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Khargone (West Nimar)

पाडल्या खुर्द में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, लकड़ी डिपो की जमीन पर चला बुलडोजर; पुश्तैनी जमीन का दावा करने वाले दिनेश कर्मा

01 Nov 2026, 12:55 PM • Vande Bharat Live TV News
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पाडल्या खुर्द में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, लकड़ी डिपो की जमीन पर चला बुलडोजर; पुश्तैनी जमीन का दावा करने वाले दिनेश कर्मा - खरगोन (पश्चिम निमाड़), मध्य प्रदेश

पाडल्या खुर्द में वन विभाग की बड़ी कार्रवाई, लकड़ी डिपो की जमीन पर चला बुलडोजर; पुश्तैनी जमीन का दावा करने वाले दिनेश कर्मा

मंडलेश्वर सब डिवीजन के अंतर्गत पाडल्या खुर्द में वन विभाग के लकड़ी डिपो की शासकीय जमीन को लेकर विवाद सामने आया है।

खरगोन जिले के पाडल्या खुर्द में वन विभाग की लकड़ी डिपो वाली जमीन पर जिला टास्क फोर्स की बैठक में दिए गए निर्देशों के बाद प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। वन विभाग के अनुसार संबंधित जमीन शासकीय है, जबकि दिनेश पिता ओंकार कर्मा इसे अपनी पुश्तैनी जमीन बता रहे हैं।

जानकारी के अनुसार दिनेश कर्मा ने उक्त भूमि पर लोहे के एंगल लगाकर टीनशेड की झोपड़ी बनाई थी और अन्य सामान भी रख रखा था। जिला टास्क फोर्स की बैठक में अतिक्रमण हटाने के निर्देश दिए जाने के बाद मंडलेश्वर राजस्व विभाग, तहसीलदार एवं प्रशासनिक टीम, पुलिस विभाग और वन विभाग के सैकड़ों कर्मचारियों की मौजूदगी में बुलडोजर कार्रवाई की गई। प्रशासन ने डिपो की भूमि से कब्जा हटाकर उसे अपने अधीन लिया।

कार्रवाई के दौरान दिनेश कर्मा और उनके परिवार की ओर से विरोध दर्ज कराया गया। पुलिस प्रशासन ने स्थिति बिगड़ने से पहले दिनेश कर्मा सहित चार अन्य लोगों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उन्हें वहां से हटाए

वन विभाग का पक्ष:

वन मंडलाधिकारी कृष्णपाल नेनामा के अनुसार इस जमीन पर पिछले करीब 40 वर्षों से वन विभाग पाडल्या खुर्द का लकड़ी डिपो संचालित है। उन्होंने बताया कि जमीन को लेकर मामला न्यायालय में विचाराधीन है। वन विभाग की ओर से संबंधित पक्ष को नोटिस भी दिए गए थे, लेकिन सुनवाई नहीं होने के बाद आज भूमि से कब्जा हटाने की कार्रवाई की गई।

दिनेश कर्मा का पक्ष:

वहीं दिनेश पिता ओंकार कर्मा का दावा है कि लकड़ी डिपो वाली जमीन उनकी पुश्तैनी संपत्ति है। उनका कहना है कि वन विभाग के पास इस जमीन को शासकीय साबित करने के पर्याप्त दस्तावेज नहीं हैं।

अब बड़ा सवाल यह है कि लकड़ी डिपो की जमीन के वास्तविक स्वामित्व से जुड़े राजस्व और वन विभाग के दस्तावेज क्या कहते हैं? मामला न्यायालय में विचाराधीन है, ऐसे में अंतिम स्थिति न्यायालय के निर्णय और उपलब्ध राजस्व अभिलेखों से ही स्पष्ट होगी।

फिलहाल प्रशासनिक कार्रवाई के बाद यह जमीन एक बार फिर चर्चा में है। दोनों पक्षों के दावों और दस्तावेजों पर सबकी नजर बनी हुई है।

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