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बकाया बिजली बिल के कारण बंद न हो नल जल योजनाएं, कलेक्टर ने दिए कड़े निर्देश

FB IMG 1779455663376सागर। वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी,8225072664* ग्रामीण क्षेत्रों में गर्मी के मौसम में सुचारू पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं। कलेक्टर ने कहा है कि बिजली बिल के भुगतान के अभाव में किसी भी स्थिति में नल-जल योजनाएं बंद नहीं होनी चाहिए और न ही ग्रामीणों की पेयजल आपूर्ति प्रभावित होनी चाहिए। कलेक्टर ने रहली जनपद पंचायत के अंतर्गत विद्युत संकट या बिल बकाया होने के कारण बंद पड़ी नल-जल योजनाओं, पानी का सोर्स ना होने के कारण बंद पड़ी योजनाओं, लीकेज या ओवरफ्लो की समस्या सहित योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि पानी जैसी बुनियादी सुविधा में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ग्राम पंचायतों को सौंपी जिम्मेदारी, जनपद सीईओ करेंगे लगातार मॉनिटरिंग समीक्षा बैठक में कलेक्टर श्रीमती प्रतिभा पाल ने नल-जल योजनाओं के सुचारू संचालन के लिए ग्राम पंचायतों की जवाबदेही तय की गई है। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि सभी ग्राम पंचायतें अपने-अपने क्षेत्र की नल-जल योजनाओं की सतत मॉनिटरिंग करेंगी। हैंडओवर हो चुकी योजनाओं के संबंध में पानी की सप्लाई नियमित हो और तकनीकी कमियों को तुरंत दूर करना, यह सुनिश्चित करना पंचायत की जिम्मेदारी होगी। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी केवल दफ्तर में कार्य ने करें बल्कि लगातार मैदानी स्तर पर निरीक्षण करें। बंद पड़ी योजनाओं को चालू कराने के लिए बिजली कंपनी और पंचायत के बीच समन्वय स्थापित कर तुरंत समाधान निकालें। उन्होंने एमपीईबी सीई को भी निर्देशित किया कि किसी भी स्थिति में नल जल योजनाओं के कनेक्शन ना काटे जाएं तथापि संबंधित जनपद सीईओ, पीएचई विभाग से संपर्क और समन्वय के साथ कार्य किया जाए। जनपद सीईओ भी यह सुनिश्चित करेंगे के बकाया बिलों के भुगतान तत्काल किए जाएं। कलेक्टर ने समीक्षा के दौरान कहा कि बिजली बिल का विवाद या प्रशासनिक औपचारिकताएं अपनी जगह हैं, लेकिन इसकी प्रभाव ग्रामीणों पर न पड़े। उन्होंने कहा कि विभिन्न कारणों से रहली जनपद की सुचारू रूप से न चल पा रही नल-जल योजनाओं का तत्काल परीक्षण कर उन्हें जल्द शुरू करें। जहां पानी का सोर्स नहीं है वहां वैकल्पिक व्यवस्था करें जहां सोर्स में पानी मुहैया कराया जा सकता है वहां पानी पहुंचाएं।

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