केंद्र के रूप में स्थापित करने की सरकार की कोशिशों को बल मिलने की उम्मीद है। विशेष रूप से सेमीकंडक्टर, कृषि आधारित उद्योग और खाद्य प्रसंस्करण जैसे क्षेत्रों में निवेश से रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं। साथ ही प्रदेश के युवाओं के लिए कौशल विकास और तकनीकी क्षेत्र में रोजगार की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।
हालांकि, एमओयू पर हस्ताक्षर होना निवेश परियोजना के पूरी तरह स्थापित होने की गारंटी नहीं है। इसके लिए निवेशकों की आवश्यकताओं, जमीन, बुनियादी सुविधाओं, विभागीय मंजूरियों और अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करना होगा। इसलिए कैबिनेट बैठक में इन प्रस्तावों पर चर्चा होने की स्थिति में सरकार का अगला कदम काफी महत्वपूर्ण होगा।
अमित शाह के दौरे से पहले सियासी हलचल पर भी नजर
3 नवंबर की कैबिनेट बैठक का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है, क्योंकि इसके ठीक दो दिन बाद 5 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह हरियाणा के दौरे पर आ रहे हैं। प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार अमित शाह करनाल में भाजपा की 'प्रजातंत्र बचाओ, अराजकता हटाओ' पदयात्रा में शामिल होंगे। इसके बाद वह अंबाला में विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लेंगे। अंबाला में करीब तीन दशक के इंतजार के बाद तैयार हुए ऐतिहासिक शहीद स्मारक को जनता को समर्पित करने का कार्यक्रम भी उनके दौरे का प्रमुख हिस्सा है।
ऐसे में शाह के दौरे से पहले होने वाली कैबिनेट बैठक पर राजनीतिक हलकों की निगाहें रहेंगी। एक ओर मुख्यमंत्री गुजरात दौरे से निवेश के बड़े प्रस्ताव लेकर लौटे हैं, वहीं दूसरी ओर केंद्रीय गृह मंत्री का दौरा प्रदेश की राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
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