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कप्तानगंज का ‘उड़ता’ महाराजगंज: पुलिस की नाक के नीचे बिक रहा मौत का सामान।

कप्तानगंज: पुलिस की मिलीभगत से महाराजगंज में सज रही 'गांजे की मंडी'। बस्ती में नशे का नंगा नाच: पुलिस चौकी के करीब बिक रहा है जहर। युवाओं को खोखला कर रहा गांजा माफिया, प्रशासन गहरी नींद में!

अजीत मिश्रा (खोजी)

बस्ती: कप्तानगंज पुलिस की नाक के नीचे पनप रहा नशे का ‘काला कारोबार’, महाराजगंज बना ‘गांजा मंडी’

ब्यूरो रिपोर्ट, बस्ती मंडल

  • नशे का ‘गोरखधंधा’: क्या कप्तानगंज पुलिस की शह पर बर्बाद हो रही युवाओं की पीढ़ी?
  • महाराजगंज में गांजे का ‘खुला बाजार’: पुलिस और आबकारी की मौन सहमति पर उठे सवाल।
  • खाकी की साख पर बट्टा: कप्तानगंज में रोजाना 40 हजार का गांजा बिकने की चर्चा, अफसर बेखबर!
  • आयुष्मान आरोग्य मंदिर के पास ‘नशा केंद्र’: महाराजगंज बना गांजा तस्करों का सुरक्षित ठिकाना।

कप्तानगंज, बस्ती ।। एक तरफ सरकार और पुलिस प्रशासन नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ का दावा करते नहीं थकते, वहीं दूसरी ओर बस्ती जिले के कप्तानगंज थाना क्षेत्र के महाराजगंज कस्बे में खुलेआम गांजे का अवैध कारोबार फल-फूल रहा है। स्थानीय लोगों की मानें तो महाराजगंज पुलिस चौकी से महज 200 मीटर की दूरी पर स्थित एक नया मकान अब नशाखोरों का सुरक्षित ठिकाना बन चुका है।

पुलिस चौकी से महज 200 मीटर दूर, बिक रहा ‘जहर’

​सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, सन गैस सर्विस के ठीक पीछे और तेलियाडीह स्थित आयुष्मान आरोग्य मंदिर (एएनएम सेंटर) के पास स्थित एक मकान में बेखौफ होकर गांजे की बिक्री की जा रही है। हैरानी की बात यह है कि पुलिस चौकी के इतने करीब होने के बावजूद पुलिस की नजर इस ‘अवैध मंडी’ पर क्यों नहीं पड़ रही? यह सवाल स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है।

पुलिस और आबकारी विभाग की ‘मिलीभगत’ के चर्चे

​क्षेत्र में चर्चा है कि यह सब कप्तानगंज पुलिस और आबकारी विभाग की मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। यदि स्थानीय पुलिस इस धंधे से अनभिज्ञ है, तो यह उनकी कार्यप्रणाली पर बड़ा सवालिया निशान है। वहीं, यदि पुलिस की जानकारी में यह सब हो रहा है, तो फिर उनकी ‘सक्रियता’ आखिर किसके संरक्षण के लिए है?

युवा पीढ़ी हो रही बर्बाद, रोज का कारोबार लाखों में

​मिली जानकारी के अनुसार, यहां गांजे की पुड़िया 100, 250 और 500 रुपये की कीमत पर आसानी से उपलब्ध है। इस नशे ने कस्बे और आसपास के गांवों के युवाओं को अपनी गिरफ्त में ले लिया है, जिससे उनकी बर्बादी का सिलसिला शुरू हो गया है। सूत्रों का दावा है कि इस अवैध अड्डे से रोजाना 30 से 40 हजार रुपये तक का ‘वारा-न्यारा’ होता है, जो सीधे तौर पर समाज को खोखला कर रहा है।

प्रशासन से सवाल

  • ​पुलिस चौकी से 200 मीटर की दूरी पर चल रहे इस धंधे की भनक स्थानीय पुलिस को क्यों नहीं है?
  • ​क्या कप्तानगंज पुलिस और आबकारी विभाग की मौन सहमति से ही यह नशे का व्यापार फल-फूल रहा है?
  • ​युवाओं के भविष्य को बर्बाद कर रही इस ‘गांजा मंडी’ पर जिला प्रशासन कब तक लगाम लगाएगा?

​महाराजगंज के जागरूक नागरिकों ने पुलिस के उच्चाधिकारियों से मांग की है कि इस ठिकाने पर तत्काल छापेमारी कर गांजा माफियाओं और उन्हें संरक्षण देने वाले भ्रष्ट तंत्र पर कठोर कार्रवाई की जाए।

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