
सागर। वंदे भारत लाइव टीवी न्यूज रिपोर्टर सुशील द्विवेदी,8225072664*इंदौर में सामने आए बहुचर्चित हनी ट्रैप पार्ट-2 मामले ने अब राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। मामले में अब तक सात गिरफ्तारियां हो चुकी हैं और जांच एजेंसियां इसे केवल ब्लैकमेलिंग नहीं बल्कि प्रभावशाली लोगों तक पहुंच बनाने वाले संगठित नेटवर्क के रूप में देख रही हैं। गुरुवार देर शाम रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी और इंटेलीजेंस के हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा को कड़ी गोपनीयता के बीच कोर्ट में पेश किया गया, जहां से सभी आरोपियों को 25 मई तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया। सूत्रों के मुताबिक जांच एजेंसियों का फोकस अब उन कथित वीडियो और संपर्कों पर है, जिनके जरिए रसूखदार लोगों को ब्लैकमेल किए जाने की आशंका जताई जा रही है। शुरुआती शिकायत एक करोड़ रुपये की कथित उगाही को लेकर सामने आई थी, लेकिन जांच आगे बढ़ने के साथ इसमें कई नए नाम जुड़ते गए। पहले लेडी तस्कर अलका दीक्षित, उसका बेटा जयदीप दीक्षित, करीबी लाखन चौधरी और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी हुई। इसके बाद देवास के जितेंद्र पुरोहित और फिर श्वेता विजय जैन की गिरफ्तारी हुई। पूछताछ में सामने आए संपर्कों के आधार पर इंटेलीजेंस के हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा और बाद में सागर निवासी रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी को भी आरोपी बनाया गया। पूरे मामले में सबसे ज्यादा चर्चा अब रेशू चौधरी को लेकर हो रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि उसके पास कई प्रभावशाली लोगों से जुड़े संवेदनशील वीडियो और जानकारी हो सकती है। इसी वजह से पिछले दो दिनों तक उससे गोपनीय पूछताछ किए जाने की बात सामने आ रही है। बताया जा रहा है कि 17 मई की रात प्रदेश स्तर पर बड़े पैमाने पर सीक्रेट ऑपरेशन चलाया गया था, जिसमें करीब 40 वरिष्ठ अधिकारियों की टीम को लगाया गया। इधर सागर में रेशू उर्फ अभिलाषा चौधरी का नाम सामने आने के बाद राजनीतिक और कारोबारी हलकों में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जानकारी के अनुसार उसने पहले कटरा क्षेत्र में कोचिंग संचालन से पहचान बनाई, बाद में मकरोनिया क्षेत्र में भाजपा की स्थानीय राजनीति से जुड़ी। सूत्र यह भी बता रहे हैं कि उसका संपर्क एक स्थानीय विधायक और बाद में नरयावली विधानसभा क्षेत्र से जुड़े एक कांग्रेस नेता व उनके परिवार तक रहा। हालांकि इन संबंधों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। जिले में यह चर्चा भी तेज है कि कुछ बिल्डरों, कारोबारियों और राजनीतिक चेहरों से उसके करीबी संबंध रहे हैं। इसी वजह से अब कई लोगों की निगाहें जांच एजेंसियों की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि पुलिस रिमांड के दौरान डिजिटल डिवाइस, कॉल रिकॉर्ड और वित्तीय लेनदेन की गहन पड़ताल हो सकती है, जिससे मामले में और बड़े खुलासे सामने आ सकते हैं।





