संतकबीरनगर: सरकारी कार्यों में लापरवाही और आदेशों की अवहेलना पर VDO रमाकांत निलंबित।
बड़ी कार्रवाई: पौली ब्लॉक में तैनाती के दौरान बरती गई लापरवाही, जिला विकास अधिकारी ने VDO को किया सस्पेंड।
अजीत मिश्रा (खोजी)
संतकबीरनगर: लापरवाही और अनुशासनहीनता बरतने पर ग्राम विकास अधिकारी निलंबित
- संतकबीरनगर: VDO रमाकांत निलंबित, जांच के आदेश। कर्तव्य में कोताही पर गिरी गाज: ग्राम विकास अधिकारी पर निलंबन की कार्रवाई।
- राशन कार्ड में देरी और चौपाल से गायब रहना पड़ा भारी; VDO निलंबित।
- फर्जी भुगतान के दबाव और लापरवाही के आरोपों में घिरे VDO, शासन ने की निलंबन की कार्रवाई।
संतकबीरनगर। जिले के सांथा ब्लॉक में तैनात ग्राम विकास अधिकारी (VDO) रमाकांत को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। जिला विकास अधिकारी द्वारा जारी आधिकारिक आदेश में उन पर कर्तव्यों के निर्वहन में गंभीर लापरवाही, वरिष्ठ अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना और शासकीय कार्यों के प्रति उदासीनता बरतने का आरोप लगाया गया है।

क्या है पूरा मामला?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, निलंबन की यह कार्रवाई मुख्य रूप से उनके पौली ब्लॉक में तैनाती के दौरान की गई शिकायतों के आधार पर की गई है। रमाकांत पर लगे मुख्य आरोपों में शामिल हैं:
- राशन कार्ड में देरी: पौली ब्लॉक के गौवापार निवासी अरविंद सिंह की पत्नी का राशन कार्ड बनाने के लिए दिए गए आवेदन को जानबूझकर एक माह से अधिक समय तक लंबित रखना।
- चौपाल में अनुपस्थिति: प्रत्येक शुक्रवार को आयोजित होने वाली ग्राम चौपाल में अपने कर्तव्यों का सही ढंग से निर्वहन न करना।
- आदेशों की अवहेलना: उच्चाधिकारियों के निर्देशों का पालन न करना और शासकीय कार्यों में शिथिलता बरतना।
आगे की कार्रवाई
जिला विकास अधिकारी ने इस मामले में खलीलाबाद के खंड विकास अधिकारी (BDO) को जांच अधिकारी नियुक्त किया है। साथ ही, निलंबित ग्राम विकास अधिकारी को फिलहाल नाथनगर ब्लॉक से संबद्ध किया गया है। निलंबन अवधि के दौरान उन्हें वित्तीय नियमों के अनुसार जीवन निर्वाह भत्ता देय होगा, बशर्ते वे यह प्रमाण पत्र प्रस्तुत करें कि वे किसी अन्य रोजगार, व्यापार या व्यवसाय में संलग्न नहीं हैं।
फर्जी भुगतान का दबाव भी चर्चा में
विभागीय कार्रवाई के साथ-साथ, चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। सूत्रों के अनुसार, निलंबित ग्राम विकास अधिकारी रमाकांत पर सांथा ब्लॉक में कुछ प्रभावशाली लोगों द्वारा बिना कार्य पूर्ण हुए परियोजनाओं का फर्जी भुगतान करने का भारी दबाव बनाया जा रहा था, जिसके चलते वे काफी समय से तनाव में थे।
जिला विकास अधिकारी ने संबंधित अधिकारियों को 15 दिनों के भीतर इस मामले में आरोप पत्र तैयार कर अनुमोदन के लिए प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है।
















