उत्तर प्रदेशबस्ती

कप्तानगंज में भ्रष्टाचार का ‘नग्न नाच’: बीडीओ के संरक्षण में फर्जीवाड़े की खुली छूट!

क्या बीडीओ साहब के लिए 'सरकारी नियमों' से ऊपर है भ्रष्टाचार? नोटिस मिलने के बाद भी बेलगाम हैं जिम्मेदार! नरहरपुर का 'जलीय घोटाला': पानी भरे तालाब में खुदाई का फर्जी मस्टर रोल, बीडीओ साहब मौन!

अजीत मिश्रा (खोजी)

भ्रष्टाचार का ‘कप्तानगंज मॉडल’: बीडीओ के संरक्षण में जेई, प्रधान और सचिव ने पार की हदें, फर्जीवाड़े पर सवाल पूछने पर बौखलाए जिम्मेदार

  • पत्रकार से ‘तू-तड़ाक’, भ्रष्टाचार पर ‘दबाव’: कप्तानगंज बीडीओ का बिगड़ैल रवैया मचा रहा शोर!
  • भ्रष्टाचार की जांच के नाम पर महज खानापूर्ति: कप्तानगंज ब्लॉक में जेई-प्रधान-सचिव की खुली लूट!

बस्ती/कप्तानगंज: केंद्र और प्रदेश सरकार के ‘भ्रष्टाचार मुक्त भारत’ के दावों की धज्जियाँ उड़ाने का काम कप्तानगंज विकास खंड में खुलेआम हो रहा है। विकास के नाम पर सरकारी धन को बंदरबांट करने का ऐसा खेल चल रहा है, जिसे देखकर स्थानीय जनता और जागरूक नागरिक भी स्तब्ध हैं। खंड विकास अधिकारी (BDO) के संरक्षण में जे.ई., ग्राम प्रधान, सचिव और रोजगार सेवकों की मिलीभगत से भ्रष्टाचार की एक ऐसी पटकथा लिखी जा रही है, जो प्रशासनिक सुचिता पर बड़ा सवाल खड़ा करती है।

तालाब में खुदाई नहीं, फर्जी मस्टर रोल की ‘मछलियाँ’ पकड़ रहे जिम्मेदार

ताजा मामला ग्राम पंचायत नरहरपुर का है। यहाँ खेल मैदान और तालाब के नाम पर न केवल सरकारी धन की लूट की गई, बल्कि भ्रष्टाचार की सीमाएं भी पार कर दी गई हैं। हैरत की बात यह है कि जिन तालाबों में पानी भरा हुआ है, कागजों पर वहां भी खुदाई दिखाकर फर्जी मस्टर रोल जारी किए जा रहे हैं। पूर्व में इस भ्रष्टाचार की शिकायत पर उच्च अधिकारियों ने नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण मांगा था, लेकिन बीडीओ और उनके मातहत कर्मचारी शायद उच्चाधिकारियों को भी जवाबदेह नहीं समझते। जांच के बाद भी उसी स्थान पर दोबारा फर्जी मस्टर रोल जारी करना यह साबित करता है कि इन्हें किसी का भी डर नहीं है।

पत्रकार से तू-तड़ाक पर क्यों उतरे बीडीओ?

जब मीडिया टीम ने प्रशासनिक स्तर पर हो रही इस धांधली और उच्चाधिकारियों के नोटिस पर हुई कार्रवाई के बारे में जानकारी लेनी चाही, तो कप्तानगंज बीडीओ का लहजा असहज करने वाला था। भ्रष्टाचार पर जवाब देने के बजाय, बीडीओ साहब ‘तू-तड़ाक’ पर उतारू हो गए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उन्हें किसी भी जवाबदेही से कोई लेना-देना नहीं है। सवाल यह है कि क्या विकास खंड कार्यालय भ्रष्टाचार का ऐसा सुरक्षित गढ़ बन चुका है जहां सवाल पूछना भी गुनाह है?

उच्च अधिकारियों की भूमिका पर सवाल

भ्रष्टाचार की खबरें पिछले 15 दिनों से प्रमुखता से उजागर होने के बावजूद कोई ठोस कार्रवाई न होना, इस पूरे तंत्र की मिलीभगत की ओर इशारा करता है। सेवाकाल के अंतिम दौर में चल रहे बीडीओ की यह कार्यशैली न केवल सरकारी धन का नुकसान कर रही है, बल्कि शासन की छवि को भी धूमिल कर रही है।

​अब बस्ती जनपद के आला अधिकारियों के सामने यह यक्ष प्रश्न है कि क्या वे इस भ्रष्टाचार के दलदल में फंसे खंड विकास अधिकारी और उनके सहयोगियों पर सख्त कार्रवाई करेंगे, या फिर ‘लेन-देन’ के खेल में मामले को रफा-दफा कर दिया जाएगा? जिले की जनता अब न्याय और पारदर्शी कार्रवाई का इंतजार कर रही है।

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