A2Z सभी खबर सभी जिले की

वृद्धाश्रम नाटक के मंचन का मार्मिक दृश्य देख भर आई दर्शकों की आंखें

तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा पूरा ऑडिटोरियम

वृद्धाश्रम नाटक के मंचन का मार्मिक दृश्य देख भर आई दर्शकों की आंखें, तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा पूरा ऑडिटोरियम

वन्दे भारत लाइव टीवी न्यूज़ कानपुर नगर।

सी बी ए गुरुकुल स्कूल के स्थापना दिवस के शुभ अवसर पर एक मार्मिक, भावपूर्ण और हृदय स्पर्शी नाटक ‘वृद्धाश्रम’ का मंचन किया गया।

IMG 20260626 WA0021

नाटक का शुभारंभ सर्वप्रथम माँ सरस्वती की वंदना के साथ शुरू हुआ। मुख्य अतिथि के रूप में अकबरपुर महाविद्यालय के पूर्व प्रबंधक डॉ नरेंद्र द्विवेदी और वर्तमान मंत्री अनिल शुक्ला जी द्वारा दीप प्रज्वलित किया गया।

‘वृद्धाश्रम’ पर आधारित नाटक की कहानी आमतौर पर आधुनिक जीवनशैली में बदलती पारिवारिक मूल्यों, संवेदनशीलता और पीढ़ियों के बीच के टकराव (जनरेशन गैप) को दर्शाती है। यह नाटक दर्शकों को गहराई से भावुक करते हुए समाज के लिए एक गहरा संदेश देती हैं।

Screenshot 20260627 201412 WhatsAppवृद्ध माँ (सरला देवी) अपने बेटे और परिवार के लिए चिंतित रहती है। बेटा अशोक आधुनिक सोच वाला है, लेकिन समय के अभाव में अपने माता-पिता को बोझ समझता लगता है। बहू (प्रीति) कामकाजी महिला, जिसे सास-ससुर की आदतें खटकती रहती हैं।

वृद्ध माँ को लेकर पति-पत्नी की रोज-रोज की नोक-झोंक से एक दिन बेटा अपनी माँ को वृद्धाश्रम में चार-पांच दिन बाद ले जाने का बहाना करके छोड़ आता है। वृद्ध माँ आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग लोगों से कहती है कि मेरा बेटा चार-पाँच दिन के लिए मुझे यहां छोड़ गया है फिर आकर ले जाएगा। बुजुर्ग उस मां की बात को सुनकर हंसते हैं और भावुक हो जाते हैं। चार-पांच दिन से भी ज्यादा बीत जाने पर जब बेटा अपनी माँ को लेने नहीं आता तो माँ की हालत अचानक खराब हो जाती है और वह खाँसते हुये जमीन पर गिर जाती कुछ देर बाद उसकी सांसें थम जाती है। और वह हमेशा-हमेशा के लिये इस दुनिया से अलविदा हो जाती है। इस मार्मिक दृश्य को देख नाटक में एक बुजुर्ग वर्मा जी का अहम किरदार निभा रहे कलाकार विनीत सिन्हा भावपूर्ण कटाक्ष वार करते हुये कहते हैं कि जिंदगी भर बेटों पर खुशियाँ लुटाने वाले माँ-बाप को किस जुर्म में आंसुओं और तन्हाई की सजा सुना दी जाती है…

 

नहीं चाहिये ऐसी औलाद नहीं चाहिये, कह दो सरला देवी के बेटे से अगर हो गये हों उनके चार-पांच दिन तो ले जाये, ले जाये अपनी माँ की लाश को और उनके रखे हुये समान को ले जाये – ले जाये… इसी बीच तालियों की गड़गड़ाहट से पूरा ऑडिटोरियम गूंज उठता है।

BeautyPlus 20260627202229698 save

‘वृद्धाश्रम’ नाटक का संवाद बहुत ही मार्मिक है। इस नाटक को देख दर्शक भावुक हो जाते हैं। वृद्धाश्रम एक संवेदनशील, मार्मिक और भावुक प्रस्तुति है, जो परिवारों में बुजुर्गों के महत्व और उनके अकेलेपन की कहानी को दर्शाती है।

‘वृद्धाश्रम’ नाटक का मंचन दर्शकों की आंखों में आंसू ला दिए। इसमें बुजुर्ग माता-पिता की अनदेखी करने की घटना का शानदार मंचन किया गया।

वृद्धाश्रम नाटक का मंचन और मार्मिक दृश्य देखकर दर्शकों की आंखें भर आतीi है।

नाटक का उद्देश्य समाज को यह संदेश देता कि माता-पिता ‘बोझ’ नहीं बल्कि परिवार की नींव होते हैं। हमें उनकी सेवा और सम्मान उसी तरह करना चाहिए, जैसे बचपन में उन्होंने हमारी उंगली पकड़कर हमें चलना सिखाया था।

IMG 20260626 WA0015

 

*करैक्टर आर्टिस्ट*

पापा- राज किशोर

माँ सराला देवी – विजय लक्ष्मी मिश्रा,

छोटा बेटा- वंश

बेटा अशोक- सुनील पाण्डेय,

बहु- रौशनी मैम,

मैनेजर- देवराज बासु,

संध्या- कशिश मैम,

सीमा- सोनी मैम,

वंदना- शिखा मैम,

राकेश- साहिल,

शर्मा जी- श्याम अकेला,

गुप्ता जी- गोविन्द सिंह,

और वर्मा जी का अहम किरदार कलाकार विनीत सिन्हा ने बखूबी निभाया। जिससे दर्शक तालियां बजाने को मजबूर हो गये।

IMG 20260626 WA0031

‘वृद्धाश्रम’ नाटक का निर्देशन वरिष्ठ रंगकर्मी संजय शर्मा जी ने किया।

मेकअप एंड एंकरिंग बॉबी खान, म्यूजिक मंजू बासु (प्रिंसिपल गुरुकुल स्कूल), प्लेबैक सिंगर्स एन्ड ट्रैक साउंड्स अलका, बॉबी, गोविंद जी ने किया कैमरा मैन – रौनक रहें। स्क्रीन ऑन एन्ड ऑफ शिवम् और शिवांश।

IMG 20260627 WA0017

प्रोग्राम के आयोजक सीबीए गुरुकुल स्कूल की प्रिंसिपल अर्चना पाण्डेय और प्रबंधक डॉ ए सी पाण्डेय ने आये हुये अतिथियों एवं अभिवावकों का स्वागत अभिनन्दन किया। कार्यक्रम के सफल आयोजन के पश्चात् सभी कलाकारों को मोमेंटो देकर सम्मानित किया गया। तत्पश्चात डॉ ए सी पाण्डेय ने समापन की घोषणा की।

Show More
Back to top button
error: Content is protected !!