बस्ती में निषाद पार्टी का ‘हुंकार’: प्रशासन की कार्यशैली पर खड़े किए तीखे सवाल

अजीत मिश्रा (खोजी)
बस्ती में ‘निषाद’ तेवर: सड़कों पर उतरा आक्रोश, प्रशासन के खिलाफ फूटा गुस्सा
- बस्ती: अवैध खनन और हत्या की जांच पर प्रशासन की चुप्पी बनी निषाद पार्टी का निशाना
- थाने में ‘सम्मान’ की जंग: नगर थाना प्रभारी व चौकी इंचार्ज के खिलाफ गरजे निषाद नेता
बस्ती: जिले की शांत दिखने वाली फिजाओं में बुधवार को निषाद पार्टी का आक्रोश उस समय सड़कों पर नजर आया, जब पार्टी के तमाम कार्यकर्ताओं ने अपनी 4 सूत्रीय मांगों को लेकर हुंकार भरी। जिलाध्यक्ष अशोक निषाद और प्रदेश महासचिव दीपू निषाद के नेतृत्व में निकला यह मार्च लालबहादुर शास्त्री चौक से शुरू होकर जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक कार्यालय तक पहुंचा, जहां कार्यकर्ताओं ने प्रशासन की कार्यशैली पर जमकर निशाना साधा।
भ्रष्टाचार और हत्या: प्रशासन की चुप्पी पर सवाल
प्रदर्शन के दौरान सबसे प्रमुख मुद्दा चंदन निषाद हत्याकांड का रहा। पार्टी नेताओं ने इस मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए प्रशासन को सीधे कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि दोषियों को बचाने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी और उन्हें तत्काल सलाखों के पीछे भेजा जाए।
वहीं, दुबौलिया क्षेत्र में चल रहे अवैध बालू खनन को लेकर भी पार्टी ने तीखे तेवर दिखाए। नेताओं ने चेतावनी दी कि अवैध खनन से गांवों के अस्तित्व पर खतरा मंडरा रहा है और कटान व बाढ़ जैसी आपदाओं के लिए सीधे तौर पर प्रशासन जिम्मेदार होगा।
‘वर्दी’ की बदसलूकी और उपेक्षा का आरोप
आक्रोश का एक बड़ा कारण पुलिसिया रवैया भी रहा। प्रदेश महासचिव दीपू निषाद ने नगर थाना प्रभारी और करहली चौकी इंचार्ज पर खुलेआम अभद्रता का आरोप लगाया। उन्होंने इन अधिकारियों को तत्काल निलंबित करने की मांग करते हुए कहा कि, “थाने में आम आदमी और कार्यकर्ताओं के साथ किया जा रहा अपमानजनक व्यवहार अब और नहीं सहा जाएगा।”
सत्ता के गलियारों में ‘सम्मान’ की लड़ाई
प्रदर्शन के दौरान निषाद पार्टी के नेताओं ने एक बड़ी चेतावनी जारी की है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि सरकारी विभागों में निषाद समाज और उनके कार्यकर्ताओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। नेताओं ने दो-टूक लहजे में कहा कि अब कार्यकर्ताओं का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
प्रदर्शन के बाद सौंपा गया ज्ञापन जिला प्रशासन के लिए एक चेतावनी है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या प्रशासन चंद घंटों की इस भीड़ को महज एक औपचारिकता मानकर शांत बैठ जाएगा, या फिर निषाद पार्टी की इन तीखी मांगों पर ठोस कार्रवाई कर स्थिति को संभालेगा।
🔔 Vande Bharat News Alerts
नई प्रमुख खबरों की browser notification पाने के लिए Subscribe करें।







