उत्तर प्रदेशबस्ती

खाकी की लापरवाही से गई जान: बस्ती में हत्या मामले पर चौकी प्रभारी और सिपाही निलंबित

अपराधियों को संरक्षण या वर्दी का अहंकार? बस्ती में दो पुलिसकर्मी सस्पेंड लालगंज हत्याकांड: समय रहते जागती पुलिस तो बच जाती जान, चौकी प्रभारी समेत दो निलंबित

अजीत मिश्रा (खोजी)

लापरवाही पड़ी भारी: बस्ती में हत्या मामले में चौकी प्रभारी और सिपाही निलंबित, खाकी पर बड़ा सवाल

  • बस्ती पुलिस का ‘बीट’ फेल, हत्या के मामले में चौकी प्रभारी पर गिरी गाज
  • निगरानी में कोताही, जिम्मेदारी में शिथिलता: बस्ती में वर्दी पर लगा ‘दाग’
  • क्या वर्दी ही बन गई अपराधियों की ढाल? बस्ती में पुलिस की बड़ी कार्रवाई से हड़कंप

बस्ती, 25 जून 2026।

उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर अक्सर उठने वाले सवालों के बीच, बस्ती पुलिस अधीक्षक द्वारा की गई एक त्वरित कार्रवाई ने महकमे में हड़कंप मचा दिया है। लालगंज थाना क्षेत्र के रखौना चौकी अंतर्गत हुए एक जघन्य हत्याकांड में सामने आई गंभीर लापरवाही के बाद पुलिस अधीक्षक ने चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक बृजमोहन सिंह और आरक्षी अमरजीत यादव को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।

क्या है पूरा मामला?

​मामला 23 जून 2026 को लालगंज थाने में दर्ज हत्या और मारपीट (मुकदमा अपराध संख्या 169/2026) से जुड़ा है। इस मामले में पुलिस ने सुधाकर पाल और सौरभ पाल को तो गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, लेकिन जांच की आंच ने पुलिस के भीतर ही छिपी ‘मिलीभगत और सुस्ती’ को उजागर कर दिया है।

​जांच में यह स्पष्ट हुआ कि जिस समय इलाके में विवाद और मारपीट का तांडव चल रहा था, उस समय रखौना चौकी प्रभारी बृजमोहन सिंह और बीट प्रभारी (BPO) आरक्षी अमरजीत यादव अपनी जिम्मेदारी से कोसों दूर थे। न तो कोई निरोधात्मक कार्रवाई की गई और न ही बीट ऐप पर समय रहते कोई सूचना अंकित की गई।

‘निलंबन’ ही काफी या व्यवस्था में सुधार?

​सवाल यह उठता है कि क्या पुलिस की यह ‘सुस्ती’ महज लापरवाही है या किसी बड़े गठजोड़ का हिस्सा? अक्सर स्थानीय पुलिस चौकियों पर तैनात पुलिसकर्मियों की बेपरवाही का खामियाजा आम जनता को अपनी जान देकर भुगतना पड़ता है। अगर रखौना चौकी की पुलिस ने समय रहते ठोस कदम उठाए होते, तो शायद यह हत्या का मामला ही नहीं बनता।

पुलिस अधीक्षक का कड़ा संदेश

​पुलिस अधीक्षक ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए नियमावली-1991 के तहत तत्काल निलंबन और विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। यह कार्रवाई उन पुलिसकर्मियों के लिए एक सबक है जो ‘बीट सूचना’ को केवल कागजी खानापूर्ति समझते हैं।

आम जनता का सवाल:

पुलिस महकमे में निलंबन की यह कार्रवाई तो एक औपचारिकता है, लेकिन क्या विभागीय जांच के बाद दोषी पुलिसकर्मियों को सेवा से बर्खास्त किया जाएगा? या फिर कुछ समय बाद ये वर्दीधारी किसी दूसरे थाने में तैनात होकर पुनः अपनी मनमानी शुरू कर देंगे? बस्ती पुलिस की कार्यप्रणाली पर जनता की निगाहें टिकी हैं।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!