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कॉकरोच जनता पार्टी (CJP): मीम से शुरू हुआ डिजिटल आंदोलन, जिसने सोशल मीडिया पर मचा दी हलचल।

(फुरकान अंसारी)
हरिद्वार। भारतीय सोशल मीडिया और समकालीन राजनीति में इन दिनों एक अनोखा नाम तेजी से चर्चा में है -Cockroach Janta Party (CJP) यानी कॉकरोच जनता पार्टी। शुरुआत में इसे महज एक मजाक, मीम और इंटरनेट सटायर माना गया था, लेकिन देखते ही देखते यह युवाओं की नाराजगी और सिस्टम के खिलाफ डिजिटल असंतोष का बड़ा प्रतीक बन गया। राजनीतिक विश्लेषक इसे देश में उभरते “Gen-Z डिजिटल मूवमेंट” के तौर पर देख रहे हैं।
यह आंदोलन पारंपरिक राजनीति से बिल्कुल अलग है। इसमें न बड़े मंच हैं, न रैलियां और न ही सड़क पर प्रदर्शन। इसके बावजूद सोशल मीडिया पर करोड़ों युवा इससे जुड़ते दिखाई दे रहे हैं।
कैसे शुरू हुआ ‘कॉकरोच’ नाम का विवाद?
इस पूरे घटनाक्रम की जड़ देश के बेरोजगार और परेशान युवाओं के भीतर बढ़ते असंतोष से जुड़ी बताई जा रही है। सोशल मीडिया पर कुछ समय पहले यह चर्चा तेज हुई कि बेरोजगारी और अन्य मुद्दों पर प्रदर्शन कर रहे युवाओं की तुलना कथित तौर पर “कॉकरोच” से की गई थी।
आमतौर पर ऐसे मामलों में सोशल मीडिया पर गुस्सा और विरोध देखने को मिलता है, लेकिन इस बार युवाओं ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने इस शब्द को अपमान की बजाय विरोध और व्यंग्य के प्रतीक के रूप में अपना लिया। इसी सोच से “कॉकरोच जनता पार्टी” का विचार सामने आया, जिसने इंटरनेट पर तेजी से लोकप्रियता हासिल कर ली।
कौन हैं इस डिजिटल कैंपेन के पीछे?
इस डिजिटल अभियान के पीछे महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर निवासी अभिजीत डिपके का नाम सामने आया है। उन्होंने पुणे से पत्रकारिता की पढ़ाई की और बाद में अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस (PR) में मास्टर्स किया।
अभिजीत इससे पहले डिजिटल पॉलिटिकल कैंपेनिंग से भी जुड़े रहे हैं। बताया जाता है कि वे 2020 से 2023 के बीच आम आदमी पार्टी की सोशल मीडिया टीम में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। इंटरनेट ट्रेंड और युवाओं की सोच को समझने में उनकी अच्छी पकड़ मानी जाती है।
एक पोस्ट से शुरू हुआ वायरल ट्रेंड
बताया जाता है कि इस अभियान की शुरुआत अभिजीत डिपके के एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई। उन्होंने ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा —
“What if all the cockroaches come together?”
यानी “क्या हो अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?”
यह पोस्ट तेजी से वायरल हो गई। हजारों युवाओं ने इसे शेयर किया और अपने विचार व्यक्त किए। इसके बाद एक गूगल फॉर्म के जरिए प्रतीकात्मक सदस्यता अभियान शुरू किया गया, जिसे सोशल मीडिया पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली।
इंस्टाग्राम पर रिकॉर्ड स्तर की लोकप्रियता
CJP का सबसे ज्यादा असर इंस्टाग्राम पर देखने को मिला। कुछ ही दिनों में इस सटायर पेज के फॉलोअर्स करोड़ों में पहुंचने लगे। सोशल मीडिया पर दावा किया गया कि इसकी ग्रोथ स्पीड कई बड़े राजनीतिक दलों के डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से भी तेज रही।
इस डिजिटल ट्रेंड की चर्चा राजनीति के बड़े नेताओं तक भी पहुंची। कई चर्चित नेताओं और सार्वजनिक हस्तियों ने भी सोशल मीडिया पर इस पर प्रतिक्रिया दी, जिससे इसकी पहुंच और बढ़ गई।
केवल मजाक नहीं, एक प्रतीकात्मक विरोध
अभिजीत डिपके के अनुसार “कॉकरोच” नाम केवल मजाक के लिए नहीं चुना गया, बल्कि यह व्यवस्था के खिलाफ युवाओं के व्यंग्यात्मक विरोध का प्रतीक है। उनका कहना है कि यदि युवाओं की समस्याओं को लगातार नजरअंदाज किया जाएगा, तो वे नए और अलग तरीकों से अपनी बात सामने लाएंगे।
क्या डिजिटल आंदोलन राजनीति को प्रभावित करेगा?
फिलहाल CJP को इंटरनेट आधारित सटायर मूवमेंट के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन जिस तेजी से यह युवाओं के बीच लोकप्रिय हुआ है, उसने राजनीतिक और सामाजिक हलकों का ध्यान जरूर खींचा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह आंदोलन केवल मीम्स और सोशल मीडिया तक सीमित रहेगा या भविष्य में वास्तविक राजनीति पर भी असर डालेगा।(p.k.r.)

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