“बस्ती का ‘राजस्व’ माफियाओं की जेब में: चकमार्ग की पैमाइश में सरेआम धांधली, अधिकारी बने मूकदर्शक”
"लालगंज में 'सरकारी' रास्ते पर दबंगों का कब्ज़ा, राजस्व टीम की मिलीभगत से कानून की उड़ी धज्जियां"
अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में ‘दबंगई’ का नंगा नाच: राजस्व विभाग की मिलीभगत से चकमार्ग पर अवैध कब्जा, प्रशासन मौन
ब्यूरो रिपोर्ट | बस्ती, उत्तर प्रदेश
- “न्याय के लिए दर-दर भटक रहे ग्रामीण: प्रशासन से सवाल—क्या दबंगों के आगे घुटने टेक चुका है लालगंज का कानून?”
- “सरकारी जमीन पर दबंगों का ‘अवैध कब्जा’: जानलेवा धमकियों के बीच दहशत में ग्रामीण, खामोश क्यों है प्रशासन?”
- “सरकारी चकमार्ग बना दबंगों की जागीर, अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध”
- “पैमाइश के नाम पर ‘खेल’: कानून को ठेंगा दिखा उखाड़े गए सीमांकन पिलर”
उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में कानून-व्यवस्था और राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर उस समय बड़ा सवाल खड़ा हो गया, जब लालगंज थाना क्षेत्र के बरहिया कला गांव में सरकारी चकमार्ग को लेकर दबंगों ने खुलेआम गुंडागर्दी की। आरोप है कि राजस्व टीम की मिलीभगत से चकमार्ग का गलत सीमांकन कर उसे अवैध तरीके से मोड़ा जा रहा है, और विरोध करने पर ग्रामीणों को जान से मारने की धमकी दी जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता श्याम चंद्र चौधरी और अन्य ग्रामीणों के अनुसार, गांव के सरकारी चकमार्ग (संख्या 238 व 244) का सीमांकन राजस्व टीम द्वारा किया गया था। आरोप है कि 21 मई 2026 को राजस्व निरीक्षकों ने प्रभावशाली लोगों के प्रभाव में आकर बिना अन्य काश्तकारों को सूचना दिए चकमार्ग का गलत तरीके से सीमांकन कर दिया। ग्रामीणों का दावा है कि इस सीमांकन से चकमार्ग को टेढ़ा कर दिया गया है ताकि अवैध कब्जाधारियों को लाभ पहुँचाया जा सके।
दबंगों के आगे प्रशासन पस्त?
हद तो तब हो गई जब गांव के ही कुछ दबंग तत्वों ने जे.सी.बी. मशीन लगाकर प्रशासन द्वारा लगाए गए सीमेंट के सीमांकन पिलरों को उखाड़ फेंका और अवैध रूप से रास्ता निकालने की कोशिश की। जब ग्रामीणों ने इसका विरोध किया, तो दबंगों ने लाठी-डंडों के साथ उन पर हमला करने की कोशिश की और जान से मारने की धमकी दी। मजबूरन ग्रामीणों को ‘डायल 112’ पर सूचना देकर काम रुकवाना पड़ा।
राजस्व विभाग की भूमिका पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों ने जिलाधिकारी को भेजे गए प्रार्थना पत्र में स्पष्ट आरोप लगाया है कि राजस्व निरीक्षकों ने शिकायतकर्ताओं के प्रभाव में आकर जानबूझकर गलत पैमाइश की है। यह एक गंभीर धांधली का मामला है, जहाँ सरकारी जमीन को निजी स्वार्थ के लिए खुर्द-बुर्द किया जा रहा है।
बड़ा सवाल
- क्या बस्ती प्रशासन इन दबंगों की जड़ें खोदने का साहस दिखाएगा?
- क्या गलत पैमाइश करने वाले राजस्व कर्मियों पर कोई कार्रवाई होगी?
- क्या गरीब किसान अपनी जमीन और सरकारी रास्ते को बचाने के लिए दर-दर की ठोकरें खाने को मजबूर रहेंगे?

अब देखना यह है कि जिलाधिकारी कार्यालय और पुलिस प्रशासन इस मामले में क्या ठोस कार्रवाई करता है, या फिर यह फाइल भी अन्य मामलों की तरह फाइलों के बोझ तले दबकर रह जाएगी। पीड़ित जनता न्याय की बाट जोह रही है।


















